42 वर्षीय फिटनेस इंफ्लुएंसर ऐनी ने अपनी फिटनेस रूटीन की 9 आदतें साझा की हैं। वह 10 हजार कदमों और ढेरों सप्लीमेंट्स के बजाय संतुलित डाइट, प्रोटीन, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, पर्याप्त नींद और नियमित प्रोग्रेस ट्रैकिंग पर जोर देती हैं
FitnessTips: फिट रहने के लिए रोजाना 10 हजार कदम चलना, घंटों जिम में पसीना बहाना या कई तरह के सप्लीमेंट लेना जरूरी नहीं है। 42 वर्षीय फिटनेस इंफ्लुएंसर ऐनी ने अपनी रोजमर्रा की फिटनेस रूटीन साझा करते हुए बताया है कि वह लंबे समय तक फिटनेस बनाए रखने के लिए किन आदतों को अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाती हैं। उनकी दिनचर्या में संतुलित डाइट, स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, पर्याप्त पोषण और शरीर की प्रोग्रेस पर नजर रखना शामिल है। ऐनी का कहना है कि फिटनेस को केवल वजन कम करने या ज्यादा एक्सरसाइज करने से जोड़कर नहीं देखना चाहिए। उनके अनुसार नियमितता, सही खान-पान और अपनी शारीरिक क्षमता के मुताबिक वर्कआउट करना लंबे समय में ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, उनकी व्यक्तिगत दिनचर्या हर व्यक्ति के लिए समान रूप से उपयुक्त हो, यह जरूरी नहीं है।
फिटनेस के लिए 10 हजार कदम ही जरूरी नहीं
सोशल मीडिया पर फिटनेस से जुड़ी चर्चाओं में रोजाना 10 हजार कदम चलने का लक्ष्य अक्सर सामने आता है। लेकिन ऐनी की रूटीन इससे अलग है। वह फिट रहने के लिए केवल स्टेप काउंट पर निर्भर नहीं करतीं। उनका ज्यादा ध्यान स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, संतुलित पोषण और अपनी शारीरिक प्रगति को समझने पर रहता है। इससे यह बात सामने आती है कि फिटनेस के लिए कोई एक तय फॉर्मूला नहीं होता। किसी व्यक्ति के लिए पैदल चलना उपयोगी हो सकता है, जबकि किसी दूसरे व्यक्ति की जरूरतों के अनुसार स्ट्रेंथ ट्रेनिंग, साइकिलिंग या अन्य गतिविधियां बेहतर विकल्प हो सकती हैं।
1. रात में करीब 12 घंटे का फास्टिंग गैप
ऐनी अपनी डाइट में रात के खाने और अगले दिन के नाश्ते के बीच करीब 12 घंटे का अंतर रखने की बात कहती हैं। इसे सामान्य तौर पर ओवरनाइट फास्टिंग कहा जा सकता है। उनके अनुसार यह उनकी खाने की दिनचर्या को व्यवस्थित रखने में मदद करता है। हालांकि, फास्टिंग का प्रभाव व्यक्ति की उम्र, स्वास्थ्य, दवाओं, दिनचर्या और अन्य परिस्थितियों पर निर्भर कर सकता है। इसलिए इसे हर व्यक्ति के लिए जरूरी फिटनेस नियम नहीं माना जाना चाहिए। खासकर गर्भावस्था, कुछ स्वास्थ्य स्थितियों या विशेष पोषण संबंधी जरूरतों वाले लोगों को फास्टिंग शुरू करने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना बेहतर होता है।
2. सुबह वाइब्रेशन प्लेट और रेड लाइट थेरेपी
ऐनी अपनी सुबह की दिनचर्या में लगभग 15 मिनट वाइब्रेशन प्लेट का इस्तेमाल करने की बात बताती हैं। इसके अलावा वह चेहरे के लिए रेड लाइट थेरेपी का भी उपयोग करती हैं।
