RAF Fairford के पास गिरफ्तार 5 संदिग्ध जमानत पर रिहा, ईरान-रूस समेत कई लिंक की जांच

ब्रिटेन के RAF Fairford एयरबेस के पास गिरफ्तार पांच ब्रिटिश नागरिक जमानत पर रिहा हुए। पुलिस ईरान, रूस और गैर-राज्य समूहों से संभावित लिंक की जांच कर रही है।

ब्रिटेन में अमेरिकी सैन्य अभियानों के लिए इस्तेमाल होने वाले RAF Fairford एयरबेस के पास विस्फोटक और आतंकवाद से जुड़े संदेह में गिरफ्तार किए गए पांच ब्रिटिश नागरिकों को सोमवार को सख्त शर्तों के साथ जमानत पर रिहा कर दिया गया। ब्रिटेन की काउंटर टेररिज्म पुलिस ने कहा है कि मामले में जांच जारी है और कई संभावित पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

पुलिस यह भी जांच कर रही है कि संदिग्ध गतिविधि का संबंध ईरान, रूस या किसी गैर-राज्य उग्रवादी संगठन से हो सकता है या नहीं। जांचकर्ताओं ने अभी यह निष्कर्ष नहीं निकाला है कि घटना के पीछे किसी विदेशी सरकार का हाथ था।

तीन वैन मिलने के बाद शुरू हुई कार्रवाई

पांचों संदिग्धों को रविवार तड़के उस समय हिरासत में लिया गया, जब RAF Fairford के आसपास ग्रामीण इलाके में तीन वैन देखी गईं। यह एयरबेस ब्रिटेन के स्वामित्व में है और दशकों से अमेरिकी बमवर्षक विमानों के इस्तेमाल में रहा है।

मध्य पूर्व में हुए विभिन्न सैन्य संघर्षों के दौरान RAF Fairford की भूमिका रही है। हालिया ईरान संघर्ष के दौरान भी अमेरिकी B-1 और B-52 बमवर्षक विमानों ने इस एयरबेस से उड़ान भरी थी।

पुलिस के अनुसार, संदिग्धों को पहले विस्फोटक से जुड़े संभावित अपराधों के संदेह में हिरासत में लिया गया। बाद में उन्हें आतंकवादी कृत्य की तैयारी के संदेह में भी गिरफ्तार किया गया।

पांचों संदिग्ध ब्रिटिश नागरिक

जांच अधिकारियों के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए पांचों लोग ब्रिटिश नागरिक हैं और लंदन से ताल्लुक रखते हैं। सभी की उम्र 20 साल के आसपास बताई गई है।

अधिकारियों ने उनकी पहचान सार्वजनिक नहीं की है। ब्रिटेन की राष्ट्रीय समाचार एजेंसी PA ने बिना स्रोत बताए रिपोर्ट किया कि पुलिस को अब तक कोई ऐसा विस्फोटक नहीं मिला है जिसे इस्तेमाल योग्य माना जा सके।

इसके बावजूद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच जारी रखी है।

सख्त शर्तों पर मिली जमानत

यूके काउंटर टेररिज्म पुलिसिंग के प्रमुख लॉरेंस टेलर ने कहा कि पांचों संदिग्धों को कड़ी शर्तों के तहत जमानत दी गई है और वे जांच के दायरे से बाहर नहीं हुए हैं।

टेलर के अनुसार, जांच में कई संभावित दिशाओं पर काम किया जा रहा है। इनमें यह संभावना भी शामिल है कि संदिग्ध अपराध किसी विदेशी देश की ओर से काम करने वाले प्रॉक्सी या ऐसे व्यक्तियों द्वारा किए जाने की कोशिश हो सकती है, जो जानबूझकर या अनजाने में किसी विदेशी शक्ति के लिए काम कर रहे हों।

हालांकि, पुलिस ने अभी किसी देश को इस घटना के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

ईरान ने किसी भी संलिप्तता से किया इनकार

मामले में ईरान का नाम सामने आने के बाद लंदन स्थित ईरानी दूतावास ने किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है।

ईरानी दूतावास ने घटना को लेकर ईरान के खिलाफ की जा रही अटकलों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताया तथा उन्हें खारिज किया।

