विश्व स्तनपान सप्ताह: स्वस्थ और मजबूत पीढ़ी की नींव है स्तनपान, मंत्री सीतक्का ने माताओं से की अपील

विश्व स्तनपान सप्ताह पर मंत्री सीतक्का ने जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करने और छह महीने तक केवल मां का दूध पिलाने की अपील की। अभियान तेज करने के निर्देश

विश्व स्तनपान सप्ताह के अवसर पर तेलंगाना की मंत्री सीतक्का ने कहा कि जन्म के एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू करना और छह महीने तक केवल मां का दूध पिलाना शिशु के स्वस्थ विकास की मजबूत नींव है। उन्होंने गांव-गांव जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश दिए।
 
वारंगल: विश्व स्तनपान सप्ताह (1 से 7 अगस्त) के अवसर पर तेलंगाना सरकार की पंचायत राज, ग्रामीण विकास, ग्रामीण जल आपूर्ति, महिला एवं बाल कल्याण मंत्री दानासरी अनसूया सीतक्का ने माताओं से शिशुओं के लिए सही स्तनपान पद्धति अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्तनपान केवल बच्चे के पोषण का माध्यम नहीं, बल्कि एक स्वस्थ, मजबूत और सुरक्षित भविष्य की आधारशिला है। मंत्री ने इस अवसर पर स्वास्थ्य कर्मियों और समुदाय से भी मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए सक्रिय भूमिका निभाने का आग्रह किया।

मां का दूध शिशु के लिए सबसे सुरक्षित और पौष्टिक आहार

सीतक्का ने कहा कि प्रत्येक नवजात को जन्म के पहले एक घंटे के भीतर स्तनपान शुरू कराया जाना चाहिए। उनके अनुसार, मां का दूध शिशु के लिए सबसे सुरक्षित, स्वच्छ और संपूर्ण पोषण प्रदान करने वाला प्राकृतिक आहार है। इसमें मौजूद आवश्यक पोषक तत्व, एंटीबॉडी और प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले घटक नवजात को शुरुआती संक्रमणों और कई गंभीर बीमारियों से बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

उन्होंने कहा कि जीवन के पहले छह महीने तक शिशु को केवल मां का दूध ही दिया जाना चाहिए। इस अवधि में पानी, शहद, गाय का दूध या अन्य खाद्य पदार्थ देने की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि मां का दूध ही बच्चे की सभी पोषण संबंधी जरूरतों को पूरा करने में सक्षम होता है।

छह महीने बाद पूरक आहार के साथ जारी रखें स्तनपान

मंत्री ने माताओं को सलाह दी कि छह महीने पूरे होने के बाद शिशु को उम्र के अनुसार पौष्टिक पूरक आहार देना शुरू किया जाए, लेकिन इसके साथ स्तनपान भी जारी रखा जाए। उन्होंने कहा कि कम से कम एक वर्ष तक और यदि संभव हो तो उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने से बच्चे के शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास को बेहतर समर्थन मिलता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ भी मानते हैं कि लंबे समय तक स्तनपान बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने, कुपोषण के जोखिम को कम करने और स्वस्थ विकास सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

मां का पोषण भी उतना ही महत्वपूर्ण

सीतक्का ने कहा कि स्वस्थ शिशु के लिए केवल स्तनपान ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि मां का संतुलित और पौष्टिक आहार भी बेहद आवश्यक है। उन्होंने बताया कि मां के भोजन की गुणवत्ता का सीधा प्रभाव स्तन दूध की गुणवत्ता पर पड़ता है। यदि मां पर्याप्त पोषण लेती है, तो शिशु को भी बेहतर पोषक तत्व प्राप्त होते हैं, जिससे उसके विकास और प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूती मिलती है। उन्होंने गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को संतुलित भोजन, पर्याप्त पानी, हरी सब्जियां, फल, दालें, दूध और प्रोटीन युक्त आहार लेने की सलाह दी।

गांव-गांव चलेंगे जागरूकता अभियान

विश्व स्तनपान सप्ताह के दौरान मंत्री ने आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा कार्यकर्ताओं और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे गांवों और समुदायों में विशेष जागरूकता अभियान चलाएं। इन अभियानों के माध्यम से गर्भवती महिलाओं, नई माताओं और परिवारों को स्तनपान के वैज्ञानिक लाभों और सही तरीकों के बारे में जानकारी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि कई बार जानकारी के अभाव या सामाजिक भ्रांतियों के कारण माताएं समय पर स्तनपान शुरू नहीं कर पातीं। ऐसे में स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की जिम्मेदारी है कि वे सही जानकारी देकर परिवारों का मार्गदर्शन करें और माताओं का आत्मविश्वास बढ़ाएं।

परिवार और समाज की भी अहम भूमिका

सीतक्का ने कहा कि सफल स्तनपान केवल मां की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज का सहयोग भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने परिवार के सदस्यों से अपील की कि वे नई माताओं को मानसिक और शारीरिक सहयोग दें ताकि वे बिना किसी तनाव के अपने शिशु की देखभाल कर सकें। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यस्थलों और सार्वजनिक स्थानों पर स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करना भी समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।

विश्व स्तनपान सप्ताह का उद्देश्य

हर वर्ष 1 से 7 अगस्त के बीच विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। इसका उद्देश्य स्तनपान के महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाना, माताओं को सही जानकारी उपलब्ध कराना और शिशु स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए समुदाय, स्वास्थ्य संस्थानों और सरकारों को एकजुट करना है। यह अभियान दुनिया भर में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सुधारने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अधिक से अधिक माताएं अनुशंसित अवधि तक स्तनपान कराएं, तो शिशु मृत्यु दर और कुपोषण जैसी समस्याओं में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।

सार्वजनिक भागीदारी की अपील

मंत्री सीतक्का ने सभी माताओं को विश्व स्तनपान सप्ताह की शुभकामनाएं देते हुए नागरिकों से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील की। उन्होंने कहा कि जागरूकता फैलाने और सही जानकारी साझा करने से ही आने वाली पीढ़ी को स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य दिया जा सकता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रही है और विभिन्न स्वास्थ्य एवं पोषण कार्यक्रमों के माध्यम से महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए लगातार कार्य कर रही है।

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