United Arab Emirates ने 2027 तक क्रूड ऑयल उत्पादन बढ़ाकर 50 लाख बैरल प्रतिदिन करने की योजना बनाई है। इससे भारत और UAE के बीच ऊर्जा समझौतों, व्यापार और निवेश सहयोग को नई मजबूती मिलने की संभावना जताई जा रही है।
यूएई: United Arab Emirates ने आने वाले वर्षों में अपना कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ाने की महत्वाकांक्षी योजना पेश की है। देश ने 2027 तक प्रतिदिन 50 लाख बैरल क्रूड ऑयल उत्पादन का लक्ष्य तय किया है। इस फैसले को वैश्विक ऊर्जा बाजार और पश्चिम एशिया की बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि तेल उत्पादन बढ़ाने की इस रणनीति का सीधा असर एशियाई ऊर्जा बाजार, खासकर भारत जैसे बड़े आयातक देशों पर पड़ सकता है। इसके साथ ही भारत और UAE के बीच दीर्घकालिक ऊर्जा समझौतों तथा व्यापारिक सहयोग को नई गति मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।
OPEC से अलग होने के फैसले के बाद बड़ा संकेत
OPEC से अलग होने के फैसले के बाद UAE का यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में उसकी स्वतंत्र रणनीति को दर्शाता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, UAE अब तेल उत्पादन और निर्यात नीति में अधिक लचीलापन चाहता है, ताकि वह तेजी से बदलती वैश्विक ऊर्जा मांग के अनुरूप अपनी भूमिका मजबूत कर सके।
ऊर्जा बाजार विश्लेषकों का कहना है कि उत्पादन क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य यह भी संकेत देता है कि UAE भविष्य में एशियाई बाजारों, विशेषकर भारत और चीन, के लिए अधिक विश्वसनीय ऊर्जा आपूर्तिकर्ता बनना चाहता है।
भारत-UAE ऊर्जा संबंधों को मिल सकती है मजबूती
India दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा आयातकों में शामिल है और उसकी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशियाई देशों से पूरा होता है।
ऐसे में UAE द्वारा उत्पादन बढ़ाने की योजना भारतीय कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। माना जा रहा है कि दोनों देशों के बीच लंबी अवधि के तेल और गैस आपूर्ति समझौतों पर बातचीत तेज हो सकती है।
पूर्व भारतीय राजदूत Sanjay Sudhir ने कहा कि पश्चिम एशिया में मौजूदा हालात के बीच प्रधानमंत्री का UAE दौरा रणनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है।
उनके अनुसार, यह दौरा न केवल राजनीतिक समर्थन का संकेत है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की दिशा में भी बड़ा कदम हो सकता है।
प्रधानमंत्री स्तर की कूटनीति का बढ़ता महत्व
भारत और UAE के बीच हाल के वर्षों में उच्चस्तरीय कूटनीतिक संबंध तेजी से मजबूत हुए हैं।
विशेष रूप से Narendra Modi और Mohamed bin Zayed Al Nahyan के बीच बढ़ती नजदीकी ने दोनों देशों के रणनीतिक संबंधों को नई दिशा दी है।

विदेश मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों के बीच पहले से व्यापक रणनीतिक साझेदारी मौजूद है और मौजूदा दौरों का उद्देश्य व्यापार, निवेश, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना है।
UAE राष्ट्रपति का संक्षिप्त लेकिन महत्वपूर्ण भारत दौरा
UAE के राष्ट्रपति मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान इस वर्ष 19 जनवरी को भारत के संक्षिप्त दौरे पर आए थे।
करीब 105 मिनट के इस दौरे को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रोटोकॉल से हटकर दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर स्वयं उनका स्वागत किया था।
इस दौरान व्यापार, रक्षा और निवेश सहित कुल नौ महत्वपूर्ण समझौतों पर हस्ताक्षर हुए थे।
विशेषज्ञों के अनुसार, यह संकेत था कि भारत और UAE अपने रिश्तों को पारंपरिक व्यापारिक संबंधों से आगे बढ़ाकर रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक ले जाना चाहते हैं।
भारत का प्रमुख व्यापारिक साझेदार है UAE
United Arab Emirates भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है।
दोनों देशों के बीच वार्षिक व्यापार 6 लाख करोड़ रुपए से अधिक का बताया जाता है। इसमें ऊर्जा, इंफ्रास्ट्रक्चर, रत्न-आभूषण, खाद्य उत्पाद और तकनीकी उपकरण प्रमुख क्षेत्र हैं।
आंकड़ों के अनुसार, UAE भारत से लगभग 2 लाख करोड़ रुपए का आयात करता है, जबकि भारत UAE से अधिक मात्रा में तेल और अन्य उत्पाद आयात करता है।
इसी कारण भारत का UAE के साथ व्यापारिक घाटा बना हुआ है।
भारत क्या-क्या निर्यात करता है?
भारत से UAE को कई महत्वपूर्ण वस्तुओं का निर्यात किया जाता है।
इनमें पेट्रोलियम उत्पाद, धातु, पत्थर, जेम्स एंड ज्वेलरी, मिनरल्स और विभिन्न खाद्य उत्पाद शामिल हैं।
इसके अलावा भारत अनाज, चीनी, फल, सब्जियां, चाय, मांस, सीफूड, टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग मशीनरी और रसायनों का भी बड़े पैमाने पर निर्यात करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि UAE भारतीय उत्पादों के लिए पश्चिम एशिया और अफ्रीका के बाजारों तक पहुंच का महत्वपूर्ण केंद्र भी बन चुका है।
ऊर्जा सुरक्षा भारत के लिए क्यों अहम?
भारत की तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के कारण ऊर्जा मांग लगातार बढ़ रही है।
ऐसे में स्थिर और विश्वसनीय तेल आपूर्ति भारत की आर्थिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। पश्चिम एशिया में किसी भी तरह का भू-राजनीतिक तनाव वैश्विक तेल कीमतों और भारतीय अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि UAE जैसे स्थिर साझेदारों के साथ दीर्घकालिक ऊर्जा समझौते भारत को भविष्य में ऊर्जा आपूर्ति संबंधी जोखिमों से बचाने में मदद कर सकते हैं।
पश्चिम एशिया की बदलती राजनीति और भारत
पश्चिम एशिया में बदलते रणनीतिक समीकरणों के बीच भारत संतुलित कूटनीति अपनाने की कोशिश कर रहा है।
भारत के UAE, सऊदी अरब, कतर और अन्य खाड़ी देशों के साथ मजबूत आर्थिक और ऊर्जा संबंध हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, भारत अब केवल ऊर्जा आयातक के रूप में नहीं, बल्कि निवेश, टेक्नोलॉजी और व्यापारिक साझेदारी के क्षेत्र में भी अपनी भूमिका बढ़ा रहा है।
निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर में सहयोग की संभावना
ऊर्जा के अलावा दोनों देशों के बीच इंफ्रास्ट्रक्चर, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल अर्थव्यवस्था में भी सहयोग बढ़ रहा है।
UAE की कंपनियां भारत के कई बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स में निवेश कर रही हैं, जबकि भारतीय कंपनियां भी UAE के बाजार में तेजी से विस्तार कर रही हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में यह साझेदारी ऊर्जा से आगे बढ़कर व्यापक आर्थिक सहयोग का रूप ले सकती है।