उनका मानना है कि ये गतिविधियां ब्लड फ्लो और मांसपेशियों से जुड़ी कुछ परेशानियों में मदद कर सकती हैं। हालांकि, इन तकनीकों को लेकर वैज्ञानिक प्रमाण अलग-अलग स्तर के हैं और इन्हें फिट रहने के लिए अनिवार्य गतिविधि नहीं माना जा सकता।
फिटनेस रूटीन में इन्हें शामिल करना व्यक्ति की पसंद और जरूरत पर निर्भर करता है।
3. दिन की शुरुआत नींबू पानी से
ऐनी सुबह उठने के बाद लगभग 500 से 600 मिलीलीटर गुनगुना नींबू पानी पीती हैं। नींबू पानी का सबसे सीधा फायदा शरीर में तरल पदार्थ पहुंचाना है।
नींबू से स्वाद के साथ विटामिन C भी मिलता है, लेकिन इसे किसी चमत्कारी डिटॉक्स ड्रिंक के रूप में देखना जरूरी नहीं है। शरीर की सामान्य डिटॉक्स प्रक्रिया मुख्य रूप से प्राकृतिक रूप से काम करने वाले अंगों पर निर्भर करती है।
इसलिए नींबू पानी को स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा बनाया जा सकता है, लेकिन इसे फिटनेस या वजन घटाने का अकेला उपाय नहीं माना जाना चाहिए।
4. प्रोटीन और फाइबर को प्राथमिकता
ऐनी अपनी डाइट में प्रोटीन और फाइबर पर विशेष ध्यान देती हैं। उन्होंने रोज करीब 135 ग्राम प्रोटीन और कम से कम 35 ग्राम फाइबर लेने की बात साझा की है।
वह खाने का रिकॉर्ड रखने के लिए मोबाइल ऐप का भी इस्तेमाल करती हैं। इससे उन्हें अपने भोजन और पोषण की निगरानी करने में मदद मिलती है।
हालांकि, 135 ग्राम प्रोटीन हर व्यक्ति के लिए जरूरी मात्रा नहीं है। प्रोटीन की जरूरत शरीर के वजन, उम्र, शारीरिक गतिविधि और व्यक्तिगत लक्ष्यों के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
दालें, अंडे, दूध और डेयरी उत्पाद, मछली, मांस, सोया, बीन्स और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ प्रोटीन के अलग-अलग स्रोत हो सकते हैं।

5. सप्ताह में चार दिन वेट ट्रेनिंग
ऐनी की फिटनेस रूटीन में स्ट्रेंथ ट्रेनिंग को महत्वपूर्ण स्थान मिला हुआ है। वह सप्ताह में करीब चार दिन वेट ट्रेनिंग करती हैं।
उनका जोर धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ाने पर रहता है। फिटनेस में इसे प्रोग्रेसिव ओवरलोड के सिद्धांत से जोड़ा जा सकता है, जिसमें व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार समय के साथ वर्कआउट की चुनौती बढ़ाता है।
स्ट्रेंथ ट्रेनिंग केवल मांसपेशियां बनाने के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं मानी जाती, बल्कि नियमित शारीरिक गतिविधि के व्यापक स्वास्थ्य लाभों का हिस्सा हो सकती है। हालांकि, सही तकनीक सीखना और अपनी क्षमता के अनुसार वजन चुनना महत्वपूर्ण है।
6. कम शुगर और प्रोसेस्ड फूड से दूरी
ऐनी अपनी डाइट में अतिरिक्त चीनी और अत्यधिक प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को सीमित रखने की कोशिश करती हैं। उनकी प्राथमिकता होल फूड्स यानी अपेक्षाकृत कम प्रोसेस्ड और पोषक खाद्य पदार्थों पर रहती है।
फल, सब्जियां, दालें, साबुत अनाज, अंडे और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ संतुलित आहार का हिस्सा हो सकते हैं।
