सड़क निर्माण गुणवत्ता में उत्तराखंड का डिजिटल मॉडल बना उदाहरण, हिमाचल बैठक में मिली सराहना

हिमाचल बैठक में उत्तराखंड ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता निगरानी के लिए अपना डिजिटल मॉडल प्रस्तुत किया। ऑनलाइन मॉनिटरिंग और पारदर्शिता को मिली सराहना।

उत्तराखंड ने हिमाचल प्रदेश में आयोजित बैठक में सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए अपने डिजिटल और पारदर्शी निगरानी मॉडल को प्रस्तुत किया। राज्य ने ऑनलाइन मॉनिटरिंग, जवाबदेही और तकनीक आधारित निरीक्षण व्यवस्था पर जोर दिया।

देहरादून: सड़क निर्माण कार्यों में गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा अपनाए गए डिजिटल निगरानी मॉडल को हिमाचल प्रदेश में आयोजित एक अंतरराज्यीय बैठक में प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर राजेश शर्मा ने ऑनलाइन मॉनिटरिंग, मानक संचालन प्रक्रिया और सख्त जवाबदेही व्यवस्था को बेहतर गुणवत्ता नियंत्रण का प्रभावी माध्यम बताया।

सड़क निर्माण में तकनीक आधारित निगरानी पर उत्तराखंड का जोर

हिमाचल प्रदेश में आयोजित बैठक में विभिन्न राज्यों ने सड़क निर्माण कार्यों की गुणवत्ता सुधारने के लिए अपनाई जा रही व्यवस्थाओं और नवाचारों को साझा किया। इस दौरान उत्तराखंड ने अपने डिजिटल और पारदर्शी निगरानी मॉडल की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की, जिसे सड़क परियोजनाओं की गुणवत्ता बनाए रखने में प्रभावी माना जा रहा है।

सड़क निर्माण गुणवत्ता में उत्तराखंड का डिजिटल मॉडल बना उदाहरण, हिमाचल बैठक में मिली सराहना

लोक निर्माण विभाग के चीफ इंजीनियर राजेश शर्मा ने बताया कि राज्य में निर्माण कार्यों की निगरानी के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP), ऑनलाइन रिपोर्टिंग सिस्टम और अनियमितताओं पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की व्यवस्था लागू की गई है। इससे निर्माण कार्यों में जवाबदेही और पारदर्शिता दोनों बढ़ी हैं।

गुणवत्ता में लापरवाही पर तय हो जवाबदेही

उत्तराखंड ने बैठक में यह स्पष्ट किया कि सड़क निर्माण परियोजनाओं में गुणवत्ता से समझौता करने वाले अधिकारियों और एजेंसियों की जवाबदेही तय होना बेहद जरूरी है। राज्य का मानना है कि केवल निर्माण कार्य पूरा करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि तय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

राज्य ने सुझाव दिया कि गुणवत्ता निगरानी केवल निर्माण अवधि तक सीमित न रहकर पूरे कार्य चक्र के दौरान जारी रहनी चाहिए। इसके लिए नियमित निरीक्षण, डिजिटल रिकॉर्डिंग और तकनीक आधारित ट्रैकिंग सिस्टम को मजबूत करना आवश्यक है।

ऑनलाइन मॉनिटरिंग और डेटा रिकॉर्डिंग पर बल

बैठक में उत्तराखंड ने ऑनलाइन रिपोर्टिंग सिस्टम को सड़क निर्माण कार्यों की निगरानी का प्रभावी माध्यम बताया। अधिकारियों के अनुसार डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए परियोजनाओं की प्रगति, गुणवत्ता परीक्षण और निरीक्षण रिपोर्ट को रियल टाइम में रिकॉर्ड किया जा सकता है, जिससे पारदर्शिता बढ़ती है और अनियमितताओं पर तुरंत कार्रवाई संभव हो पाती है।

राज्य ने पारदर्शी डेटा रिकॉर्डिंग व्यवस्था को भी गुणवत्ता नियंत्रण के लिए अहम बताया। इससे परियोजनाओं से जुड़े सभी पक्षों की जिम्मेदारी स्पष्ट रहती है और निगरानी प्रक्रिया अधिक प्रभावी बनती है।

अन्य राज्यों ने भी साझा किए अपने मॉडल

बैठक में हिमाचल प्रदेश ने प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत लागू तीन स्तरीय गुणवत्ता निगरानी प्रणाली की जानकारी दी। इस मॉडल में राष्ट्रीय और राज्य स्तर के गुणवत्ता निरीक्षकों द्वारा निर्माण कार्यों की बहु-स्तरीय जांच की जाती है, जिससे गुणवत्ता पर प्रभावी नियंत्रण सुनिश्चित होता है।

वहीं राजस्थान ने अपने ‘क्रॉस क्वालिटी चेक’ मॉडल का प्रस्तुतीकरण किया। इस व्यवस्था के तहत पांच से सात करोड़ रुपये तक की लागत वाली परियोजनाओं की गुणवत्ता जांच दूसरे खंड के अधिकारियों से कराई जाती है, जिससे स्वतंत्र और निष्पक्ष मूल्यांकन सुनिश्चित हो सके।

राज्यों के बीच अनुभव साझा करने पर जोर

बैठक में इस बात पर सहमति बनी कि सड़क निर्माण की गुणवत्ता बेहतर बनाने के लिए राज्यों को एक-दूसरे के सफल मॉडलों और अनुभवों से सीखना चाहिए। उत्तराखंड का डिजिटल निगरानी मॉडल तकनीक आधारित प्रशासन और पारदर्शी कार्यप्रणाली का एक प्रभावी उदाहरण बनकर उभरा, जिसे अन्य राज्यों के लिए भी उपयोगी माना जा रहा है।

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