अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले में जिला अस्पताल यिंगकियॉन्ग और सिमोंग व रामसिंग AAM उप-केंद्रों को NQAS प्रमाणन मिला। यिंगकियॉन्ग राज्य का पहला NQAS प्रमाणित जिला अस्पताल बना, जिससे सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
ईटानगर: अरुणाचल प्रदेश के अपर सियांग जिले ने सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जिला अस्पताल यिंगकियॉन्ग और आयुष्मान आरोग्य मंदिर (AAM) के सिमोंग तथा रामसिंग उप-केंद्रों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) का प्रमाणन मिला है। जिला अस्पताल यिंगकियॉन्ग का यह प्रमाणन राज्य के लिए विशेष उपलब्धि है, क्योंकि यह NQAS मान्यता हासिल करने वाला अरुणाचल प्रदेश का पहला जिला अस्पताल बना है।
यह उपलब्धि सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में उपचार की गुणवत्ता, मरीजों के अधिकार, संक्रमण नियंत्रण, स्वच्छता, दवाओं और चिकित्सा उपकरणों की उपलब्धता तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के अनुसार, इस सफलता के पीछे चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ और अन्य कर्मचारियों की कई महीनों की मेहनत और समन्वित प्रयास रहे हैं।
जिला अस्पताल यिंगकियॉन्ग को पहली बार NQAS प्रमाणन
अपर सियांग के जिला अस्पताल यिंगकियॉन्ग का NQAS प्रमाणन अरुणाचल प्रदेश के सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्र में एक ऐतिहासिक कदम है। अब तक राज्य का कोई जिला अस्पताल इस राष्ट्रीय गुणवत्ता मानक के तहत प्रमाणित नहीं हुआ था।
NQAS प्रमाणन स्वास्थ्य सुविधाओं में निर्धारित गुणवत्ता मानकों के पालन का महत्वपूर्ण संकेतक माना जाता है। इसके तहत अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाओं का विभिन्न मानकों पर मूल्यांकन किया जाता है। इनमें मरीजों के अधिकारों की सुरक्षा, चिकित्सकीय सेवाओं की गुणवत्ता, संक्रमण रोकथाम, स्वच्छता, दवाओं और उपकरणों की उपलब्धता तथा रिकॉर्ड प्रबंधन जैसे पहलू शामिल होते हैं।
इसके अलावा स्वास्थ्य संस्थानों में लगातार सुधार की व्यवस्था और सेवाओं की निगरानी को भी मूल्यांकन का हिस्सा बनाया जाता है।
सिमोंग और रामसिंग के AAM उप-केंद्र भी प्रमाणित
जिला अस्पताल के साथ आयुष्मान आरोग्य मंदिर के दो उप-केंद्रों ने भी NQAS प्रमाणन हासिल किया है। इनमें सिमोंग और रामसिंग के AAM सब-सेंटर शामिल हैं।
ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने में ऐसे केंद्रों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इन केंद्रों को राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप प्रमाणन मिलने से स्थानीय स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता को और मजबूत करने की उम्मीद है।
यह उपलब्धि विशेष रूप से ऐसे भौगोलिक क्षेत्र में महत्वपूर्ण है, जहां दुर्गम इलाकों और दूर-दराज की आबादी तक स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाना प्रशासन के लिए चुनौतीपूर्ण रहता है।
NQAS के तहत किन मानकों की हुई जांच?
राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की पहल है। इसका उद्देश्य सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में सेवा गुणवत्ता को एक निर्धारित राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाना और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
NQAS मूल्यांकन में स्वास्थ्य संस्थान के कई पहलुओं की समीक्षा की जाती है। मरीजों के अधिकार और सम्मान से लेकर क्लीनिकल सेवाओं की गुणवत्ता तक विभिन्न मानकों पर संस्थान को परखा जाता है। संक्रमण नियंत्रण, साफ-सफाई, दवाओं की उपलब्धता, आवश्यक चिकित्सा उपकरण, दस्तावेजीकरण और सेवाओं में निरंतर सुधार जैसे क्षेत्र भी इसमें शामिल होते हैं।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल प्रमाणपत्र हासिल करना नहीं बल्कि स्वास्थ्य संस्थानों में ऐसी कार्यप्रणाली विकसित करना है, जिससे मरीजों को लगातार बेहतर और सुरक्षित सेवाएं मिल सकें।
कई महीनों की तैयारी के बाद मिली सफलता
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों के मुताबिक NQAS और LaQshya कार्यक्रमों के तहत कई महीनों तक लगातार काम किया गया। अस्पताल और उप-केंद्रों के चिकित्सकों, नर्सों तथा सपोर्ट स्टाफ ने गुणवत्ता मानकों को पूरा करने के लिए विभिन्न स्तरों पर सुधार किए।
कार्यप्रणाली में सुधार के साथ दस्तावेजीकरण, स्वच्छता, संक्रमण नियंत्रण और स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता पर विशेष ध्यान दिया गया। टीम के सामूहिक प्रयासों के परिणामस्वरूप इन संस्थानों को राष्ट्रीय स्तर के गुणवत्ता मानकों के अनुरूप प्रमाणन हासिल करने में सफलता मिली।
स्वतंत्रता दिवस समारोह में स्वास्थ्य टीमों का सम्मान
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमों को 15 अगस्त 2026 को यिंगकियॉन्ग के जनरल ग्राउंड में आयोजित 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान सम्मानित किया गया।
समारोह में जिला अस्पताल यिंगकियॉन्ग के मेडिकल सुपरिंटेंडेंट डॉ. कारो तेंग और उनकी टीम को सम्मानित किया गया। इसके अलावा रामसिंग AAM सब-सेंटर की हेल्थ एंड वेलनेस ऑफिसर तितोक पाटुक और उनकी टीम तथा सिमोंग AAM सब-सेंटर की HWO रेबेका पान्यांग और उनकी टीम को भी उपलब्धि के लिए सम्मान मिला।

जिला स्तर पर सहयोग देने वाली टीम के सदस्यों को भी सम्मानित किया गया। इनमें D.R.C.H.O. डॉ. एंडेंग साइटेक, WHO PRT अरिंदम सरकाराधिकारिकारी, DCM गेबी मितकोंग, DPM रोलेंग बुरांग और सहयोगी ड्राइवर शामिल रहे।
स्वास्थ्य टीम की मेहनत को मिली पहचान
अपर सियांग के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस उपलब्धि को टीमवर्क, निरंतर प्रयास और समर्पण का परिणाम बताया। जिला चिकित्सा अधिकारी डॉ. गेफेंग लिटिन ने कहा कि जिला अस्पताल यिंगकियॉन्ग का राज्य का पहला NQAS प्रमाणित जिला अस्पताल बनना पूरे जिले के लिए गर्व का विषय है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि स्वतंत्रता दिवस पर मिली यह राष्ट्रीय स्तर की पहचान स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को आगे भी बेहतर मानकों के साथ काम करने के लिए प्रेरित करेगी। साथ ही जिले की अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं को भी इसी स्तर तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास जारी रहेंगे।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन ने दी बधाई
अपर सियांग के स्थानीय विधायक और मुख्यमंत्री के सलाहकार आलो लिबांग ने स्वास्थ्य टीमों को इस उपलब्धि के लिए बधाई दी। उन्होंने स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता सुधारने के लिए कर्मचारियों की प्रतिबद्धता की सराहना की।
उपायुक्त तालो जेरंग ने NQAS प्रमाणन को अपर सियांग के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने स्वास्थ्य कर्मियों से आग्रह किया कि वे प्रमाणन हासिल करने के बाद भी गुणवत्ता मानकों को बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करते रहें।
प्रशासन का मानना है कि प्रमाणन से स्वास्थ्य संस्थानों में सेवा वितरण की गुणवत्ता को बनाए रखने और सुधारने की प्रक्रिया को गति मिलेगी।
ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मिल सकता है लाभ
सिमोंग और रामसिंग जैसे AAM उप-केंद्रों को NQAS प्रमाणन मिलने का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि ये संस्थान स्थानीय और ग्रामीण आबादी के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।
गुणवत्ता मानकों के अनुरूप सेवाएं मिलने से मरीजों का सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों पर भरोसा बढ़ सकता है। साथ ही बेहतर रिकॉर्ड प्रबंधन, दवाओं की उपलब्धता, स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण जैसे उपायों से मरीजों के अनुभव में भी सुधार आने की उम्मीद है।
आगे अन्य स्वास्थ्य संस्थानों को बेहतर बनाने की चुनौती
अपर सियांग की यह उपलब्धि जिले के स्वास्थ्य विभाग के लिए एक नई दिशा तय करती है। जिला अस्पताल के बाद अब अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को भी राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप विकसित करने की चुनौती होगी।
अधिकारियों के अनुसार, NQAS प्रमाणन को अंतिम लक्ष्य के बजाय स्वास्थ्य सेवाओं में निरंतर सुधार की प्रक्रिया के रूप में देखा जाना चाहिए। प्रमाणन के मानकों को नियमित रूप से बनाए रखना और मरीजों को बेहतर सेवाएं देना आने वाले समय में प्राथमिकता होगी।
अपर सियांग की इस उपलब्धि से अरुणाचल प्रदेश के अन्य सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों को भी राष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। राज्य के दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और गुणवत्ता दोनों को मजबूत करने के लिहाज से यह उपलब्धि महत्वपूर्ण मानी जा रही है।











