वाराणसी में 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे बढ़ रही गंगा: 11 मोहल्लों में पहुंचा वरुणा का पानी, 1,388 लोग प्रभावित; गलियों में चल रही नाव

वाराणसी में गंगा चेतावनी बिंदु पार कर गई है। वरुणा की बाढ़ से 11 मोहल्ले प्रभावित हैं और 1388 लोग प्रभावित हुए हैं। 13 राहत शिविरों में 935 लोग हैं।
वाराणसी में 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे बढ़ रही गंगा: 11 मोहल्लों में पहुंचा वरुणा का पानी, 1,388 लोग प्रभावित; गलियों में चल रही नाव
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वाराणसी में गंगा और वरुणा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से बाढ़ का खतरा गहराता जा रहा है। गंगा का पानी चेतावनी बिंदु को पार कर चुका है और निचले इलाकों में इसका असर साफ दिखाई देने लगा है। मंगलवार को गंगा का जलस्तर 70.29 मीटर दर्ज किया गया, जबकि चेतावनी स्तर 70.26 मीटर है। यानी नदी चेतावनी बिंदु से 3 सेंटीमीटर ऊपर बह रही है। इससे पहले जलस्तर करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा था, जिसके कारण प्रशासन ने तटवर्ती और निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी थी। अब स्थिति को देखते हुए गंगा में नाव संचालन भी निलंबित कर दिया गया है। अधिकारियों ने लोगों और श्रद्धालुओं से घाटों तथा तेज बहाव वाले क्षेत्रों में नहीं जाने की अपील की है।

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर वरुणा नदी पर भी दिखाई दे रहा है। वरुणा में आई बाढ़ के कारण वाराणसी के करीब 11 मोहल्ले और वार्ड आंशिक रूप से प्रभावित हुए हैं। प्रशासन के अनुसार वरुणा नदी की बाढ़ से 328 परिवारों के कुल 1,388 लोग प्रभावित हुए हैं। इनमें से बड़ी संख्या में परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। फिलहाल 13 बाढ़ राहत शिविर संचालित किए जा रहे हैं, जहां 219 परिवारों के 935 लोग रह रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि स्थिति के अनुसार अन्य प्रभावित परिवारों को भी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की व्यवस्था तैयार रखी गई है।

वाराणसी के कई निचले इलाकों में पानी भरने से सामान्य आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वरुणा के किनारे बसे इलाकों में गलियों और संपर्क मार्गों पर पानी पहुंचने के बाद लोगों को आने-जाने में परेशानी हो रही है। कोनिया समेत कई बस्तियों में पानी बढ़ने के बाद नाव लोगों के लिए आवागमन का प्रमुख साधन बन गई है। कुछ स्थानों पर गलियों में नाव के जरिए लोगों को एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाया जा रहा है। इससे शहर के उन इलाकों की तस्वीर बदल गई है, जहां सामान्य दिनों में सड़क और गलियों में पैदल, बाइक तथा छोटे वाहनों से आवाजाही होती है।

बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य के लिए 32 नावें लगाई हैं। इनका इस्तेमाल प्रभावित इलाकों में लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों तक ले जाने के लिए किया जा रहा है। प्रशासन की ओर से नावों के संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही पुलिस, एनडीआरएफ, जल पुलिस, नगर निगम और अन्य संबंधित विभागों को अलर्ट पर रखा गया है। पुलिस और एनडीआरएफ की टीमें बाढ़ प्रभावित इलाकों में लगातार निगरानी कर रही हैं, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

गंगा का चेतावनी स्तर 70.26 मीटर है, जबकि खतरे का निशान 71.26 मीटर निर्धारित है। फिलहाल नदी खतरे के निशान से करीब 97 सेंटीमीटर नीचे है, लेकिन लगातार बढ़ता जलस्तर प्रशासन और स्थानीय लोगों की चिंता बढ़ा रहा है। गंगा का उच्चतम बाढ़ स्तर 73.90 मीटर निर्धारित किया गया है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि जलस्तर में और बढ़ोतरी होने की स्थिति में निचले इलाकों के लोगों को बिना देरी सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

