NATO समिट में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान के साथ सीजफायर समाप्त होने की घोषणा की। इसके बाद अमेरिका ने ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। बढ़ते तनाव का असर तेल बाजार, शेयर बाजार और वैश्विक सुरक्षा पर भी दिखाई देने लगा है।
ब्रुसेल्स: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर गंभीर स्तर पर पहुंच गया है। NATO समिट के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनald ट्रम्प ने घोषणा की कि ईरान के साथ हुआ युद्धविराम (सीजफायर) समझौता अब प्रभावी नहीं रहा। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अमेरिका अब ईरान के साथ किसी नए समझौते की इच्छा नहीं रखता और यदि ईरान की ओर से कोई हमला होता है तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा।
ट्रम्प के इस बयान के कुछ ही समय पहले अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने पुष्टि की कि अमेरिकी सेना ने ईरान के 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई होर्मुज जलडमरूमध्य में वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई।
NATO समिट में ट्रम्प का सख्त संदेश
NATO सम्मेलन में मीडिया से बातचीत करते हुए ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ने ईरान के खिलाफ निर्णायक सैन्य कार्रवाई की है और आगे भी किसी भी खतरे का जवाब पूरी ताकत से दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि अमेरिका का उद्देश्य केवल ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सैन्य क्षमताओं को कमजोर करना है। ट्रम्प ने यह भी आरोप लगाया कि NATO के कई सहयोगी देशों ने ईरान के खिलाफ अमेरिका का अपेक्षित समर्थन नहीं किया। ट्रम्प के अनुसार, अमेरिका अब ऐसी किसी व्यवस्था का हिस्सा नहीं रहेगा जिसमें ईरान समझौते का उल्लंघन करता रहे और जवाबदेही से बचता रहे।
80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर अमेरिकी एयरस्ट्राइक
CENTCOM के अनुसार, अमेरिकी सेना ने अत्याधुनिक सटीक हथियारों (Precision Weapons) का उपयोग करते हुए ईरान के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। बंदर अब्बास स्थित शाहिद हक्कानी पोर्ट पर भी एयरस्ट्राइक की गई, जहां से धुएं के बड़े गुबार उठते दिखाई दिए।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का केंद्र
अमेरिका का कहना है कि ईरान समर्थित सैन्य गतिविधियों के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा प्रभावित हुई है। रिपोर्टों के अनुसार हाल के घटनाक्रम में तीन तेल टैंकरों को निशाना बनाया गया, जिनमें एक कतर से जुड़ा जहाज भी शामिल था। इसके बाद अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई को आवश्यक बताया। होर्मुज स्ट्रेट दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। इस क्षेत्र में किसी भी सैन्य तनाव का असर पूरी दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है।
ईरान ने अमेरिका पर समझौता तोड़ने का लगाया आरोप
ईरान ने अमेरिकी कार्रवाई को युद्धविराम समझौते का उल्लंघन बताया है। ईरानी विदेश मंत्रालय का कहना है कि अमेरिका ने बिना उचित कारण सैन्य कार्रवाई की और होर्मुज में जहाजों पर हमलों के आरोपों के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया। ईरानी अधिकारियों ने यह भी कहा कि किसी भी प्रकार की बातचीत धमकियों और सैन्य दबाव के बीच संभव नहीं है।

क्षेत्रीय देशों की प्रतिक्रिया
कतर ने अपने जहाज पर हुए कथित हमले की निंदा करते हुए ईरान को जिम्मेदार ठहराया। ओमान ने बहरीन, कुवैत और होर्मुज क्षेत्र में बढ़ते तनाव पर चिंता व्यक्त की और सभी पक्षों से संयम बरतने तथा कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील की। यूरोपीय संघ की विमानन एजेंसी ने एयरलाइंस को फिलहाल ईरान, इराक और लेबनान के हवाई क्षेत्र से बचने की सलाह जारी की है।
वैश्विक बाजारों पर दिखा असर
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय वित्तीय बाजारों में तुरंत दिखाई दिया। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में लगभग छह प्रतिशत की तेजी दर्ज की गई, जबकि यूरोपीय शेयर बाजारों में गिरावट देखी गई। भारत में भी निवेशकों की चिंता बढ़ी और शेयर बाजार में भारी बिकवाली देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों प्रमुख सूचकांकों में तेज गिरावट दर्ज की गई। बैंकिंग और FMCG सेक्टर के शेयरों पर सबसे अधिक दबाव रहा। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव लगातार बढ़ता है तो वैश्विक तेल कीमतों, शिपिंग लागत और महंगाई पर व्यापक असर पड़ सकता है।
ईरान की संभावित जवाबी कार्रवाई की चेतावनी
ईरानी सैन्य अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिकी सैन्य अभियान जारी रहता है तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को जवाबी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है। ईरान ने पहले भी बहरीन और कुवैत में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया था, हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
मिडिल ईस्ट में बढ़ती अनिश्चितता
विश्लेषकों का मानना है कि युद्धविराम समाप्त होने की घोषणा के बाद मध्य पूर्व में सैन्य और कूटनीतिक स्थिति और अधिक जटिल हो सकती है। यदि दोनों देशों के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव बढ़ता है तो इसका प्रभाव केवल क्षेत्रीय सुरक्षा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार, निवेश और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। संयुक्त राष्ट्र सहित कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के माध्यम से समाधान निकालने की अपील कर रही हैं।
आगे क्या देखना होगा
आने वाले दिनों में दुनिया की नजरें अमेरिका और ईरान की अगली रणनीति पर रहेंगी। यदि सैन्य कार्रवाई और जवाबी हमले जारी रहते हैं तो पश्चिम एशिया में अस्थिरता और बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि कूटनीतिक प्रयासों की सफलता ही इस संकट को व्यापक क्षेत्रीय संघर्ष में बदलने से रोक सकती है। फिलहाल तेल बाजार, वैश्विक शेयर बाजार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग सेक्टर इस पूरे घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए हैं।