इस बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सोमवार देर रात फॉक्स न्यूज के होस्ट सीन हैनिटी के साथ बातचीत में कहा कि घटना में किसी विदेशी पक्ष का हाथ स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष देश का नाम नहीं लिया।

रुबियो ने ब्रिटिश अधिकारियों के सहयोग की सराहना की और घटना को बेहद गंभीर बताया।

85 घरों के लोगों को कराया गया था सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित

संदिग्ध वैन मिलने के बाद सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए एयरबेस के पास स्थित व्हेलफोर्ड गांव के 85 घरों के निवासियों को रविवार को वहां से हटाया गया था।

ब्रिटिश सेना की बम निरोधक टीम ने रोबोट की मदद से तीन सफेद वैन की जांच की। सोमवार दोपहर के बाद ग्रामीणों को अपने घर लौटने की अनुमति दे दी गई।

हालांकि, पुलिस ने तीनों वाहनों के आसपास सुरक्षा घेरा बनाए रखा। इस दौरान इलाके में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई थी।

किसान की सूचना के बाद पुलिस को मिली जानकारी

स्थानीय घटनाक्रम के अनुसार, एक महिला किसान ने शनिवार देर रात पुलिस को फोन किया था। उसने बताया कि घर लौटते समय उसने तीन वैन को असामान्य तरीके से खड़ा देखा।

महिला ने यह भी कहा कि पास में उसे बड़ी संख्या में लोग दिखाई दिए, जिनमें कुछ के चेहरे ढके हुए थे। उसके मुताबिक, जब उन लोगों ने उसका वाहन देखा तो वे अलग-अलग दिशाओं में चले गए।

सुरक्षा कारणों से महिला की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने कहा कि पुलिस को सूचना देकर महिला ने सही काम किया, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि उसके पास पूरे घटनाक्रम की केवल आंशिक जानकारी थी।

ब्रिटिश सरकार की आपात बैठक

घटना की गंभीरता को देखते हुए सोमवार को ब्रिटिश सरकार की COBRA आपात समिति की बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री एंडी बर्नहैम ने की।

बर्नहैम के अनुसार, बैठक का उद्देश्य घटना की पूरी तस्वीर हासिल करना और उपलब्ध सुरक्षा जानकारी की समीक्षा करना था।

यह अभी स्पष्ट नहीं है कि गिरफ्तार किए गए पांच लोग पहले से ब्रिटिश सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में थे या नहीं।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि संदिग्धों की गिरफ्तारी अमेरिका और ब्रिटेन के बीच सहयोग के बाद हुई और वे कुछ समय से सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में थे। हालांकि, पुलिस ने कहा कि तत्काल कार्रवाई शनिवार देर रात एयरबेस के पास संदिग्ध वाहनों की सूचना मिलने के बाद शुरू हुई थी।

RAF Fairford क्यों है महत्वपूर्ण?

RAF Fairford लंदन से करीब 160 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है। यह ब्रिटिश स्वामित्व वाला एयरबेस है, जिसका इस्तेमाल अमेरिकी वायुसेना भी करती है।

मध्य पूर्व में हालिया सैन्य गतिविधियों के दौरान यहां से अमेरिकी B-1 और B-52 बमवर्षक विमानों ने उड़ान भरी थी। इसी वजह से ईरान के साथ संघर्ष के संदर्भ में इस एयरबेस का रणनीतिक महत्व है।

ईरान ने कहा है कि उसके क्षेत्र पर हमला करने के लिए इस्तेमाल होने वाला कोई भी सैन्य अड्डा उसके लिए वैध लक्ष्य माना जा सकता है।

रूस और ईरान से जुड़े संभावित सुरक्षा खतरे

ब्रिटिश सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, रूस और ईरान से जुड़े प्रॉक्सी नेटवर्कों ने ब्रिटेन की धरती पर अपराध कराने की कोशिशें की हैं। अधिकारियों ने ईरान से जुड़े कथित प्रॉक्सी नेटवर्कों पर आगजनी और अन्य हमलों में शामिल होने के आरोप लगाए हैं।

इनमें से कई घटनाओं में यहूदी समुदाय को निशाना बनाए जाने और भय पैदा करने के उद्देश्य का आरोप लगाया गया है। ब्रिटिश अधिकारियों ने यह चेतावनी भी दी है कि मध्य पूर्व में संघर्ष जारी रहने की स्थिति में ईरान से जुड़े नेटवर्क ब्रिटेन में अपने संभावित लक्ष्यों का दायरा बढ़ा सकते हैं।