वरुणा के किनारे बसे इलाकों में स्थिति इसलिए भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि गंगा का बढ़ता जलस्तर नदी से जुड़े निचले क्षेत्रों पर दबाव बढ़ा रहा है। कई स्थानों पर पानी घरों और गलियों तक पहुंच गया है। लोगों को जरूरी सामान के साथ सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है। जिन परिवारों ने घर छोड़े हैं, उनके लिए राहत शिविरों में भोजन, पेयजल, बिस्तर, रोशनी, साफ-सफाई और स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई है। बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दूध, फल और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने की भी व्यवस्था की गई है।

राहत शिविरों में रह रहे लोगों को तीन समय भोजन और नाश्ता उपलब्ध कराया जा रहा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित परिवारों के लिए राशन किट भी तैयार रखी गई हैं। जरूरत के अनुसार परिवारों को खाद्यान्न और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराया जा रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री पहुंचाने में किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। संवेदनशील इलाकों में अधिकारियों की टीमों को लगातार स्थिति का जायजा लेने के लिए लगाया गया है।

गंगा के जलस्तर में वृद्धि का असर वाराणसी के घाटों पर भी दिखाई दे रहा है। कई घाटों के निचले हिस्से पानी में डूब गए हैं। गंगा किनारे आने वाले लोगों की आवाजाही पर भी प्रशासन ने सख्ती बढ़ाई है। नाव संचालन बंद करने का फैसला भी इसी सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। प्रशासन ने साफ तौर पर लोगों से अपील की है कि वे घाटों पर जाकर पानी के तेज बहाव के करीब न जाएं और किसी भी तरह की जोखिम वाली गतिविधि से बचें।

बाढ़ का असर धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ा है। गंगा का पानी बढ़ने के कारण घाटों पर अंतिम संस्कार और अन्य धार्मिक गतिविधियों के लिए लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कुछ घाटों के निचले प्लेटफॉर्म जलमग्न होने से वैकल्पिक स्थानों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर भी पानी बढ़ने से अंतिम संस्कार की व्यवस्था प्रभावित हुई है और लोगों को इंतजार करना पड़ रहा है।

प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल लोगों की सुरक्षा और राहत व्यवस्था बनाए रखना है। जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने अधिकारियों को पूरी तरह सतर्क रहने और प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए हैं। जलस्तर में और बढ़ोतरी होने पर प्रभावित परिवारों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखने को कहा गया है। पुलिस आयुक्त मोहित अग्रवाल ने पुलिस और एनडीआरएफ टीमों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लगातार निगरानी रखने तथा किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

वाराणसी में इस समय सबसे बड़ी चिंता गंगा और वरुणा दोनों के बढ़ते जलस्तर को लेकर है। एक ओर गंगा चेतावनी बिंदु पार कर चुकी है, वहीं दूसरी ओर वरुणा के किनारे बसे इलाकों में पानी का फैलाव बढ़ रहा है। निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के सामने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाने की स्थिति बन रही है। प्रशासन लगातार जलस्तर की निगरानी कर रहा है और जरूरत पड़ने पर राहत शिविरों की संख्या तथा बचाव संसाधनों को बढ़ाने की तैयारी में है।

फिलहाल 1,388 लोग वरुणा की बाढ़ से प्रभावित बताए गए हैं और 935 लोग 13 राहत शिविरों में रह रहे हैं। 32 नावों को राहत-बचाव कार्य में लगाया गया है। आने वाले समय में गंगा का जलस्तर कितना बढ़ता है, इस पर वाराणसी की बाढ़ की स्थिति काफी हद तक निर्भर करेगी। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें, अधिकारियों के निर्देशों का पालन करें और पानी से घिरे इलाकों में अनावश्यक आवाजाही से बचें।

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