अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने UN महासभा में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दोहराते हुए समझौते की संभावना भी जताई। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने को प्राथमिकता बताया। इसी दौरान अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड ने नया सुरक्षा समझौता किया।
न्यूयॉर्क: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में ईरान को लेकर एक बार फिर बेहद कड़ा रुख अपनाया। 22 सितंबर 2026 को न्यूयॉर्क में दिए अपने भाषण में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के सामने ईरान के साथ समझौता करने या उसके खिलाफ और कठोर सैन्य कार्रवाई करने का विकल्प मौजूद है। उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने को अमेरिकी नीति की प्रमुख प्राथमिकता बताया।ट्रंप का यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चल रहा सैन्य संघर्ष क्षेत्रीय सुरक्षा, तेल आपूर्ति और वैश्विक ऊर्जा बाजारों पर असर डाल रहा है। हालांकि, ट्रंप ने अपने भाषण और बाद की टिप्पणियों में यह भी संकेत दिया कि दोनों देशों के बीच बातचीत के रास्ते अभी बंद नहीं हुए हैं। रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप ने 22 सितंबर को कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत जारी है और उन्हें भविष्य में किसी समझौते की उम्मीद है।
ईरान को लेकर ट्रंप का सख्त संदेश
UN महासभा में ट्रंप ने ईरान पर अमेरिका के सैन्य अभियान का बचाव किया। उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। ट्रंप ने बातचीत की संभावना का संकेत देते हुए सैन्य विकल्प को भी खुला रखा।
उनके भाषण से यह स्पष्ट हुआ कि वॉशिंगटन की प्राथमिक चिंता ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्र में उसकी सैन्य क्षमता है। ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से ईरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने का भी आह्वान किया।
ट्रंप के रुख में एक साथ दो संदेश दिखाई दिए—एक तरफ सैन्य दबाव जारी रखने की चेतावनी और दूसरी तरफ बातचीत के जरिए समझौते की संभावना। रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप ने कहा कि समझौता अमेरिकी मध्यावधि चुनावों के बाद भी हो सकता है। उनके इस बयान के बाद तेल बाजार में भी भू-राजनीतिक जोखिम को लेकर चिंता बनी रही।
ईरान युद्ध का असर तेल और वैश्विक बाजारों पर
अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर केवल मध्य पूर्व तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य और क्षेत्र के अन्य समुद्री मार्गों में तनाव बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ी है।
रॉयटर्स के अनुसार, ट्रंप के बयान के बाद 22 सितंबर को कच्चे तेल की कीमतों में तेजी देखी गई। ब्रेंट क्रूड नवंबर वायदा लगभग 99.94 डॉलर प्रति बैरल और WTI अक्टूबर वायदा करीब 95.43 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक तेल व्यापार के लिए महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। यहां लंबे समय तक तनाव रहने पर जहाजों के मार्ग, परिवहन लागत और ऊर्जा कीमतों पर असर पड़ सकता है।
अमेरिकी राजनीति में भी ईरान युद्ध बड़ा मुद्दा
ईरान युद्ध का असर अमेरिका की घरेलू राजनीति पर भी पड़ रहा है। सितंबर में Reuters/Ipsos के सर्वे में केवल 25% अमेरिकी नागरिकों ने कहा था कि ईरान के साथ युद्ध जारी रखना उचित है। यह सर्वे अमेरिकी मध्यावधि चुनावों से पहले हुआ है और इसमें युद्ध को लेकर व्यापक सार्वजनिक असंतोष सामने आया।
ऐसे समय में ट्रंप प्रशासन के लिए सैन्य अभियान और कूटनीतिक समाधान के बीच संतुलन महत्वपूर्ण हो गया है। हालांकि, ट्रंप ने सार्वजनिक रूप से कहा है कि उनकी ईरान नीति आगामी चुनावों से प्रभावित नहीं है।
रिपब्लिकन नेताओं के लिए भी युद्ध बना मुद्दा
ईरान संघर्ष से बढ़ती ऊर्जा कीमतें और युद्ध की लागत अमेरिकी राजनीति में चर्चा का विषय हैं। नवंबर में होने वाले मध्यावधि चुनावों से पहले रिपब्लिकन पार्टी के लिए यह मुद्दा महत्वपूर्ण हो सकता है।
ट्रंप की ओर से बातचीत की संभावना जताना और साथ ही सैन्य विकल्प खुला रखना इसी व्यापक राजनीतिक और रणनीतिक परिस्थिति के बीच देखा जा रहा है। हालांकि, किसी भी संभावित समझौते की शर्तें और समयसीमा अभी स्पष्ट नहीं है।
हूती हमलों से मध्य पूर्व की सुरक्षा चिंता
