ब्रिटेन में रक्षा बजट के दावे पर विवाद, सांख्यिकी प्राधिकरण ने कीर स्टारमर के £270 अरब के आंकड़े को बताया भ्रामक

यूके स्टैटिस्टिक्स अथॉरिटी ने पूर्व प्रधानमंत्री कीर स्टारमर के £270 अरब रक्षा खर्च के दावे को भ्रामक बताया। जानिए पूरा विवाद, सरकार का जवाब, प्रतिक्रिया।

ब्रिटेन में पूर्व प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर द्वारा रक्षा खर्च को लेकर किया गया £270 अरब का दावा विवादों में आ गया है। यूके स्टैटिस्टिक्स अथॉरिटी ने इसे भ्रामक बताते हुए स्पष्ट किया कि यह अतिरिक्त खर्च नहीं, बल्कि चार वर्षों के लिए प्रस्तावित कुल रक्षा बजट है।

लंदन: ब्रिटेन में रक्षा खर्च को लेकर पूर्व प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर के एक बयान पर नया राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। यूके स्टैटिस्टिक्स अथॉरिटी (UK Statistics Authority) ने कहा है कि स्टारमर, वेल्स ऑफिस और रक्षा मंत्रालय (Ministry of Defence) द्वारा रक्षा बजट से जुड़ा £270 अरब का दावा भ्रामक था। प्राधिकरण के अनुसार इस राशि को अतिरिक्त रक्षा खर्च के रूप में प्रस्तुत किया गया, जबकि वास्तव में यह 2025-26 से 2028-29 तक की अवधि के लिए प्रस्तावित कुल रक्षा बजट है।

इस टिप्पणी के बाद विपक्ष ने सरकार पर जनता को भ्रमित करने का आरोप लगाया है, जबकि सरकार ने स्वीकार किया कि बयान की भाषा उपयुक्त नहीं थी और भविष्य में ऐसे दावों से बचने का आश्वासन दिया है।

क्या था £270 अरब का दावा?

मार्च 2026 में संसद की लायजन समिति की बैठक के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री सर कीर स्टारमर ने कहा था कि सरकार 2027 तक रक्षा खर्च को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) के 2.5 प्रतिशत तक पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा था कि मौजूदा संसदीय कार्यकाल के दौरान सरकार रक्षा पर £270 अरब अधिक खर्च करेगी। बाद में जून में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ताओं और वेल्स ऑफिस ने भी इसी प्रकार के दावे दोहराए। वेल्स ऑफिस ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी पोस्ट किया था कि सरकार इस संसद के दौरान राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए रक्षा खर्च में £270 अरब की बढ़ोतरी कर रही है।

सांख्यिकी प्राधिकरण ने क्यों बताया भ्रामक?

यूके स्टैटिस्टिक्स अथॉरिटी ने स्पष्ट किया कि £270 अरब को अतिरिक्त रक्षा खर्च के रूप में प्रस्तुत करना तथ्यात्मक रूप से सही नहीं है। प्राधिकरण की अंतरिम अध्यक्ष पेनी यंग ने कंजर्वेटिव पार्टी के शैडो रक्षा मंत्री जेम्स कार्टलिज को भेजे पत्र में कहा कि यह राशि 2025-26 से 2028-29 तक पूरे संसदीय कार्यकाल के लिए प्रस्तावित कुल रक्षा व्यय है, न कि मौजूदा बजट के ऊपर अतिरिक्त £270 अरब। उन्होंने कहा कि इस आंकड़े को "रक्षा खर्च में £270 अरब की वृद्धि" या "अतिरिक्त £270 अरब" बताना गलत और भ्रामक है। ऐसे दावों से आम जनता में वास्तविक सरकारी खर्च को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है।

सरकार ने मानी भाषा संबंधी गलती

रिपोर्ट सामने आने के बाद ब्रिटेन सरकार के प्रवक्ता ने कहा कि सरकार पहले ही स्वीकार कर चुकी है कि इस दावे में इस्तेमाल की गई भाषा उचित नहीं थी। उन्होंने बताया कि जैसे ही इस त्रुटि की जानकारी मिली, संबंधित विभागों को इसे दोहराने से रोकने के लिए तत्काल कदम उठाए गए। डाउनिंग स्ट्रीट ने इस मुद्दे पर अतिरिक्त टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। वहीं वेल्स ऑफिस ने सोशल मीडिया पर किया गया विवादित पोस्ट हटा दिया और अपनी आंतरिक गुणवत्ता जांच प्रक्रिया की समीक्षा शुरू कर दी।

