विदेशी निवेश बढ़ाने की बड़ी तैयारी: सरकारी बॉन्ड पर कैपिटल गेन्स टैक्स खत्म कर सकती है सरकार

Capital Gains Tax News: सरकार विदेशी निवेश को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठा सकती है। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकारी बॉन्ड पर कैपिटल गेन्स टैक्स खत्म किया जा सकता

इकोनॉमी को लेकर जारी चिंताओं और विदेशी निवेश को आकर्षित करने के प्रयासों के बीच सरकार ने एक बड़ा फैसला लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों पर लगने वाला कैपिटल गेन्स टैक्स हटाने का निर्णय लिया गया है।

बिजनेस न्यूज़: भारत सरकार विदेशी निवेश को आकर्षित करने और घरेलू वित्तीय बाजार को मजबूत बनाने के लिए एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के अनुसार, सरकार विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) के लिए भारतीय सरकारी बॉन्ड पर लगने वाले कैपिटल गेन्स टैक्स को समाप्त करने पर विचार कर रही है। इस फैसले को आर्थिक नीति में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है, जिसका सीधा असर विदेशी निवेश, रुपये की स्थिरता और बॉन्ड मार्केट पर पड़ सकता है।

सूत्रों के अनुसार, इस प्रस्ताव को केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे लागू करने के लिए इनकम टैक्स कानून में संशोधन हेतु अध्यादेश लाने की प्रक्रिया चल रही है। राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह बदलाव औपचारिक रूप से लागू हो सकता है।

क्या बदलेगा नए फैसले के बाद?

वर्तमान व्यवस्था के तहत विदेशी निवेशकों को भारतीय बॉन्ड्स से होने वाले लाभ पर कैपिटल गेन्स टैक्स देना पड़ता है। अगर निवेश 12 महीने से अधिक समय के लिए किया जाता है तो 12.5% तक लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेन्स टैक्स लागू होता है। वहीं, 12 महीने से कम अवधि के निवेश पर शॉर्ट-टर्म टैक्स की दर 30% से 40% तक पहुंच सकती है।

प्रस्तावित बदलाव के बाद सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities) पर यह कैपिटल गेन्स टैक्स पूरी तरह समाप्त हो जाएगा। इसके अलावा, ब्याज आय पर लगने वाले 20% विथहोल्डिंग टैक्स को भी घटाने या इसमें ढील देने पर सरकार विचार कर रही है।

विदेशी निवेशकों को मिलेगा बड़ा फायदा

इस कदम से भारतीय बॉन्ड मार्केट विदेशी निवेशकों के लिए अधिक आकर्षक बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स खत्म होने से वैश्विक फंड्स जैसे सॉवरेन वेल्थ फंड्स और पेंशन फंड्स भारत के डेट मार्केट में निवेश बढ़ा सकते हैं। अनुमानों के अनुसार, इस बदलाव के बाद भारत में हर साल 10 अरब डॉलर से 30 अरब डॉलर (लगभग ₹80,000 करोड़ से ₹2.5 लाख करोड़) तक का अतिरिक्त विदेशी निवेश आ सकता है।

हाल के महीनों में वैश्विक तनाव और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के चलते विदेशी निवेशकों की बिकवाली बढ़ी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस साल अब तक विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजारों से भारी निकासी की है, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ा है और यह अपने निचले स्तरों के करीब पहुंच गया है। सरकार को उम्मीद है कि नए फैसले से विदेशी पूंजी प्रवाह बढ़ेगा, जिससे डॉलर की आमद मजबूत होगी और भारतीय रुपया स्थिरता हासिल कर सकता है। विदेशी निवेश बढ़ने से भारत के विदेशी मुद्रा भंडार को भी समर्थन मिलेगा।

बॉन्ड यील्ड और सरकारी खर्च पर प्रभाव

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर विदेशी निवेशक बड़े पैमाने पर भारतीय सरकारी बॉन्ड खरीदते हैं, तो इससे बॉन्ड की मांग बढ़ेगी और यील्ड (ब्याज दर) में गिरावट आएगी। बॉन्ड यील्ड घटने का मतलब है कि सरकार को कर्ज लेने के लिए कम ब्याज चुकाना होगा, जिससे देश के वित्तीय घाटे (Fiscal Deficit) पर सकारात्मक असर पड़ेगा। यह कदम दीर्घकाल में सरकार की उधारी लागत को कम करने में मदद कर सकता है।

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