आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में पुलिस ने कथित नवजात तस्करी और अवैध गोद लेने के मामले का खुलासा करते हुए तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। तीन दिन की बच्ची को सुरक्षित बचाया गया है, जबकि पुलिस पूरे नेटवर्क और अन्य आरोपियों की तलाश में जुटी है।
विजयवाड़ा: आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में पुलिस ने एक विशेष अभियान के दौरान कथित अवैध बाल तस्करी और नवजात बच्ची की खरीद-फरोख्त से जुड़े मामले का खुलासा किया है। इस कार्रवाई में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया, जबकि केवल तीन दिन की एक नवजात बच्ची को सुरक्षित बचाकर सरकारी संरक्षण में भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि मामला केवल एक अवैध सौदे तक सीमित नहीं हो सकता और इसके पीछे सक्रिय व्यापक नेटवर्क की जांच की जा रही है।
यह कार्रवाई विजयवाड़ा के कृष्णलंका क्षेत्र स्थित राजीव गांधी पार्क के पास की गई, जहां पुलिस ने खुफिया सूचना के आधार पर संदिग्धों को रोका और बच्ची को सुरक्षित अपने कब्जे में लिया।
कौन हैं आरोपी?
पुलिस के अनुसार गिरफ्तार किए गए तीन लोगों में एक दंपति और एक अन्य व्यक्ति शामिल है। आरोपियों की पहचान प्रकाशम जिले के पोलावरम गांव निवासी 33 वर्षीय कोनाथम वेंकट कृष्णा रेड्डी, उनकी 27 वर्षीय पत्नी कोनाथम शिवा पार्वती तथा बिहार के गया जिले निवासी 34 वर्षीय सैयद आलम के रूप में की गई है।
पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से तीन मोबाइल फोन भी बरामद किए हैं, जिनकी डिजिटल जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि मोबाइल फोन से इस कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी मिल सकती है।
खुफिया सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, एनटीआर जिला पुलिस आयुक्त को मिली विशेष सूचना के आधार पर निगरानी बढ़ाई गई थी। सूचना मिलने के बाद विशेष टीम ने विजयवाड़ा के राजीव गांधी पार्क के पास जांच अभियान चलाया।
जांच के दौरान संदिग्ध वाहन और उसमें मौजूद लोगों को रोककर पूछताछ की गई। तलाशी लेने पर नवजात बच्ची उनके साथ मिली। इसके बाद पुलिस ने बच्ची को सुरक्षित संरक्षण में लेकर तीनों आरोपियों को हिरासत में ले लिया।
कथित अवैध सौदे का तरीका
प्रारंभिक जांच में पुलिस को जानकारी मिली कि गिरफ्तार दंपति लंबे समय से संतान न होने के कारण विभिन्न आईवीएफ केंद्रों और सरोगेसी सुविधाओं से संपर्क कर रहा था। इसी दौरान उनका संपर्क कथित रूप से दिल्ली स्थित एक आईवीएफ केंद्र से जुड़े कुछ लोगों से हुआ।
जांच एजेंसियों का आरोप है कि वहां एक महिला ने दंपति को धनराशि के बदले नवजात बच्चा उपलब्ध कराने का प्रस्ताव दिया। पुलिस का दावा है कि दंपति ने कथित रूप से लगभग 6.59 लाख रुपये किस्तों में भुगतान किया और हाल ही में दिल्ली जाकर तीन दिन की नवजात बच्ची को अपने साथ लिया।
हालांकि इन आरोपों की पुष्टि अभी जांच के अधीन है और पुलिस संबंधित वित्तीय लेन-देन एवं दस्तावेजों की भी जांच कर रही है।
दिल्ली कनेक्शन की जांच
पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार तीसरा आरोपी सैयद आलम कथित रूप से उस व्यक्ति का परिजन है, जिसका संबंध उस अस्पताल कर्मचारी से बताया जा रहा है, जिस पर अवैध लेन-देन की व्यवस्था कराने का संदेह है।
जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि क्या यह मामला किसी संगठित बाल तस्करी नेटवर्क से जुड़ा है या फिर सीमित स्तर पर संचालित अवैध सौदे का हिस्सा था। दिल्ली और अन्य राज्यों की एजेंसियों से भी आवश्यक जानकारी साझा की जा रही है।
किन धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मानव तस्करी, बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त तथा अन्य संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया है।
अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान यदि किसी अन्य व्यक्ति या संस्था की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस डिजिटल साक्ष्य, बैंक लेन-देन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच कर रही है।
बच्ची को सुरक्षित संरक्षण
बचाई गई तीन दिन की नवजात बच्ची को फिलहाल सरकारी संरक्षण में रखा गया है। संबंधित विभाग यह सुनिश्चित कर रहा है कि बच्ची को आवश्यक चिकित्सा देखभाल, पोषण और सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
बाल संरक्षण से जुड़े अधिकारी भी मामले की निगरानी कर रहे हैं ताकि बच्ची के अधिकारों की पूरी तरह रक्षा की जा सके। आगे की प्रक्रिया कानून और बाल कल्याण से जुड़े नियमों के अनुसार पूरी की जाएगी।
कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया अपनाने की अपील
पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि यदि कोई दंपति बच्चे को गोद लेना चाहता है, तो वह केवल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त कानूनी प्रक्रिया और अधिकृत एजेंसियों के माध्यम से ही ऐसा करे।
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त या बिना कानूनी अनुमति के गोद लेने का प्रयास गंभीर आपराधिक अपराध है। ऐसी गतिविधियां न केवल कानून का उल्लंघन हैं, बल्कि बच्चों की सुरक्षा और अधिकारों के लिए भी गंभीर खतरा पैदा करती हैं।
विशेषज्ञों की राय
बाल अधिकार विशेषज्ञों का कहना है कि अवैध गोद लेने के मामलों में बच्चों की पहचान, सुरक्षा, स्वास्थ्य और भविष्य पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। यही कारण है कि अधिकांश देशों में गोद लेने की प्रक्रिया को कानूनी ढांचे के भीतर रखा गया है, ताकि बच्चे का सर्वोत्तम हित सुनिश्चित किया जा सके। विशेषज्ञों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति अवैध माध्यमों से बच्चा प्राप्त करता है, तो इससे मानव तस्करी जैसे गंभीर अपराधों को बढ़ावा मिलने का खतरा रहता है।











