महानदी जल विवाद: 1 अक्टूबर को अमित शाह की अध्यक्षता में ओडिशा-छत्तीसगढ़ की अहम बैठक

ओडिशा-छत्तीसगढ़ के बीच महानदी जल विवाद सुलझाने के लिए अमित शाह 1 अक्टूबर को बैठक करेंगे। दोनों राज्यों के CM, मुख्य सचिव और तकनीकी अधिकारी शामिल होंगे।

महानदी जल विवाद को सुलझाने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में ओडिशा और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करेंगे। बैठक में जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल समेत दोनों राज्यों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।

भुवनेश्वर: ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद को सुलझाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और पहल की है। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों की बैठक 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में बुलाई है। ओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

बैठक में ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के अलावा दोनों राज्यों के मुख्य सचिव और तकनीकी समितियों के सदस्य भी शामिल होंगे। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल के भी बैठक में मौजूद रहने की जानकारी दी गई है।

1 अक्टूबर को नई दिल्ली में होगी बैठक

ओडिशा के महाधिवक्ता पीतांबर आचार्य ने पत्रकारों से कहा कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव और तकनीकी समिति के सदस्य 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में शामिल होंगे।

आचार्य के मुताबिक, केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल भी इस महत्वपूर्ण बैठक में मौजूद रहेंगे। उन्होंने उम्मीद जताई कि यह बैठक दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद के समाधान की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता खोल सकती है।

महानदी के जल बंटवारे को लेकर ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच मतभेद एक दशक से अधिक समय से जारी हैं। विवाद का प्रमुख मुद्दा महानदी के ऊपरी हिस्से में छत्तीसगढ़ द्वारा बनाए गए बैराज और अन्य जल संरचनाओं को लेकर ओडिशा की आपत्तियां हैं।

जुलाई में भी हुई थी दोनों राज्यों के बीच बैठक

ओडिशा के महाधिवक्ता ने बताया कि दोनों राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने 30 जुलाई को केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की अध्यक्षता में हुई बैठक में हिस्सा लिया था। इस बैठक में दोनों राज्यों ने विवाद को आपसी सहमति और सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने पर सहमति जताई थी।

इसके बाद महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण ने भी आपसी समझौते के प्रस्ताव का समर्थन किया है। विवाद के समाधान के लिए केंद्रीय जल आयोग यानी CWC भी विभिन्न तौर-तरीकों पर काम कर रहा है।

इस घटनाक्रम से संकेत मिलता है कि विवाद को कानूनी और प्रशासनिक प्रक्रिया के साथ-साथ दोनों राज्यों के बीच बातचीत के माध्यम से सुलझाने की कोशिश की जा रही है।

छत्तीसगढ़ के CM की ओडिशा यात्रा के बाद बढ़ी उम्मीद

अमित शाह की प्रस्तावित बैठक से कुछ दिन पहले छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ओडिशा का दो दिवसीय दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी से मुलाकात की थी।

साय ने उस समय विश्वास जताया था कि दोनों राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे महानदी जल विवाद का जल्द समाधान निकाला जा सकता है। उनकी यात्रा के बाद मुख्यमंत्री माझी ने भी उम्मीद जताई थी कि दिवाली से पहले विवाद को समाप्त करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है।

अब 1 अक्टूबर को होने वाली बैठक को दोनों राज्यों के बीच बातचीत को आगे बढ़ाने के एक महत्वपूर्ण अवसर के तौर पर देखा जा रहा है।

महानदी जल बंटवारे को लेकर क्या है विवाद?

