पंजाब की LPU और चितकारा यूनिवर्सिटी में हालिया हिंसक घटनाओं के बीच नवंबर-दिसंबर में शुरू होने वाले प्लेसमेंट सीजन को लेकर चिंता बढ़ी है। शिक्षाविदों के अनुसार कैंपस की सुरक्षा, अनुशासन और माहौल कंपनियों के प्लेसमेंट निर्णय को प्रभावित कर सकते हैं।
पंजाब: LPU हिंसा, चितकारा यूनिवर्सिटी, कैंपस प्लेसमेंट: पंजाब की निजी यूनिवर्सिटियों में हालिया हिंसक घटनाओं ने विद्यार्थियों के करियर को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फगवाड़ा स्थित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) और मोहाली स्थित चितकारा यूनिवर्सिटी में विवादों के बीच नवंबर-दिसंबर में शुरू होने वाले प्लेसमेंट सीजन पर भी सवाल उठ रहे हैं। शिक्षाविदों के अनुसार कंपनियां विद्यार्थियों की योग्यता के साथ कैंपस के अनुशासन, सुरक्षा और शैक्षणिक माहौल को भी महत्व देती हैं।
प्लेसमेंट सीजन से पहले कैंपस माहौल पर सवाल
प्राइवेट यूनिवर्सिटियों में अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों के लिए नवंबर और दिसंबर का समय अहम माना जाता है। इसी अवधि में देश-विदेश की कई नामी कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट के लिए विश्वविद्यालयों का रुख करती हैं। इन कंपनियों में बहुराष्ट्रीय कंपनियां भी शामिल होती हैं, जो योग्य विद्यार्थियों को आकर्षक पैकेज ऑफर करती हैं।

उपलब्ध जानकारी के अनुसार प्राइवेट कंपनियां कैंपस प्लेसमेंट में युवाओं को दो करोड़ रुपये तक का सालाना सैलरी पैकेज ऑफर करती हैं। मैनेजमेंट से लेकर इंजीनियरिंग तक के विद्यार्थियों के लिए प्लेसमेंट प्रक्रिया करियर की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
हालिया हिंसक घटनाओं के बाद विश्वविद्यालयों की कैंपस इमेज और कॉर्पोरेट विश्वसनीयता को लेकर चिंता जताई जा रही है। कंपनियां प्लेसमेंट के दौरान केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक योग्यता पर निर्भर नहीं रहतीं, बल्कि कैंपस का अनुशासन, सुरक्षा, स्थिरता और पढ़ाई का वातावरण भी उनके निर्णय का हिस्सा हो सकता है।
प्रो. अरुण ग्रोवर बोले- खराब माहौल का प्लेसमेंट पर पड़ सकता है असर
चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. अरुण कुमार ग्रोवर के अनुसार किसी निजी विश्वविद्यालय में हिंसक घटनाएं या लंबे समय तक खराब माहौल रहने का असर अकादमिक गतिविधियों के साथ कैंपस प्लेसमेंट पर भी पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि निजी विश्वविद्यालयों में अकादमिक सत्र निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार चलता है। विद्यार्थियों की उपस्थिति, आंतरिक मूल्यांकन, परीक्षाएं और अन्य अकादमिक गतिविधियां पूरे वर्ष एक व्यवस्थित तरीके से संचालित होती हैं। यही शैक्षणिक माहौल कंपनियों को प्लेसमेंट के दौरान विद्यार्थियों के आकलन में मदद करता है।
प्रो. ग्रोवर के मुताबिक निजी विश्वविद्यालयों में अभिभावक बच्चों की पढ़ाई पर बड़ी राशि खर्च करते हैं और कंपनियां भी योग्य विद्यार्थियों को आकर्षक पैकेज देती हैं। ऐसे में यदि किसी विश्वविद्यालय का माहौल खराब होता है तो अच्छी कंपनियां कैंपस विजिट कम कर सकती हैं, जिसका असर प्लेसमेंट पर पड़ सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि खराब माहौल का प्रभाव केवल प्लेसमेंट तक सीमित नहीं रहता। पढ़ाई के लिए सुरक्षित और बेहतर वातावरण तलाशने वाले मेधावी विद्यार्थी भी ऐसे संस्थानों में दाखिला लेने से पीछे हट सकते हैं।
प्रो. आरके कोहली ने भी प्लेसमेंट पर जताई चिंता
मोहाली स्थित अमेठी यूनिवर्सिटी के पूर्व कुलपति प्रो. आरके कोहली का कहना है कि विश्वविद्यालयों में हिंसक घटनाओं और बिगड़े माहौल का सीधा असर विद्यार्थियों की प्लेसमेंट प्रक्रिया पर पड़ सकता है।
उनके अनुसार विद्यार्थी निजी विश्वविद्यालयों में बेहतर शिक्षा के साथ नामी कंपनियों में नौकरी और अच्छे पैकेज की उम्मीद लेकर दाखिला लेते हैं। वहीं कंपनियां भी प्लेसमेंट के लिए विश्वविद्यालय के शैक्षणिक स्तर के साथ वहां के माहौल को ध्यान में रखती हैं।
प्रो. कोहली ने कहा कि यदि किसी विश्वविद्यालय में हिंसा जैसी स्थिति बनी रहती है तो कंपनियां वहां कैंपस प्लेसमेंट के लिए आने से पहले कई पहलुओं पर विचार कर सकती हैं। इसका असर विद्यार्थियों के करियर पर पड़ सकता है।
उन्होंने कहा कि अभिभावक भी दाखिले के समय विश्वविद्यालय की प्लेसमेंट दर, कंपनियों की भागीदारी और कैंपस के माहौल को महत्व देते हैं। ऐसे में अच्छे अकादमिक माहौल के साथ परिसर में शांति और सुरक्षा भी विद्यार्थियों के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है।












