उद्धव ठाकरे ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि ‘शेर का ऑपरेशन करने वाला अभी पैदा नहीं हुआ।’ उन्होंने गरबा में प्रवेश, राष्ट्रीय पुरस्कार और UBT पार्षदों पर कार्रवाई समेत कई मुद्दों पर भी सरकार को घेरा।
मुंबई: शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ समेत कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ‘ऑपरेशन टाइगर’ के संदर्भ में कहा कि ‘शेर का ऑपरेशन करने वाला अभी कोई पैदा नहीं हुआ है।’ ठाकरे ने यह भी कहा कि जब उनकी पार्टी ‘शेर के बाघ’ निकाल देगी, तो विरोधी भाग जाएंगे। उद्धव ठाकरे ने यह टिप्पणी कई मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए की। उन्होंने नवरात्रि के दौरान गरबा आयोजनों में प्रवेश से जुड़ी मांगों, राष्ट्रीय पुरस्कारों को गुजरात में आयोजित करने, शिवसेना (UBT) के पार्षदों पर कथित कार्रवाई और दिल्ली में इमारत गिरने की घटना को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए।
‘ऑपरेशन टाइगर’ पर उद्धव ठाकरे का बयान
शिवसेना (UBT) प्रमुख ने ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर सरकार पर राजनीतिक हमला बोला। उन्होंने अपने बयान में कहा कि शेर का ऑपरेशन करने वाला अभी पैदा नहीं हुआ है। ठाकरे ने दावा किया कि जब उनकी ओर से ‘शेर के बाघ’ निकाले जाएंगे, तब विरोधी भाग जाएंगे।
हालांकि, ठाकरे के बयान में ‘ऑपरेशन टाइगर’ से उनका आशय किस विशेष राजनीतिक या सरकारी कार्रवाई से था, इसे लेकर उपलब्ध जानकारी में विस्तृत स्पष्टीकरण नहीं दिया गया है। ऐसे में उनके बयान को उनके राजनीतिक रुख और सरकार की आलोचना के संदर्भ में देखा जा रहा है।
ठाकरे ने अपने संबोधन में सरकार और विरोधी राजनीतिक समूहों पर लगातार हमला जारी रखा और विभिन्न मुद्दों को महाराष्ट्र की राजनीति से जोड़कर सवाल उठाए।
गरबा में प्रवेश की मांग पर VHP को घेरा
उद्धव ठाकरे ने नवरात्रि के दौरान गरबा कार्यक्रमों में मुस्लिम लोगों के प्रवेश पर रोक और हिंदुओं से टीका लगाकर आने की विश्व हिंदू परिषद (VHP) की मांग पर भी प्रतिक्रिया दी।
ठाकरे ने इन मांगों की आलोचना करते हुए कहा कि उनके अनुसार त्योहार मनाने की परंपरा किसी नई राजनीतिक या सामाजिक मांग पर निर्भर नहीं रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि जो लोग आज इस तरह की नई शर्तें रख रहे हैं, वे पहले कहां थे।
उन्होंने इस मुद्दे पर अपने बयान में VHP से जुड़े लोगों के लिए ‘गोमूत्रधारी हिंदू’ जैसी टिप्पणी का इस्तेमाल किया और इसे उनके हिंदुत्व के नजरिए से जोड़कर निशाना साधा।
ठाकरे ने कहा कि महाराष्ट्र में लोग लंबे समय से त्योहार मनाते आ रहे हैं और नई शर्तों या मांगों के कारण त्योहारों की परंपरा नहीं बदली जानी चाहिए।
त्योहारों के दौरान हिंसा की आशंका जताई
उद्धव ठाकरे ने त्योहारों के दौरान संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने आशंका जताई कि त्योहारों के दौरान कुछ लोग माहौल खराब करने या दंगा भड़काने की कोशिश कर सकते हैं।
उन्होंने गणपति उत्सव से पहले हुए दो हादसों का उल्लेख करते हुए कहा कि मुंबई जैसे बड़े शहर में बाहर से कोई व्यक्ति आकर गलत गतिविधि कर सकता है और उसके बारे में तुरंत जानकारी नहीं मिलती।
ठाकरे ने सरकार से सवाल किया कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए पहले से क्या कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था और संभावित खतरों की निगरानी को लेकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए।
राष्ट्रीय पुरस्कारों को गुजरात में शिफ्ट करने पर सवाल
उद्धव ठाकरे ने राष्ट्रीय पुरस्कारों के आयोजन स्थल को दिल्ली से गुजरात ले जाने के मुद्दे पर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता जैसे शहर क्या देश का हिस्सा नहीं हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि गुजरात और देश के बाकी हिस्सों के बीच एक तरह की राजनीतिक दीवार खड़ी करने की कोशिश की जा रही है। ठाकरे ने इस फैसले में राजनीति होने का आरोप लगाया।
