कांग्रेस कार्यसमिति ने विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को तत्काल रोकने, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और हटाए गए 13.30 करोड़ नाम बहाल करने की मांग की है। चुनाव आयोग ने अपने आदेशों को कानूनी प्रक्रिया के अनुरूप बताया।
नई दिल्ली: मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच विवाद और तेज हो गया है। कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे, SIR प्रक्रिया को रोकने और उसके तहत हटाए गए बताए जा रहे 13.30 करोड़ मतदाताओं के नाम बहाल करने की मांग की है। कांग्रेस कार्यसमिति की ओर से पारित प्रस्ताव में मतदाता सूची पुनरीक्षण की प्रक्रिया की पारदर्शिता, चुनावी सूचियों की विश्वसनीयता और SIR की संवैधानिक वैधता को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। कांग्रेस का दावा है कि SIR के दौरान 13.30 करोड़ भारतीयों के नाम मतदाता सूची से हटाए गए हैं।
हालांकि, यह संख्या और कांग्रेस के लगाए गए आरोप राजनीतिक विवाद का विषय हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि उसके आदेशों को पूर्ण कानूनी समर्थन हासिल है और सभी प्रक्रियाएं स्थापित वैधानिक नियमों के तहत की जाती हैं।
CWC ने रखीं तीन प्रमुख मांगें
कांग्रेस कार्यसमिति के प्रस्ताव में तीन मुख्य मांगें दर्ज की गई हैं। पहली मांग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की है। दूसरी मांग SIR को तत्काल निलंबित करने की है। तीसरी मांग उन 13.30 करोड़ नामों को तत्काल बहाल करने की है, जिन्हें कांग्रेस के अनुसार मतदाता सूची से हटा दिया गया है।
कांग्रेस ने SIR के तहत तैयार की जा रही मतदाता सूचियों की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर सवाल उठाते हुए प्रक्रिया की संवैधानिक वैधता पर भी आपत्ति जताई है। पार्टी का कहना है कि मतदाता पात्रता साबित करने का भार नागरिकों पर डालना और पर्याप्त पारदर्शी सुरक्षा उपायों के बिना प्रक्रिया को तेजी से लागू करना गंभीर चिंताएं पैदा करता है।
अनुच्छेद 14 और 326 का हवाला
CWC ने अपने संवैधानिक तर्क में संविधान के अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 326 का उल्लेख किया है। कांग्रेस का तर्क है कि ऐसी प्रक्रिया जिसमें नागरिकों को अपनी पात्रता साबित करने का भार उठाना पड़े और जिसके परिणामस्वरूप बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित होने की स्थिति पैदा हो, समानता और सार्वभौमिक वयस्क मताधिकार के संवैधानिक प्रावधानों के साथ मेल नहीं खाती।
यह कांग्रेस द्वारा पेश किया गया संवैधानिक तर्क है। इसके आधार पर SIR की वैधता को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति का निर्धारण संबंधित न्यायिक और संवैधानिक प्रक्रियाओं से होगा।
दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों का मुद्दा
कांग्रेस कार्यसमिति ने चुनाव आयोग के भीतर कथित मतभेदों को भी अपने प्रस्ताव में प्रमुखता से उठाया है।
द इंडियन एक्सप्रेस की एक जांच के मुताबिक, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार रिकॉर्ड पर आपत्तियां दर्ज की थीं। रिपोर्ट के अनुसार, इन आपत्तियों में SIR से जुड़े कुछ फैसले, नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले Form 6 में बदलाव और मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकरण जैसे मुद्दे शामिल थे।
रिपोर्ट के अनुसार, दोनों चुनाव आयुक्तों ने कुछ कदमों को कथित तौर पर "unauthorised" और "illegal" बताया था। उन्होंने मतदाता डेटाबेस तक पहुंच और उसके प्रबंधन के केंद्रीकरण को लेकर भी चिंता जताई थी।
कांग्रेस ने इन रिपोर्टों को चुनाव आयोग की संस्थागत कार्यप्रणाली को लेकर अपनी चिंताओं के समर्थन में इस्तेमाल किया है।
चुनाव आयोग ने मतभेदों को बताया सामान्य प्रक्रिया
चुनाव आयोग ने इन आरोपों के जवाब में कहा है कि किसी भी संस्थान में विचारों और टिप्पणियों में अंतर होना सामान्य deliberative process का हिस्सा है। आयोग के अनुसार, उसके सभी आदेशों को पूर्ण कानूनी समर्थन हासिल है और वे स्थापित वैधानिक प्रक्रियाओं के अनुरूप जारी किए जाते हैं।
