जोधपुर के नर्सिंग ऑफिसर ने कथित ब्लैकमेल और कानूनी धमकियों से परेशान होकर जहर खाया। इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुलिस वीडियो, कॉल डिटेल और आर्थिक लेनदेन की जांच कर रही है। निष्पक्ष जांच के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।
Rajasthan: जोधपुर के एमडीएम हॉस्पिटल में कार्यरत 36 वर्षीय नर्सिंग ऑफिसर कैलाश नागौरा की मौत ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। बताया जा रहा है कि उन्होंने जहर खाने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। इस वीडियो में उन्होंने एक महिला पर गंभीर आरोप लगाए।
उनका कहना था कि दोनों के बीच संबंध आपसी सहमति से थे। लेकिन बाद में उन्हें बदनाम करने और दुष्कर्म का मामला दर्ज कराने की धमकी दी जाने लगी। उन्होंने दावा किया कि इस दबाव के कारण उन्हें मकान निर्माण सहित अलग-अलग कारणों से लगभग 40 लाख रुपये देने पड़े।
वीडियो में उन्होंने यह भी कहा कि यदि सब कुछ आपसी सहमति से हुआ था तो केवल उन्हें ही दोषी क्यों ठहराया जा रहा है। उनका यह बयान अब पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन गया है। अधिकारियों ने वीडियो को जब्त कर लिया है और उसकी सत्यता की जांच की जा रही है।
जहर सेवन के बाद बिगड़ी हालत
मिली जानकारी के मुताबिक, जहरीला पदार्थ निगलने के बाद कैलाश नागौरा की हालत चिंताजनक हो गई। उन्हें तत्काल पाली के बांगड़ अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन बेहतर उपचार के लिए जोधपुर रेफर करना पड़ा।

परिजनों के अनुसार, रास्ते में ही उनकी स्थिति और खराब हो गई और उन्होंने दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए सुरक्षित रखवाया गया है, ताकि मौत के कारणों की स्पष्ट जानकारी मिल सके।
पुलिस ने शुरू की विस्तृत जांच
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले की हर पहलू से जांच की जा रही है। वीडियो, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, मोबाइल डेटा और आर्थिक लेनदेन की जांच की जा रही है। डिजिटल साक्ष्यों को सुरक्षित कर लिया गया है और तकनीकी टीम उनकी पड़ताल कर रही है।
पुलिस का कहना है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी तथ्यों की जांच जरूरी है। आरोप गंभीर हैं, इसलिए जांच निष्पक्ष और कानूनी प्रक्रिया के तहत की जाएगी। यदि किसी तरह का दबाव या अवैध वसूली सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
रिश्तों और कानून को लेकर उठे सवाल
यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब 14 फरवरी को लोग वैलेंटाइन डे की तैयारी कर रहे हैं। इस मामले ने रिश्तों में विश्वास, पारदर्शिता और कानूनी प्रावधानों के उपयोग या दुरुपयोग को लेकर बहस छेड़ दी है।
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी मामले में जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालना सही नहीं होता। कानून सभी के लिए बराबर है और जांच के बाद ही सच्चाई सामने आती है। परिजनों और परिचितों में शोक का माहौल है। परिवार न्याय की मांग कर रहा है, वहीं पुलिस ने भरोसा दिलाया है कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी।