उनका कहना था कि राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों और पुरस्कार समारोहों के आयोजन को किसी एक राज्य तक सीमित करने के बजाय देश के विभिन्न शहरों को भी समान महत्व दिया जाना चाहिए।
UBT पार्षदों की सदस्यता पर भी उठाए सवाल
शिवसेना (UBT) प्रमुख ने अपनी पार्टी के पार्षदों के खिलाफ कथित कार्रवाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पार्षदों के पद जाति प्रमाणपत्र से जुड़े मामलों का हवाला देकर रद्द किए जा रहे हैं।
ठाकरे ने दावा किया कि 16 लोगों ने एकनाथ शिंदे गुट के खिलाफ याचिकाएं दाखिल की हैं और उन मामलों में फैसले हो रहे हैं। दूसरी ओर, उनके अनुसार शिवसेना (UBT) की ओर से शिंदे गुट के खिलाफ दाखिल याचिकाओं पर कोई निर्णय नहीं हो रहा है।
उन्होंने सवाल किया कि दोनों पक्षों के मामलों में अलग-अलग रवैया क्यों अपनाया जा रहा है। ठाकरे ने इसे कथित राजनीतिक भेदभाव से जोड़ते हुए सरकार से जवाब मांगा।
हालांकि, संबंधित मामलों में अंतिम कानूनी स्थिति और सभी दावों का आकलन संबंधित न्यायिक या प्रशासनिक आदेशों के आधार पर ही किया जा सकता है।
दिल्ली इमारत हादसे पर सरकार को घेरा
उद्धव ठाकरे ने दिल्ली में इमारत गिरने से हुई मौतों को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने जर्जर इमारतों की सुरक्षा जांच और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े किए।
ठाकरे ने पूछा कि क्या ऐसी इमारतों का समय पर निरीक्षण किया गया था और क्या जर्जर इमारतों की सूची तैयार की गई थी। उन्होंने सवाल किया कि यदि किसी इमारत की स्थिति खराब थी, तो हादसे से पहले आवश्यक कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
उन्होंने इस तरह की घटनाओं के लिए प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
शिंदे गुट से जुड़े घटनाक्रम के बाद ठाकरे को झटका
उद्धव ठाकरे इससे पहले भी शिवसेना में विभाजन और उससे जुड़े राजनीतिक घटनाक्रम को लेकर चर्चा में रहे हैं। जुलाई 2026 में उनके गुट के कुछ बागी सांसदों को एकनाथ शिंदे गुट में शामिल होने की अनुमति मिलने की खबर सामने आई थी।
शिवसेना में विभाजन के बाद ठाकरे और शिंदे गुट के बीच राजनीतिक और कानूनी संघर्ष लगातार जारी रहा है। दोनों पक्षों के बीच पार्टी संगठन, निर्वाचित प्रतिनिधियों और राजनीतिक विरासत को लेकर लंबे समय से विवाद रहा है।
ऐसे माहौल में उद्धव ठाकरे का ताजा बयान महाराष्ट्र की राजनीति में जारी टकराव को दर्शाता है। उनके संबोधन में सरकार की नीतियों से लेकर सामाजिक और प्रशासनिक मुद्दों तक कई विषय शामिल रहे।
महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाजी तेज
उद्धव ठाकरे के ताजा बयानों से संकेत मिलता है कि शिवसेना (UBT) सरकार और अपने राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ आक्रामक रुख बनाए रखना चाहती है। ‘ऑपरेशन टाइगर’ पर उनकी टिप्पणी से लेकर गरबा, राष्ट्रीय पुरस्कारों और पार्षदों से जुड़े मामलों तक ठाकरे ने कई मुद्दों पर सरकार की आलोचना की।
वहीं, उनके आरोपों पर संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया इस राजनीतिक बहस को आगे बढ़ा सकती है। खासकर ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर ठाकरे की टिप्पणी आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति में चर्चा का विषय बन सकती है।
फिलहाल ठाकरे के बयान राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का हिस्सा हैं। उनके द्वारा लगाए गए आरोपों पर संबंधित सरकार या अन्य पक्षों की आधिकारिक प्रतिक्रिया आने के बाद तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।