आयोग ने यह भी कहा कि संधू और जोशी की ओर से कैबिनेट सचिव को भेजे गए पत्र एक प्रतिनियुक्ति पर आए अधिकारी से संबंधित थे, न कि नीति या IT डिविजन से जुड़े मामलों पर।
इससे SIR को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच मुख्य विवाद बना हुआ है—कांग्रेस प्रक्रिया की पारदर्शिता और वैधता पर सवाल उठा रही है, जबकि आयोग अपनी प्रक्रियाओं को कानूनी और संस्थागत नियमों के अनुरूप बता रहा है।
कांग्रेस ने अपने आंदोलन का भी किया जिक्र
CWC प्रस्ताव में कांग्रेस ने SIR के खिलाफ चलाए गए अपने राजनीतिक और कानूनी अभियान का भी उल्लेख किया। पार्टी ने बिहार में Voter Adhikar Yatra, कर्नाटक, महाराष्ट्र और हरियाणा में मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद चलाए गए राष्ट्रव्यापी "Vote Chori" अभियान, EAGLE समूह की चुनाव आयोग के साथ बातचीत और प्रक्रियात्मक बदलावों पर लिखित आपत्तियों का जिक्र किया।
इसके अलावा पार्टी ने SIR के खिलाफ कानूनी चुनौतियों, संसद में INDIA ब्लॉक के विरोध और चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च का भी उल्लेख किया।
कांग्रेस ने कहा है कि वह इस मुद्दे को संसद, अदालतों और सड़कों पर उठाती रहेगी। पार्टी का कहना है कि उसका लक्ष्य मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा और चुनाव आयोग की संस्थागत स्वतंत्रता से जुड़े सवालों को उठाना है।
CWC बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ?
कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक की अध्यक्षता कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने की। इसमें पार्टी की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी भी शामिल हुए।
पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा, जयराम रमेश और के.सी. वेणुगोपाल समेत कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी बैठक में हिस्सा लिया।
बैठक से एक दिन पहले खड़गे ने चुनाव आयोग के भीतर SIR, Form 6 में बदलाव, मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने तथा मतदाता डेटाबेस के केंद्रीकृत नियंत्रण से जुड़े मुद्दों पर चिंता जताई थी।
हटाए गए मतदाताओं को लेकर कांग्रेस का आरोप
कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग की ओर से हटाए गए या जोखिम वाले मतदाताओं के लिए प्रस्तावित बाद के उपाय इस बात का संकेत हैं कि SIR प्रक्रिया में गंभीर समस्या रही है। पार्टी ने इन उपायों को पर्याप्त नहीं बताते हुए कहा है कि इससे कथित बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित होने की स्थिति दूर नहीं होगी।
दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने हाल में मतदाता सूची से जुड़े कुछ मुद्दों की समीक्षा के लिए कदम उठाए हैं। रिपोर्टों के अनुसार, आयोग ने अपने मतदाता-रोल सॉफ्टवेयर की समीक्षा शुरू की है और कुछ मामलों में मतदाताओं तक सीधे पहुंचकर विसंगतियों की जांच करने की व्यवस्था पर भी काम किया है।
INDIA ब्लॉक बुधवार को बनाएगा रणनीति
SIR और चुनाव आयोग से जुड़े विवाद पर विपक्षी INDIA ब्लॉक के नेता बुधवार को बैठक करने वाले हैं। इस बैठक में आगे की संयुक्त रणनीति पर चर्चा होने की संभावना है।
कांग्रेस के अनुसार, गठबंधन संसद में इस मुद्दे को उठाने के साथ-साथ आगे की राजनीतिक और कानूनी कार्रवाई पर भी विचार कर सकता है। CEC को हटाने के लिए संसद में एक और नोटिस दिए जाने की संभावना भी जताई गई है।
इस बीच, SIR को लेकर राजनीतिक विवाद के साथ-साथ चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली, मतदाता सूची में बदलाव और मतदाताओं के नाम जोड़ने या हटाने की प्रक्रिया पर सार्वजनिक बहस तेज हो गई है। विवाद के केंद्र में कांग्रेस के आरोप और चुनाव आयोग का जवाब दोनों मौजूद हैं, जबकि SIR की कानूनी और प्रशासनिक स्थिति से जुड़े अंतिम निष्कर्ष संबंधित संवैधानिक और न्यायिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेंगे।










