काशी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ा, नाव संचालन बंद, 84 घाटों का संपर्क टूटा

वाराणसी में गंगा का जलस्तर 65.8 मीटर पहुंचा। नाव संचालन बंद है और 84 घाटों का संपर्क टूटा। NDRF व जल पुलिस तैनात हैं।

वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पानी 65.8 मीटर तक पहुंच गया है और प्रति घंटे 20 सेंटीमीटर बढ़ रहा है। सुरक्षा के लिए नाव संचालन बंद कर NDRF और जल पुलिस तैनात की गई है।

वाराणसी: काशी में गंगा के बढ़ते जलस्तर ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। केंद्रीय जल आयोग के अनुसार 17 अगस्त सुबह आठ बजे नदी का जलस्तर 65.8 मीटर दर्ज किया गया और यह करीब 20 सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। बढ़ते पानी को देखते हुए नावों का संचालन बंद कर दिया गया है, जबकि 84 घाटों का आपसी संपर्क भी टूट गया है।

तेजी से बढ़ रहा गंगा का जलस्तर

पहाड़ी इलाकों में लगातार बारिश और ऊपरी क्षेत्रों से पानी छोड़े जाने के कारण वाराणसी में गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। केंद्रीय जल आयोग के मुताबिक नदी का जलस्तर 65.8 मीटर दर्ज किया गया है और इसमें लगातार वृद्धि हो रही है।

वाराणसी में गंगा का वार्निंग लेवल 70.26 मीटर और खतरे का निशान 71.26 मीटर निर्धारित है। ऐसे में जलस्तर बढ़ने की मौजूदा रफ्तार को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है।

गौरतलब है कि वर्ष 1978 में वाराणसी में गंगा का जलस्तर 73.90 मीटर तक पहुंच चुका है।

नाव संचालन पर रोक, 84 घाटों का संपर्क टूटा

गंगा में पानी बढ़ने के कारण वाराणसी कमिश्नरेट पुलिस ने रविवार से नावों के संचालन पर रोक लगा दी है। इससे नाव से एक घाट से दूसरे घाट तक आने-जाने वाले लोगों और श्रद्धालुओं की परेशानी बढ़ गई है।

जलस्तर बढ़ने के कारण काशी के 84 घाटों का आपसी संपर्क भी टूट गया है। कई घाटों के निचले हिस्से पानी में डूबने लगे हैं। प्रशासन की ओर से लोगों को गंगा के किनारे जाने और जलभराव वाले क्षेत्रों में अनावश्यक आवाजाही से बचने की सलाह दी गई है।

जल पुलिस और NDRF की बढ़ाई गई निगरानी

सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के अवसर पर घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। घाटों पर ड्रोन के जरिए भी निगरानी की जा रही है।

जल पुलिस और NDRF की टीमें 24 घंटे गंगा क्षेत्र में पेट्रोलिंग कर रही हैं। प्रशासन की कोशिश है कि बढ़ते जलस्तर के बीच किसी तरह की अप्रिय घटना न हो।

श्रद्धालुओं से गंगा में स्नान करने और गहरे पानी की ओर जाने से बचने की अपील की गई है। गंगा और वरुणा नदी के किनारे रहने वाले लोगों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं।

धार्मिक गतिविधियों पर भी पड़ा असर

गंगा के बढ़ते जलस्तर का असर धार्मिक गतिविधियों पर भी दिखाई दे रहा है। कई घाटों पर स्नान और अन्य गतिविधियों को लेकर प्रतिबंध लगाए गए हैं। घाटों पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पुलिस और प्रशासनिक टीमें लगातार स्थिति पर नजर रख रही हैं।

प्रशासन के अनुसार जलस्तर में बदलाव पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। परिस्थितियां सामान्य होने के बाद नाव संचालन को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा। फिलहाल लोगों से प्रशासन की एडवाइजरी का पालन करने और जोखिम वाले क्षेत्रों से दूर रहने की अपील की गई है।

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