रक्षा मंत्रालय और वेल्स ऑफिस ने किए सुधार

यूके स्टैटिस्टिक्स अथॉरिटी के अनुसार वेल्स ऑफिस ने स्वीकार किया कि £270 अरब वाले आंकड़े का इस्तेमाल गलती से हुआ था। विभाग ने भरोसा दिलाया कि भविष्य में प्रेस विज्ञप्तियों और आधिकारिक बयानों में तथ्यों की बेहतर जांच की जाएगी ताकि ऐसी गलती दोबारा न हो। रक्षा मंत्रालय ने भी कहा कि भविष्य में रक्षा बजट से जुड़े आंकड़े जारी करते समय अधिक सटीक और स्पष्ट भाषा का उपयोग किया जाएगा। प्राधिकरण ने इन सुधारात्मक कदमों का स्वागत करते हुए कहा कि इससे भविष्य में भ्रामक दावों की संभावना कम होगी।

सरकार में बदलाव के बाद भी जारी बहस

यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब जुलाई 2026 में सर कीर स्टारमर ने प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया था और उनके स्थान पर एंडी बर्नहैम ने सरकार की कमान संभाली। हालांकि बयान स्टारमर के कार्यकाल का है, लेकिन विपक्ष का कहना है कि सरकारी विभागों द्वारा बाद में भी उसी दावे को दोहराया गया, जिससे भ्रम और बढ़ा। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सरकार बदलने के बावजूद सरकारी संचार की विश्वसनीयता और आंकड़ों की पारदर्शिता पर यह बहस लंबे समय तक जारी रह सकती है।

विपक्ष ने सरकार पर साधा निशाना

कंजर्वेटिव पार्टी की शैडो वेल्स सेक्रेटरी मिम्स डेविस ने सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि वैश्विक स्तर पर बढ़ती सुरक्षा चुनौतियों के बीच जनता को रक्षा बजट के बारे में स्पष्ट और सटीक जानकारी मिलनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार और उसके विभागों का दायित्व तथ्यों को सही रूप में प्रस्तुत करना है, न कि ऐसे आंकड़ों का इस्तेमाल करना जिससे लोगों को भ्रमित होने की आशंका हो। उनके अनुसार रक्षा जैसे संवेदनशील विषय पर पारदर्शिता लोकतांत्रिक जवाबदेही का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

रक्षा बजट पर पारदर्शिता क्यों महत्वपूर्ण?

विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा बजट किसी भी देश की राष्ट्रीय सुरक्षा, सैन्य आधुनिकीकरण और अंतरराष्ट्रीय रणनीति का महत्वपूर्ण आधार होता है। इसलिए इस संबंध में प्रस्तुत किए जाने वाले आंकड़ों की सटीकता अत्यंत आवश्यक है।

यदि कुल प्रस्तावित बजट और अतिरिक्त खर्च के बीच स्पष्ट अंतर नहीं बताया जाता, तो जनता और नीति विश्लेषकों के लिए वास्तविक वित्तीय स्थिति का आकलन करना कठिन हो सकता है। यही कारण है कि यूके स्टैटिस्टिक्स अथॉरिटी ने सरकारी विभागों को भविष्य में अधिक स्पष्ट और तथ्यपरक भाषा अपनाने की सलाह दी है।

आगे क्या?

इस विवाद के बाद उम्मीद की जा रही है कि ब्रिटेन सरकार अपने सभी विभागों में आधिकारिक आंकड़ों की प्रस्तुति के लिए अधिक कड़े दिशा-निर्देश लागू करेगी। साथ ही विपक्ष इस मुद्दे को संसद में भी उठाने की तैयारी कर सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि रक्षा व्यय जैसे संवेदनशील विषयों पर पारदर्शिता और विश्वसनीय संचार सरकार की साख बनाए रखने के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। ऐसे मामलों में आंकड़ों की गलत व्याख्या न केवल राजनीतिक विवाद को जन्म देती है, बल्कि जनता के विश्वास को भी प्रभावित कर सकती है।

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