महानदी जल विवाद को लेकर ओडिशा की मुख्य आपत्ति छत्तीसगढ़ में नदी के ऊपरी हिस्से में बनाए गए बैराजों से जुड़ी है। ओडिशा का कहना है कि इन संरचनाओं के कारण नदी के निचले हिस्से में पानी का प्रवाह प्रभावित होता है।

विशेष रूप से गर्मियों और अन्य कम प्रवाह वाले समय में डाउनस्ट्रीम यानी ओडिशा की ओर पानी की उपलब्धता को लेकर राज्य सरकार ने चिंता जताई है।

ओडिशा सरकार ने 2016 में तत्कालीन जल संसाधन, नदी विकास और गंगा संरक्षण मंत्रालय, जिसे अब जल शक्ति मंत्रालय कहा जाता है, के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में छत्तीसगढ़ में महानदी के ऊपरी हिस्से में औद्योगिक उद्देश्यों के लिए छह बैराज बनाए जाने पर आपत्ति जताई गई थी।

ओडिशा सरकार के अनुसार, इन संरचनाओं के कारण खासकर कम प्रवाह वाले समय में निचले हिस्से में पानी की उपलब्धता प्रभावित होती है।

महानदी क्यों महत्वपूर्ण है?

महानदी छत्तीसगढ़ और ओडिशा दोनों के लिए महत्वपूर्ण नदी प्रणाली है। उपलब्ध सरकारी जानकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पांच प्रमुख नदी बेसिन—महानदी, गोदावरी, गंगा, ब्राह्मणी और नर्मदा—का क्षेत्र मौजूद है।

इनमें महानदी बेसिन की भूमिका विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। सरकारी अधिकारी के अनुसार, छत्तीसगढ़ की 78 प्रतिशत आबादी महानदी बेसिन में रहती है। इसी कारण महानदी को राज्य के लिए जीवनरेखा के तौर पर देखा जाता है।

महानदी का पानी कृषि, उद्योग और अन्य आवश्यकताओं के लिए महत्वपूर्ण है। यही वजह है कि नदी के जल के इस्तेमाल और उसके प्रवाह को लेकर दोनों राज्यों के हित कई स्तरों पर जुड़े हुए हैं।

समाधान के लिए बातचीत पर जोर

विवाद के समाधान को लेकर अब दोनों राज्य आपसी बातचीत और सहमति की दिशा में आगे बढ़ने की कोशिश कर रहे हैं। 30 जुलाई की बैठक में सौहार्दपूर्ण समाधान की सहमति के बाद केंद्रीय जल आयोग विवाद के समाधान के तौर-तरीकों पर काम कर रहा है।

महानदी जल विवाद न्यायाधिकरण की ओर से भी आपसी समझौते के प्रस्ताव का समर्थन किए जाने की जानकारी सामने आई है। ऐसे में 1 अक्टूबर की बैठक में दोनों राज्यों के राजनीतिक नेतृत्व के साथ मुख्य सचिवों और तकनीकी विशेषज्ञों की भागीदारी महत्वपूर्ण होगी।

बैठक में जल प्रवाह, जल संरचनाओं और दोनों राज्यों की आवश्यकताओं से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर चर्चा होने की संभावना है। हालांकि, बैठक के परिणाम और किसी अंतिम समझौते के स्वरूप को लेकर अभी कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है।

लंबे विवाद के समाधान की कोशिश

महानदी जल विवाद एक दशक से अधिक समय से ओडिशा और छत्तीसगढ़ के बीच प्रमुख अंतरराज्यीय जल विवादों में शामिल रहा है। ओडिशा की ओर से छत्तीसगढ़ में बने अपस्ट्रीम बैराजों पर लगातार आपत्ति जताई जाती रही है, जबकि दोनों राज्यों के बीच समाधान के लिए बातचीत के प्रयास भी जारी रहे हैं।

अब 1 अक्टूबर को नई दिल्ली में होने वाली बैठक में दोनों राज्यों के मुख्यमंत्री, मुख्य सचिव, तकनीकी समिति के सदस्य और केंद्र के वरिष्ठ मंत्री एक साथ मौजूद रहेंगे।

केंद्र सरकार की इस पहल से विवाद के समाधान के लिए बातचीत की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का अवसर मिलेगा। हालांकि, किसी अंतिम सहमति तक पहुंचने के लिए दोनों राज्यों की जल जरूरतों, नदी प्रवाह और तकनीकी पहलुओं पर सहमति बनना महत्वपूर्ण होगा।

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