संयुक्त राष्ट्र में भारत ने लालकिले धमाके के बाद सीमा पार से हथियार और वित्तीय समर्थन पर कड़ा रुख दिखाया। UNSC से व्यापक कार्रवाई और हथियार प्रतिबंध लागू करने, आरोपियों को जवाबदेही देने की मांग की गई। सुरक्षा सुनिश्चित हो।
New Delhi: दिल्ली में लाल किले के पास हुए धमाके ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर आतंकवाद के मुद्दे को केंद्र में ला दिया है। इसी क्रम में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UN Security Council) की बैठक में भारत ने आतंकवाद और हथियारों की तस्करी पर सख्त रुख अपनाते हुए कड़ा संदेश दिया। भारत के स्थायी राजदूत परवतनेनी हरीश ने पाकिस्तान का नाम लिए बिना सीमा पार से आतंकवाद को मिलने वाले सहयोग पर सवाल उठाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि छोटे हथियारों और गोलाबारूद की निरंतर सप्लाई किसी बाहरी मदद, धन और समर्थन के बिना संभव नहीं है।
'सीमा पार आतंकवाद भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा'
हरीश ने बताया कि भारत लंबे समय से आतंकवाद का सामना कर रहा है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद (Terrorism) की जड़ें गहरी हैं और इसे बढ़ाने में सीमा पार से भेजे जा रहे छोटे हथियार, ड्रोन द्वारा गिराया जा रहा गोला-बारूद और अवैध वित्तीय सहायता मुख्य भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि भारत को बार-बार ऐसे हमलों का सामना करना पड़ा है जिनके पीछे संगठित नेटवर्क हैं।
उन्होंने कहा कि छोटे हथियार (Small Arms) और हल्के हथियार (Light Weapons) आतंकवादी संगठनों को सक्रिय रखते हैं। यदि इन हथियारों की सप्लाई रोकी जाए तो आतंकी समूहों की ताकत बहुत हद तक कमजोर हो जाएगी।
'सपोर्ट के बिना हथियारों की तस्करी संभव नहीं'
हरीश ने जोर देकर कहा कि यह तथ्य अपने-आप बहुत कुछ कह देता है कि किस प्रकार से यह हथियार इन आतंकी संगठनों तक पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय गंभीर है, तो उसे यह मानना होगा कि यह पूरा तंत्र सीमा पार समर्थन, पैसे के स्रोत और आतंकी ढांचे को सुरक्षित पनाह देने वाले राष्ट्रों के दखल के बिना संभव नहीं है।
UN से की सख्त कार्रवाई की मांग
भारत ने UNSC से कहा कि उसे आतंकवाद पर Zero Tolerance Policy (ज़ीरो टॉलरेंस नीति) अपनानी होगी। हरीश ने कहा कि सुरक्षा परिषद का दायित्व है कि वह सिर्फ निंदा करने तक सीमित न रहे, बल्कि ऐसे देशों और संगठनों पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करे जो आतंकवाद को आर्थिक, सैन्य या राजनीतिक सहायता प्रदान करते हैं।
हथियार एम्बार्गो लागू करने में सख्ती पर जोर
भारत ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र द्वारा लागू किए गए Weapons Embargo (हथियार प्रतिबंध) को सही रूप से लागू करना आवश्यक है। कई संवेदनशील और संघर्ष वाले क्षेत्रों में यह प्रतिबंध सिर्फ कागज़ों में रह जाता है। हरीश के अनुसार, यदि यह प्रतिबंध सख्ती से लागू हो जाए तो हथियारों और गोला-बारूद की सप्लाई चैन काफी हद तक टूट जाएगी।











