यूपी में पप्पू यादव के साधु वेश पर बवाल, पुतला फूंका भड़के संतों ने तस्वीर पर चप्पलें बरसाईं बोले भगवा का अपमान बर्दाश्त नहीं

पप्पू यादव के साधु वेश में प्रदर्शन को लेकर यूपी में संतों ने विरोध जताया। तस्वीर पर चप्पलें बरसाईं और पुतला फूंककर भगवा वेश के अपमान का आरोप लगाया।
यूपी में पप्पू यादव के साधु वेश पर बवाल, पुतला फूंका भड़के संतों ने तस्वीर पर चप्पलें बरसाईं बोले भगवा का अपमान बर्दाश्त नहीं
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उत्तर प्रदेश में बिहार के सांसद पप्पू यादव के साधु वेश में किए गए प्रदर्शन को लेकर विवाद बढ़ गया है। पप्पू यादव के इस अंदाज का संतों और धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों ने विरोध किया। नाराज संतों ने उनकी तस्वीर पर चप्पलें बरसाईं और बाद में पुतला फूंककर अपना विरोध दर्ज कराया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि भगवा वस्त्र धार्मिक आस्था और संत परंपरा से जुड़े हैं और इसका राजनीतिक प्रदर्शन में इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता।

बताया जा रहा है कि पप्पू यादव ने संसद परिसर में चढ़ावे से जुड़े मुद्दे को लेकर प्रदर्शन के दौरान साधु का वेश धारण किया था। उनके इस रूप की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश के कुछ संतों में नाराजगी देखने को मिली।

विरोध कर रहे संतों का कहना था कि भगवा वस्त्र केवल राजनीतिक प्रदर्शन का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि सनातन परंपरा में उनका विशेष धार्मिक महत्व है। उनका आरोप था कि पप्पू यादव ने साधु का वेश धारण कर इस परंपरा का अपमान किया है।

इसी को लेकर संतों और उनके समर्थकों ने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव की तस्वीर को सामने रखकर नारेबाजी की गई। इसके बाद कुछ प्रदर्शनकारियों ने तस्वीर पर चप्पलें बरसाईं और आक्रोश जताया।

विरोध प्रदर्शन के दौरान पप्पू यादव का पुतला भी फूंका गया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि धार्मिक प्रतीकों और संतों के वेश को राजनीतिक विरोध के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

संतों ने कहा कि भगवा वस्त्र त्याग, तपस्या और धार्मिक परंपरा का प्रतीक माना जाता है। उनके मुताबिक किसी राजनीतिक मुद्दे पर विरोध जताने के लिए साधु का रूप धारण करना धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाला कदम है।

विरोध करने वालों ने पप्पू यादव से इस मामले में स्पष्टीकरण देने की मांग भी की। उनका कहना था कि राजनीतिक विरोध के लिए दूसरे तरीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन संतों के वेश को प्रदर्शन का माध्यम बनाना उचित नहीं है।

इस विवाद की शुरुआत संसद परिसर में हुए विपक्ष के प्रदर्शन से हुई थी। प्रदर्शन के दौरान दान पेटी रखकर राम मंदिर के चढ़ावे से जुड़े मुद्दे पर विरोध दर्ज कराया गया था। पप्पू यादव इस प्रदर्शन में साधु के वेश में नजर आए थे।

प्रदर्शन की तस्वीरें सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद इस पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ लोगों ने इसे राजनीतिक व्यंग्य और विरोध का तरीका बताया, जबकि धार्मिक संगठनों से जुड़े लोगों ने इसे भगवा वेश का अपमान करार दिया।

उत्तर प्रदेश में संतों की ओर से किए गए विरोध के बाद यह मामला राजनीतिक बहस का हिस्सा भी बन गया है। पप्पू यादव के समर्थक उनके प्रदर्शन को राजनीतिक मुद्दे पर प्रतीकात्मक विरोध बता सकते हैं, जबकि विरोध करने वाले संत इसे धार्मिक भावनाओं से जोड़कर देख रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि धार्मिक वेशभूषा को लेकर समाज में संवेदनशीलता बरती जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह से भगवा वस्त्र का राजनीतिक प्रदर्शन में इस्तेमाल किया गया तो संत समाज इसका विरोध करेगा।

पुतला फूंकने के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने नारेबाजी भी की। पुलिस की मौजूदगी में प्रदर्शन किया गया और स्थिति को नियंत्रित रखा गया, ताकि किसी तरह का विवाद आगे न बढ़े।

फिलहाल इस पूरे मामले में राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। विवाद का केंद्र पप्पू यादव का साधु वेश धारण कर प्रदर्शन करना है, जिसे संतों के एक वर्ग ने धार्मिक परंपरा का अपमान बताया है।

पप्पू यादव की ओर से इस विरोध पर क्या प्रतिक्रिया दी जाती है, यह देखना भी महत्वपूर्ण होगा। वहीं संतों के विरोध के बाद यह मुद्दा आने वाले दिनों में और राजनीतिक तूल पकड़ सकता है।

कुल मिलाकर, संसद में किए गए एक प्रतीकात्मक प्रदर्शन का असर अब उत्तर प्रदेश तक पहुंच गया है। संतों ने भगवा वेश के इस्तेमाल पर आपत्ति जताते हुए पप्पू यादव की तस्वीर पर विरोध प्रदर्शन किया और उनका पुतला फूंका। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि भगवा का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

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