उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने कई शहरों में इलेक्ट्रिक बसों का संचालन तेज कर दिया है। फिलहाल 140 ई-बसें चल रही हैं और 2030 तक कुल बेड़े के 50 प्रतिशत हिस्से को इलेक्ट्रिक बसों में बदलने की तैयारी की जा रही है।
लखनऊ: उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम ने डीजल बसों की जगह इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज और मथुरा समेत कई शहरों में ई-बसों का संचालन शुरू हो चुका है। परिवहन निगम का लक्ष्य वर्ष 2030 तक अपने कुल बस बेड़े के आधे हिस्से को इलेक्ट्रिक वाहनों में परिवर्तित करना है।
कई प्रमुख शहरों में शुरू हुआ ई-बस संचालन
उत्तर प्रदेश परिवहन निगम ने प्रदेश के कई प्रमुख धार्मिक और शहरी रूटों पर इलेक्ट्रिक बसों का संचालन शुरू कर दिया है। फिलहाल अयोध्या, वाराणसी, प्रयागराज, मथुरा, आगरा, गोरखपुर और लखनऊ के आसपास के मार्गों पर 140 इलेक्ट्रिक एसी बसें चलाई जा रही हैं।

करीब डेढ़ साल पहले निगम ने 400 करोड़ रुपये की लागत से 220 इलेक्ट्रिक बसें खरीदी थीं। इनमें से शेष बसों को भी जल्द विभिन्न रूटों पर उतारने की तैयारी चल रही है।
2030 तक आधे बेड़े को इलेक्ट्रिक करने की योजना
परिवहन निगम के अनुसार वर्ष 2030 तक कुल बस बेड़े के 50 प्रतिशत हिस्से को इलेक्ट्रिक बसों में बदला जाएगा। वर्तमान में निगम के पास लगभग 14,300 बसें हैं, जिनमें आने वाले चार वर्षों में करीब 7,000 से अधिक ई-बसें शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।
निगम ने निजी कंपनियों के साथ रेवेन्यू शेयरिंग मॉडल पर भी समझौते किए हैं। इसी योजना के तहत विभिन्न श्रेणियों की 50 इलेक्ट्रिक बसों के संचालन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
चार्जिंग डिपो और नई खरीद की तैयारी
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2026-27 के लिए परिवहन निगम को इलेक्ट्रिक बसों की खरीद के लिए 400 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए हैं। इस बजट से 40 सीट क्षमता वाली 250 नई इलेक्ट्रिक बसें खरीदने का प्रस्ताव तैयार किया गया है।
वहीं, इलेक्ट्रिक बसों के संचालन को सुचारु बनाने के लिए लखनऊ समेत नौ स्थानों पर चार्जिंग और मेंटीनेंस डिपो तैयार किए गए हैं। हालांकि, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी तैयारियों में देरी के कारण कुछ रूटों पर बस संचालन शुरू होने में समय लगा।












