उत्तराखंड के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami के नेतृत्व वाले मंत्रिमंडल के विस्तार में नया चेहरा भरत सिंह चौधरी शामिल किए गए हैं। शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल के समक्ष संस्कृत भाषा में पद एवं गोपनीयता की शपथ लेने वाले चौधरी ने अपनी नई जिम्मेदारी के साथ राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण स्थान हासिल कर लिया है।
देहरादून: नवरात्र के पावन अवसर पर Pushkar Singh Dhami के मंत्रिमंडल विस्तार में Bharat Singh Choudhary को रुद्रप्रयाग से कैबिनेट मंत्री के रूप में शामिल किया गया। राज्यपाल द्वारा आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में भरत चौधरी ने संस्कृत भाषा में पद एवं गोपनीयता की शपथ लेकर विशेष पहचान बनाई।
भरत सिंह चौधरी का राजनीतिक सफर जमीनी स्तर से शुरू हुआ है, जो उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता है। मूल रूप से रुद्रप्रयाग जिले के मवाना घोलतीर क्षेत्र के निवासी चौधरी ने अपनी राजनीति की शुरुआत ग्राम पंचायत मवाना के प्रधान पद से की थी। इसके बाद उन्होंने लगातार जनसेवा के जरिए अपनी पहचान मजबूत की और क्षेत्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाई।
जमीनी राजनीति से कैबिनेट तक का सफर
भरत सिंह चौधरी का राजनीतिक सफर गाँव से शुरू हुआ। मूल रूप से Mawana Gholtir के निवासी चौधरी ने ग्राम पंचायत मवाना के प्रधान पद से अपनी राजनीतिक पहचान बनाई। इस दौरान उन्होंने जनसेवा को अपनी प्राथमिकता बनाया और धीरे-धीरे क्षेत्रीय राजनीति में अपनी पकड़ मजबूत की। उनकी मेहनत और जनसेवा का फल तब मिला जब उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थामा।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में चौधरी ने Uttarakhand की रुद्रप्रयाग सीट से जीत दर्ज कर विधानसभा में कदम रखा। इसके बाद 2022 के चुनाव में जनता ने उन्हें पुनः विधायक चुनकर अपनी मजबूती और जनविश्वास दिखाया।

कैबिनेट मंत्री के रूप में नई जिम्मेदारी
भरत सिंह चौधरी को पहली बार कैबिनेट मंत्री बनने का अवसर मिला है। यह उनके लंबे राजनीतिक संघर्ष और जनसेवा की मेहनत का परिणाम माना जा रहा है। स्थानीय स्तर पर चौधरी की छवि एक सरल, मिलनसार और जमीनी नेता की रही है, जो हमेशा आम जनता के मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं। धामी मंत्रिमंडल के विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को भी ध्यान में रखा गया है।
इस बार मंत्रिमंडल में गढ़वाल मंडल से आठ और कुमाऊं मंडल से चार मंत्री शामिल हैं। इसके अलावा तीन विधायक पहली बार कैबिनेट मंत्री बने हैं, जबकि दो अनुभवी नेताओं को दोबारा मौका दिया गया है। विशेष रूप से इस विस्तार में हरिद्वार जिले को दो कैबिनेट मंत्री मिले हैं, जो क्षेत्रीय संतुलन और जनप्रतिनिधित्व की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भरत चौधरी की राजनीति का मूल मंत्र है – जनता के नजदीक रहना और उनके मुद्दों का समाधान करना। उन्होंने हमेशा गांव और पहाड़ी क्षेत्रों के विकास को अपनी प्राथमिकता बनाया है। उनके कार्यकर्ताओं और जनता के बीच सुदृढ़ संपर्क ने उन्हें एक भरोसेमंद और जमीनी नेता के रूप में स्थापित किया है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि एक ऐसे नेता को मंत्रिमंडल में शामिल करना, जिसकी पकड़ जनता पर मजबूत है, धामी सरकार के जनाधार को और मजबूत करने की दिशा में अहम कदम है।