ईरान के साथ तनाव का एक और महत्वपूर्ण पहलू यमन के हूती समूह की गतिविधियां हैं। हूती लड़ाकों के हमलों ने लाल सागर और बाब-अल-मंदेब क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा को प्रभावित किया है।
यह समुद्री मार्ग एशिया, यूरोप और मध्य पूर्व के बीच व्यापार के लिए महत्वपूर्ण है। क्षेत्र में हमले बढ़ने पर जहाजों को वैकल्पिक और लंबे समुद्री मार्गों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है। इससे परिवहन लागत और कुछ वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना रहती है।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने भी UNGA के दौरान मध्य पूर्व में संघर्ष और ऊर्जा सुरक्षा को महत्वपूर्ण मुद्दों के रूप में उठाया। उन्होंने अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान संघर्ष, यूक्रेन और अन्य रणनीतिक विषयों पर चर्चा की।

ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान संघर्ष का भी किया जिक्र
UN महासभा के भाषण में ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को रोकने में अपनी भूमिका का दावा भी दोहराया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने कई संघर्षों को खत्म करने में मदद की है और भारत-पाकिस्तान विवाद को भी इसी सूची में रखा।
ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की प्रशंसा की। हालांकि, भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि पाकिस्तान के साथ उसके द्विपक्षीय मामलों में तीसरे पक्ष की मध्यस्थता स्वीकार नहीं की जाती। ट्रंप का यह दावा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उन्होंने पहले भी भारत-पाकिस्तान तनाव कम कराने में अमेरिकी भूमिका का उल्लेख किया है।
ग्रीनलैंड को लेकर अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड में समझौता
UNGA के दौरान ट्रंप प्रशासन ने ग्रीनलैंड को लेकर एक महत्वपूर्ण सुरक्षा समझौता भी किया। अमेरिका, डेनमार्क और ग्रीनलैंड के नेताओं ने 22 सितंबर को एक त्रिपक्षीय समझौते पर हस्ताक्षर किए।
समझौते के तहत ग्रीनलैंड में अमेरिकी सुरक्षा और सैन्य मौजूदगी का विस्तार किया जाएगा। रॉयटर्स के अनुसार, समझौते में नर्सार्सुआक और मेस्टर्सविग में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की स्थापना और मिसाइल रक्षा प्रणाली से जुड़े प्रावधान शामिल हैं।
व्हाइट हाउस ने इसे आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिकी सुरक्षा हितों को मजबूत करने वाला समझौता बताया है। समझौता ग्रीनलैंड की सुरक्षा में अमेरिका की दीर्घकालिक भूमिका बढ़ाता है, जबकि द्वीप डेनमार्क के साम्राज्य के भीतर ही बना रहेगा।
यह घटनाक्रम खास इसलिए है क्योंकि ट्रंप पहले ग्रीनलैंड को अमेरिका के नियंत्रण में लाने की इच्छा सार्वजनिक रूप से जाहिर कर चुके थे। नया समझौता क्षेत्रीय सुरक्षा और सैन्य सहयोग के जरिए अमेरिका की मौजूदगी बढ़ाने पर केंद्रित है।
जापान और ब्रिटेन के नेताओं से ट्रंप की मुलाकात
UN महासभा के दौरान ट्रंप ने कई वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। उन्होंने जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आर्थिक सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सेमीकंडक्टर और महत्वपूर्ण खनिजों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम के साथ ट्रंप की यह पहली आमने-सामने की बैठक थी। दोनों नेताओं ने ईरान, यूक्रेन, ऊर्जा, व्यापार और AI से जुड़े मुद्दों पर बातचीत की।
ट्रंप ने गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल के नेताओं के साथ भी बातचीत की। मध्य पूर्व की सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और ईरान संघर्ष इस क्षेत्रीय कूटनीति के प्रमुख मुद्दों में शामिल हैं।
UN में ट्रंप के भाषण का वैश्विक संदेश
ट्रंप का 2026 का UNGA भाषण कई मोर्चों पर अमेरिकी विदेश नीति का संकेत देता है। ईरान पर उन्होंने सैन्य दबाव और बातचीत दोनों विकल्प खुले रखे। ग्रीनलैंड समझौते के जरिए आर्कटिक में अमेरिकी सुरक्षा मौजूदगी बढ़ाने की दिशा दिखाई गई, जबकि जापान और ब्रिटेन के साथ बैठकों में गठबंधन सहयोग पर जोर रहा।
ईरान के मामले में आगे की दिशा अब बातचीत की प्रगति, परमाणु कार्यक्रम को लेकर शर्तों और क्षेत्रीय सुरक्षा स्थिति पर निर्भर करेगी। इस बीच तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर संघर्ष के प्रभाव के कारण अमेरिका-ईरान तनाव का असर वैश्विक स्तर पर बना हुआ है।












