वाराणसी में फर्जी ट्रेडिंग कंपनी के ऑफिस से 32 गिरफ्तार कॉल सेंटर में ट्रेडर बनकर पहुंचे दरोगा-सिपाही 21 युवतियों ने करोड़ों ठगे

वाराणसी में फर्जी ट्रेडिंग कंपनी के कॉल सेंटर पर पुलिस ने छापा मारकर 32 लोगों को गिरफ्तार किया। 21 युवतियों पर ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की ठगी का आरोप है।
वाराणसी में फर्जी ट्रेडिंग कंपनी के ऑफिस से 32 गिरफ्तार कॉल सेंटर में ट्रेडर बनकर पहुंचे दरोगा-सिपाही 21 युवतियों ने करोड़ों ठगे
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वाराणसी में ट्रेडिंग के नाम पर लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने वाले कथित फर्जी कॉल सेंटर का पुलिस ने खुलासा किया है। पुलिस टीम ने एक ट्रेडिंग कंपनी के ऑफिस में कार्रवाई करते हुए 32 लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें 21 युवतियां भी शामिल हैं, जिन पर फोन कॉल के जरिए लोगों को ट्रेडिंग में निवेश का लालच देकर रकम जमा कराने का आरोप है।

पुलिस को इस फर्जी ट्रेडिंग नेटवर्क की जानकारी शिकायतों और प्रारंभिक जांच के दौरान मिली। इसके बाद पूरे मामले की पड़ताल शुरू की गई। आरोपियों तक पहुंचने के लिए पुलिसकर्मियों ने ग्राहक या ट्रेडर बनकर कॉल सेंटर से संपर्क किया। इसके बाद जब पुलिस को नेटवर्क की गतिविधियों की पुष्टि हुई तो टीम ने कार्यालय में छापा मारा।

बताया जा रहा है कि कॉल सेंटर में काम करने वाले कर्मचारी खुद को ट्रेडिंग कंपनी का प्रतिनिधि बताते थे। फोन पर लोगों से शेयर बाजार और ऑनलाइन ट्रेडिंग में निवेश की बात की जाती थी। उन्हें कम समय में अधिक मुनाफा कमाने का लालच दिया जाता था। शुरुआत में छोटी रकम जमा कराने के बाद कथित तौर पर पीड़ितों को बड़े निवेश के लिए तैयार किया जाता था।

आरोप है कि कॉल सेंटर में मौजूद युवतियां लोगों से लगातार फोन पर संपर्क करती थीं। बातचीत के दौरान उन्हें निवेश के फायदे बताए जाते और अलग-अलग योजनाओं के जरिए पैसे लगाने के लिए प्रेरित किया जाता था। जैसे ही कोई व्यक्ति रकम जमा करता, उसके बाद उससे और अधिक पैसे निवेश करने के लिए कहा जाता था।

पुलिस के मुताबिक, यह पूरा नेटवर्क व्यवस्थित तरीके से संचालित किया जा रहा था। कॉल सेंटर में कर्मचारियों के लिए अलग-अलग भूमिकाएं निर्धारित होने की बात सामने आई है। कुछ लोग फोन पर ग्राहकों से बातचीत करते थे, जबकि अन्य लोग डेटा और पैसों से जुड़े काम संभालते थे।

पुलिस टीम ने कार्रवाई से पहले खुद को ट्रेडर बताकर कॉल सेंटर में संपर्क किया। इस दौरान कर्मचारियों से ट्रेडिंग और निवेश के बारे में बातचीत की गई। पुलिस को जब संदेहास्पद गतिविधियों के बारे में पर्याप्त जानकारी मिली तो टीम ने छापेमारी की कार्रवाई की।

कार्यालय में पुलिस की कार्रवाई होते ही वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। पुलिस ने मौके से बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लिया। जांच के दौरान मोबाइल फोन, कंप्यूटर, दस्तावेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण मिलने की भी जानकारी सामने आई है। इन उपकरणों की जांच से ठगी के नेटवर्क और पीड़ितों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।

पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस नेटवर्क का संचालन कौन कर रहा था। इसके अलावा ठगी की रकम किन बैंक खातों में पहुंचती थी और इस पूरे नेटवर्क से कितने लोग जुड़े हुए थे, इसकी भी जांच की जा रही है।

आरोपियों के मोबाइल फोन और कंप्यूटर से कॉल डिटेल, ग्राहकों की जानकारी और लेनदेन से जुड़े रिकॉर्ड मिलने की संभावना है। पुलिस इन डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर नेटवर्क के अन्य सदस्यों तक पहुंचने की कोशिश कर सकती है।

जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने कितने लोगों को फोन किया और अब तक कितनी रकम की ठगी की गई। पुलिस अलग-अलग पीड़ितों की शिकायतों को भी मामले से जोड़कर देख रही है। यदि अलग-अलग राज्यों के लोगों से ठगी की गई है तो जांच का दायरा और बढ़ सकता है।

ट्रेडिंग के नाम पर होने वाली ऑनलाइन ठगी के मामलों में अक्सर साइबर अपराधी लोगों को तेजी से मुनाफा कमाने का भरोसा दिलाते हैं। इसके बाद फर्जी ट्रेडिंग ऐप, वेबसाइट या खातों के जरिए निवेश दिखाया जाता है। रकम निकालने के समय अतिरिक्त शुल्क, टैक्स या अन्य बहाने से और पैसे मांगे जाते हैं।

वाराणसी में सामने आए इस मामले में भी पुलिस इसी तरह के तौर-तरीकों की जांच कर रही है। हालांकि ठगी का पूरा तरीका और कुल रकम का आधिकारिक आंकड़ा विस्तृत जांच के बाद ही स्पष्ट होगा।

पुलिस ने गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ शुरू कर दी है। पूछताछ के आधार पर कथित नेटवर्क के मुख्य संचालकों और अन्य आरोपियों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। बैंक खातों और डिजिटल लेनदेन की जांच भी मामले में अहम होगी।

फिलहाल 32 लोगों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस पूरे नेटवर्क की परतें खोलने में जुटी है। कॉल सेंटर में काम करने वाली 21 युवतियों समेत गिरफ्तार सभी आरोपियों की भूमिका की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि इस फर्जी ट्रेडिंग कंपनी के जरिए कितने लोगों को निशाना बनाया गया और ठगी की कुल रकम कितनी है।

पुलिस की कार्रवाई के बाद अब इस कथित साइबर ठगी नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों और पैसों के लेनदेन का पता लगाने पर फोकस है। जांच पूरी होने के बाद मामले में और गिरफ्तारियां होने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।

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