इसके अलावा रूस से जुड़े समूहों की ओर से ब्रिटेन में आगजनी की कथित साजिश के आरोप में भी कई लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं।

हालांकि, RAF Fairford मामले में अभी तक किसी विदेशी सरकार या संगठन की संलिप्तता प्रमाणित नहीं हुई है।

ईरान संघर्ष के बीच बढ़ी संवेदनशीलता

यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब ब्रिटेन और अमेरिका के बीच ईरान को लेकर सुरक्षा सहयोग बढ़ा है।

ब्रिटेन ने शुरुआत में अमेरिका और इजराइल के साथ ईरान के खिलाफ युद्ध में सीधे शामिल होने से दूरी रखी थी और अमेरिकी ठिकानों के इस्तेमाल के अनुरोध को लेकर भी सावधानी बरती थी। बाद में मार्च में तत्कालीन प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने अमेरिका को ब्रिटेन में स्थित ठिकानों का कथित “रक्षात्मक” अभियानों के लिए इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी।

इन अभियानों का उद्देश्य ईरानी मिसाइलों और उनके लॉन्च साइटों को निशाना बनाना बताया गया था। यह फैसला ईरानी हमलों के बाद लिया गया था, जिनमें ब्रिटेन के हितों और खाड़ी क्षेत्र में उसके सहयोगियों को निशाना बनाए जाने की बात कही गई थी।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री ने बताया सुरक्षा खतरे की याद

ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने सोमवार को घटना को देश के सामने मौजूद सुरक्षा खतरों की याद दिलाने वाला बताया।

मिलिबैंड ने पिछले सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र के दौरान ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से मुलाकात की थी। ब्रिटिश सरकार के अनुसार, उस बातचीत में उन्होंने कहा था कि ब्रिटेन अपनी धरती पर डराने-धमकाने, धमकी या शत्रुतापूर्ण गतिविधियों को स्वीकार नहीं करेगा।

वहीं, अमेरिकी वायुसेना ने कहा कि एयरबेस पर उसके कर्मचारी सतर्क हैं। हालांकि, संचालन संबंधी सुरक्षा कारणों से उसने सुरक्षा व्यवस्था के विशिष्ट उपायों की जानकारी देने से इनकार किया।

अमेरिका ने अपने नागरिकों को किया सतर्क

लंदन स्थित अमेरिकी दूतावास ने ब्रिटेन में रह रहे अमेरिकी नागरिकों को सतर्क रहने और अपनी व्यक्तिगत सुरक्षा का ध्यान रखने की सलाह दी है।

मार्को रुबियो ने ब्रिटिश अधिकारियों को कथित साजिश को रोकने में सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि ब्रिटेन ने अमेरिका के साथ सहयोग किया और उसकी प्रतिक्रिया उचित थी।

रुबियो ने संदिग्धों को जमानत दिए जाने के मामले पर विस्तार से टिप्पणी नहीं की।

जांच जारी, किसी निष्कर्ष पर पहुंचना अभी बाकी

फिलहाल पांचों संदिग्ध जमानत पर हैं, लेकिन पुलिस की जांच जारी है। जांचकर्ताओं का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि RAF Fairford के पास संदिग्ध गतिविधि का उद्देश्य क्या था और क्या इसका संबंध किसी विदेशी राज्य, प्रॉक्सी नेटवर्क या गैर-राज्य उग्रवादी समूह से था।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि संदिग्धों पर लंबे समय से नजर रखी जा रही थी और उनका उद्देश्य एयरबेस को भारी नुकसान पहुंचाना था। हालांकि, इन दावों और पुलिस द्वारा बताए गए घटनाक्रम के बीच अंतर को देखते हुए मामले की जांच पूरी होने तक किसी विशेष विदेशी देश या संगठन को जिम्मेदार ठहराना जल्दबाजी होगी।

फिलहाल पुलिस ने पांचों लोगों को जमानत पर छोड़ा है और मामले में कई संभावित पहलुओं की जांच जारी है। किसी भी आरोप की अंतिम स्थिति आगे की जांच और कानूनी प्रक्रिया से स्पष्ट होगी।

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