हरियाणा में हरियाली का सिरमौर बना यमुनानगर, 60 लाख से अधिक पेड़ों के साथ राज्य में अव्वल

विश्व पर्यावरण दिवस पर जारी आंकड़ों में यमुनानगर हरियाणा का सबसे हरित जिला बना। जिले में 60.94 लाख पेड़ दर्ज किए गए, जो राज्य में सबसे अधिक हैं।

विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर जारी आंकड़ों में यमुनानगर हरियाणा का सबसे हरित जिला बनकर उभरा है। जिले में 60.94 लाख पेड़ दर्ज किए गए हैं, जो राज्य के कुल पेड़ों का लगभग 15 प्रतिशत हिस्सा हैं।

Yamunanagar: हरियाणा में पर्यावरण संरक्षण और हरित विकास के क्षेत्र में यमुनानगर ने नई पहचान बनाई है। वन विभाग की डिजिटल वृक्ष गणना के अनुसार जिले में जंगलों के बाहर 60 लाख से अधिक पेड़ दर्ज किए गए हैं। कलेसर नेशनल पार्क और किसानों द्वारा अपनाई गई कृषि वानिकी ने इस उपलब्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

पेड़ों की संख्या में यमुनानगर सबसे आगे

विश्व पर्यावरण दिवस पर जारी आंकड़ों ने यमुनानगर को हरियाणा का सबसे हरित जिला साबित किया है। वन विभाग की डिजिटल वृक्ष गणना के अनुसार जिले में जंगलों के बाहर 60 लाख 94 हजार से अधिक पेड़ मौजूद हैं। यह संख्या पूरे राज्य में सबसे अधिक है और हरियाणा के कुल पेड़ों का लगभग 14.86 प्रतिशत हिस्सा यमुनानगर में ही पाया गया है।

प्रदेश में कुल 4.01 करोड़ पेड़ दर्ज किए गए हैं, जिनमें से हर सातवां पेड़ यमुनानगर में स्थित है। यह उपलब्धि न केवल जिले की पर्यावरणीय स्थिति को मजबूत दर्शाती है, बल्कि हरित विकास के प्रति स्थानीय लोगों और किसानों की भागीदारी को भी रेखांकित करती है।

कलेसर नेशनल पार्क और किसानों का बड़ा योगदान

यमुनानगर की इस उपलब्धि के पीछे कलेसर नेशनल पार्क और वन्यजीव अभयारण्य की महत्वपूर्ण भूमिका मानी जा रही है। लगभग 25 हजार एकड़ क्षेत्र में फैला यह वन क्षेत्र हरियाणा की सबसे समृद्ध जैव विविधता वाले क्षेत्रों में गिना जाता है। शिवालिक की तलहटी में स्थित यह क्षेत्र वन संपदा और वन्यजीव संरक्षण के लिए विशेष पहचान रखता है।

इसके साथ ही जिले के किसानों ने भी निजी भूमि पर बड़े पैमाने पर पॉपलर, सफेदा और शीशम जैसे पेड़ों का रोपण कर कृषि वानिकी को बढ़ावा दिया है। यही कारण है कि यमुनानगर को देश की प्लाईवुड राजधानी के रूप में भी पहचान मिली हुई है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि किसानों की सक्रिय भागीदारी के बिना यह उपलब्धि संभव नहीं थी।

वन क्षेत्र में भी दूसरा स्थान

वन क्षेत्र के मामले में भी यमुनानगर राज्य के अग्रणी जिलों में शामिल है। भारतीय वन सर्वेक्षण की रिपोर्ट के अनुसार जिले का लगभग 10.94 प्रतिशत क्षेत्र वन क्षेत्र के अंतर्गत आता है। इस श्रेणी में पंचकूला पहले स्थान पर है, जबकि यमुनानगर दूसरे स्थान पर बना हुआ है।

हरियाणा में कुल वन क्षेत्र 1,559 वर्ग किलोमीटर है, जो राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का लगभग 3.53 प्रतिशत है। राज्य सरकार और वन विभाग हर वर्ष बड़े स्तर पर पौधारोपण अभियान भी चलाते हैं, जिसके तहत करोड़ों पौधे लगाए जाते हैं।

उपलब्धि के साथ मौजूद हैं बड़ी चुनौतियां

हरियाली के मामले में अग्रणी होने के बावजूद यमुनानगर और पूरे हरियाणा के सामने कई पर्यावरणीय चुनौतियां मौजूद हैं। बढ़ता वायु प्रदूषण, गिरता भूजल स्तर, अवैध खनन और वन तस्करी जैसी समस्याएं लगातार चिंता का विषय बनी हुई हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार राज्य में हर वर्ष लाखों नए वाहन सड़कों पर उतर रहे हैं, जिससे प्रदूषण का दबाव बढ़ रहा है। वहीं भूजल स्तर भी लगातार नीचे जा रहा है। हालांकि यमुनानगर की स्थिति अन्य जिलों की तुलना में बेहतर मानी जाती है, फिर भी यहां भी जल स्तर में गिरावट दर्ज की जा रही है।

संरक्षण के साथ संवर्धन पर जोर जरूरी

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पेड़ों की संख्या में अग्रणी होना निश्चित रूप से बड़ी उपलब्धि है, लेकिन इस स्थिति को बनाए रखने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। केवल पौधारोपण ही नहीं, बल्कि पौधों के संरक्षण और रखरखाव पर भी बराबर ध्यान देना होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वन संरक्षण, जल संरक्षण और प्रदूषण नियंत्रण के उपाय साथ-साथ लागू किए जाएं, तो यमुनानगर आने वाले वर्षों में भी हरियाणा की हरित पहचान बना रह सकता है। वहीं पर्यावरण संरक्षण में किसानों, स्थानीय समुदायों और सरकारी एजेंसियों की साझेदारी भविष्य में और बेहतर परिणाम दे सकती है।

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