UPPSC Success Story: पिता की पेंशन के लिए 8 साल संघर्ष, 3 बार फेल होकर आयुष पांडे बने SDM

UPPSC Success Story: आयुष पांडे ने पिता की पेंशन के लिए 8 साल संघर्ष किया और 3 बार असफल हुए। 2026 में UPPSC में 10वीं रैंक हासिल कर SDM बने।

आयुष पांडे ने 12 साल की उम्र में पिता को खोया और पेंशन के लिए परिवार को 8 साल संघर्ष करना पड़ा। UPSC-UPPSC की तैयारी के दौरान 3 बार असफल हुए, लेकिन 2026 में UPPSC में 10वीं रैंक हासिल कर SDM बने।

UPPSC Success Story: आयुष पांडे की सफलता का सफर आर्थिक परेशानियों, असफलताओं और लोगों के तानों के बीच आगे बढ़ा। पिता की पेंशन के लिए 8 साल तक दफ्तरों के चक्कर लगाने के बाद भी उन्होंने सरकारी सेवा का सपना नहीं छोड़ा। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद UPSC और UPPSC की तैयारी की और लगातार तीन असफलताओं के बाद 2026 में 10वीं रैंक हासिल कर डिप्टी कलेक्टर यानी SDM बने।

12 साल की उम्र में पिता को खोया, पेंशन के लिए 8 साल संघर्ष

आयुष पांडे की जिंदगी में संघर्ष काफी कम उम्र से शुरू हो गया था। उन्होंने जोशटॉक के एक वीडियो में अपनी जर्नी साझा करते हुए बताया कि जब वह 12 साल के थे, तब उनके पिता का निधन हो गया था। उनके पिता PCS अधिकारी थे। पिता के जाने के बाद परिवार आर्थिक मुश्किलों में घिर गया। सबसे बड़ी परेशानियों में से एक पिता की पेंशन से जुड़ी प्रक्रिया थी, जिसमें करीब 8 साल लग गए। इस दौरान आयुष और उनकी मां को लगातार दफ्तरों के चक्कर लगाने पड़े।

कम उम्र में ही उन्होंने आर्थिक समस्याओं और सरकारी दफ्तरों की लंबी प्रक्रिया को करीब से देखा। यही अनुभव आगे चलकर उनके जीवन और करियर के फैसलों पर भी असर डालने लगा।

इंजीनियरिंग के बाद दिल्ली जाकर शुरू की UPSC-UPPSC की तैयारी

मुश्किल परिस्थितियों के बावजूद आयुष ने अपनी इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। पढ़ाई के बाद उन्हें प्लेसमेंट भी मिला, लेकिन उन्होंने नौकरी करने के बजाय अपने पिता की विरासत और उनके अधूरे सपने को आगे बढ़ाने का फैसला किया। इसके बाद वह दिल्ली चले गए और UPSC तथा UPPSC की तैयारी शुरू कर दी।

दिल्ली में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करना उनके लिए आसान नहीं था। पढ़ाई के साथ महंगे खर्च की चिंता भी बनी रहती थी। कई बार उन्हें घर से पैसे मांगने पड़ते थे, जिससे वह आत्म-संदेह से घिर जाते थे। इस दौरान उनके मन में छोटी प्राइवेट नौकरी करने और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी छोड़ने का विचार भी आया।

2021 से 2024 तक लगातार तीन बार मिली असफलता

आयुष के लिए 2021 से 2024 तक का समय बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। वह लगातार तीन बार प्रीलिम्स में सफल नहीं हो पाए। बार-बार मिली असफलताओं का असर उनके आत्मविश्वास पर पड़ा। इसके साथ ही उन्हें रिश्तेदारों और आसपास के लोगों के ताने भी सुनने पड़े।

कुछ लोगों ने उन्हें सलाह दी कि वह पढ़ाई छोड़कर दुकान खोल लें, क्योंकि उनके अनुसार उनसे यह परीक्षा नहीं हो पाएगी। लगातार असफलता और ऐसी बातों के बावजूद आयुष ने तैयारी पूरी तरह छोड़ने का फैसला नहीं किया। परिवार ने भी इस मुश्किल दौर में उनका साथ बनाए रखा।

भाई और दोस्त ने बढ़ाया हौसला, रणनीति में किया बदलाव

मुश्किल समय में आयुष के भाई और उनके दोस्त सचिन शर्मा ने उनका साथ दिया। उनके भाई ने उन्हें पिता के संघर्ष और उनके सपने की याद दिलाई। इसके बाद आयुष ने अपनी पिछली गलतियों को समझकर तैयारी की रणनीति में बदलाव किया।

उन्होंने प्रीलिम्स की तैयारी के लिए Previous Year Questions यानी PYQ पर विशेष पकड़ बनाने पर काम किया। वहीं मेन्स परीक्षा के लिए उन्होंने 45 से 50 Full-Length Mock Tests देकर अपनी तैयारी को मजबूत किया। इस बार उन्होंने सिर्फ ज्यादा पढ़ने के बजाय अपनी कमियों को पहचानकर उन्हें दूर करने पर ध्यान दिया।

2026 में UPPSC में 10वीं रैंक, बने SDM

आखिरकार उनकी मेहनत सफल हुई। मार्च 2026 में आयुष पांडे ने UPPSC परीक्षा में 10वीं रैंक हासिल की और डिप्टी कलेक्टर यानी SDM बने। उनकी सफलता इसलिए भी भावुक रही क्योंकि इसके ठीक एक दिन बाद उनकी मां का रिटायरमेंट था।

पिता को कम उम्र में खोने, उनकी पेंशन के लिए वर्षों तक संघर्ष करने, आर्थिक मुश्किलों का सामना करने और लगातार तीन बार असफल होने के बाद आयुष ने सरकारी सेवा में जगह बनाई। आज उनके गांव में लोग उन्हें ‘SDM साहब’ के नाम से जानते हैं। उनकी कहानी यह दिखाती है कि प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में असफलता के बाद रणनीति बदलना और लगातार प्रयास करते रहना किस तरह आगे की राह बना सकता है।

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