परिषदीय स्कूलों में कक्षा 1 से 8 की प्रथम सत्रीय परीक्षा, विद्यालय स्तर पर तैयार होंगे प्रश्न

UP के परिषदीय स्कूलों में कक्षा 1 से 8 की प्रथम सत्रीय परीक्षा होगी। जुलाई तक पढ़ाए पाठ्यक्रम से प्रश्न तैयार होंगे और कमजोर छात्रों की विशेष तैयारी कराई जाएगी।

उत्तर प्रदेश के परिषदीय और मान्यता प्राप्त स्कूलों में कक्षा 1 से 8 तक की प्रथम सत्रीय परीक्षा आयोजित होगी। प्रश्न जुलाई तक पढ़ाए गए पाठ्यक्रम से तैयार किए जाएंगे और परीक्षा के बाद विद्यार्थियों की प्रगति अभिभावकों से साझा की जाएगी।

प्रयागराज: बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित परिषदीय और मान्यता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों की प्रथम सत्रीय परीक्षा आयोजित की जाएगी। प्रश्न विद्यालय स्तर पर कक्षा के अनुसार तैयार होंगे। मूल्यांकन के बाद कमजोर प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को चिह्नित कर उनकी पढ़ाई में सुधार के लिए विशेष तैयारी और पुनरावृत्ति कराई जाएगी।

कक्षा स्तर पर तैयार होंगे परीक्षा के प्रश्न

बेसिक शिक्षा परिषद से संचालित परिषदीय और मान्यता प्राप्त विद्यालयों में कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए प्रथम सत्रीय परीक्षा आयोजित की जाएगी। परीक्षा के प्रश्न जुलाई तक पूरा कराए गए पाठ्यक्रम के आधार पर तैयार किए जाएंगे। प्रश्नपत्र तैयार करने की जिम्मेदारी विद्यालय स्तर पर प्रधानाध्यापक की होगी।

परीक्षा व्यवस्था को स्कूल स्तर पर संचालित किया जाएगा। शिक्षक ब्लैक बोर्ड पर प्रश्न लिखेंगे और विद्यार्थी उनके उत्तर अपनी कॉपी में देंगे। मूल्यांकन का काम संबंधित कक्षा शिक्षक या विषय शिक्षक करेंगे। परीक्षा और मूल्यांकन से जुड़े रिकॉर्ड भी विद्यालय स्तर पर सुरक्षित रखने होंगे।

परीक्षा के बाद अभिभावकों को बताई जाएगी प्रगति

विद्यार्थियों के मूल्यांकन के बाद अभिभावकों को विद्यालय बुलाकर उनके बच्चों की शैक्षणिक प्रगति के बारे में जानकारी दी जाएगी। जिन विद्यार्थियों का प्रदर्शन अपेक्षित स्तर से कम रहेगा, उन्हें अलग से चिह्नित किया जाएगा।

कमजोर विद्यार्थियों के लिए विषयवार तैयारी और revision पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। शिक्षकों को ऐसे छात्रों की learning gaps पहचानकर कक्षा में ही अतिरिक्त अभ्यास और पुनरावृत्ति कराने के निर्देश दिए गए हैं।

साल में चार बार होगा विद्यार्थियों का मूल्यांकन

कक्षा 1 से 8 तक के विद्यार्थियों के मूल्यांकन को व्यापक बनाने के लिए पूरे शैक्षणिक सत्र में चार प्रमुख परीक्षाएं निर्धारित की गई हैं। इनमें अगस्त और दिसंबर में होने वाली सत्रीय परीक्षाओं के अलावा अक्टूबर में अर्द्धवार्षिक और मार्च में वार्षिक परीक्षा शामिल है।

लिखित परीक्षा के साथ विषयवार मौखिक मूल्यांकन को भी व्यवस्था में शामिल किया गया है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों की पढ़ाई का नियमित आकलन करना और समय रहते कमजोर क्षेत्रों पर काम करना है।

परीक्षा के सुचारू संचालन की जिम्मेदारी विद्यालय स्तर पर प्रधानाध्यापक और शिक्षकों की होगी। विकासखंड स्तर पर खंड शिक्षा अधिकारी परीक्षा व्यवस्था की निगरानी करेंगे। परीक्षा से जुड़े आवश्यक खर्च के लिए विद्यालय में उपलब्ध कंपोजिट ग्रांट का इस्तेमाल किया जाएगा।

Leave a comment