ऐनी ग्लूटेन का सेवन भी सीमित रखने की बात करती हैं, लेकिन ग्लूटेन कम करना हर व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं है। किसी विशेष मेडिकल कारण के बिना किसी पूरे खाद्य समूह को डाइट से हटाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना उचित है।
7. फिट रहने का मतलब कम खाना नहीं
ऐनी की रूटीन की एक खास बात यह है कि वह बहुत कम कैलोरी लेने के बजाय अपने कुल कैलोरी और मैक्रोन्यूट्रिएंट्स पर नजर रखती हैं। उन्होंने रोजाना 2,000 से ज्यादा कैलोरी लेने की बात बताई है।
इससे यह समझा जा सकता है कि फिटनेस का मतलब हमेशा कम खाना या कैलोरी को बहुत ज्यादा घटाना नहीं होता। शरीर को रोजमर्रा की गतिविधियों और एक्सरसाइज के लिए पर्याप्त ऊर्जा और पोषण की जरूरत होती है।
हालांकि, कैलोरी की सही जरूरत हर व्यक्ति में अलग होती है। इसे शरीर के आकार, उम्र, गतिविधि और फिटनेस लक्ष्य के आधार पर तय किया जाना चाहिए।
8. डाइजेस्टिव एंजाइम्स और बिटर्स का इस्तेमाल
ऐनी ने खाने के साथ डाइजेस्टिव एंजाइम्स और बिटर्स लेने की आदत का भी जिक्र किया है। उनका मानना है कि इससे पाचन में मदद मिल सकती है और ब्लोटिंग कम हो सकती है।
लेकिन डाइजेस्टिव एंजाइम्स या ऐसे अन्य उत्पाद हर स्वस्थ व्यक्ति के लिए जरूरी नहीं होते। किसी सप्लीमेंट या पाचन संबंधी प्रोडक्ट का नियमित इस्तेमाल करने से पहले उसकी जरूरत और संभावित प्रभाव को समझना जरूरी है।
यदि किसी व्यक्ति को लगातार पेट फूलने, अपच या पाचन से जुड़ी समस्या रहती है, तो केवल सप्लीमेंट पर निर्भर रहने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लेना बेहतर विकल्प हो सकता है।
9. शरीर की प्रोग्रेस को ट्रैक करना
ऐनी अपनी फिटनेस प्रोग्रेस को भी नियमित रूप से ट्रैक करती हैं। इसके लिए वह घर में इस्तेमाल होने वाली बॉडी कंपोजिशन मशीन का उपयोग करती हैं।
ऐसी मशीनें वजन के अलावा शरीर में फैट और मसल्स से जुड़े अनुमानित आंकड़े दिखा सकती हैं। हालांकि, घरेलू बॉडी कंपोजिशन डिवाइस से मिलने वाले आंकड़ों की सटीकता अलग-अलग हो सकती है।
इसलिए केवल एक संख्या देखकर फिटनेस का आकलन करना सही नहीं होगा। कपड़ों की फिटिंग, ताकत, ऊर्जा, वर्कआउट प्रदर्शन और नियमितता जैसे दूसरे संकेतक भी प्रगति को समझने में मदद कर सकते हैं।
फिटनेस में सबसे जरूरी है निरंतरता
ऐनी की फिटनेस रूटीन से सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आती है कि फिट रहने का कोई एक सार्वभौमिक फॉर्मूला नहीं है। किसी व्यक्ति के लिए रोजाना ज्यादा चलना सुविधाजनक हो सकता है, जबकि किसी दूसरे के लिए स्ट्रेंथ ट्रेनिंग और संतुलित डाइट ज्यादा महत्वपूर्ण हो सकती है।
फिटनेस को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए ऐसी आदतें चुनना ज्यादा उपयोगी हो सकता है जिन्हें व्यक्ति लगातार अपनी जिंदगी में शामिल कर सके। नियमित शारीरिक गतिविधि, संतुलित भोजन, पर्याप्त नींद और व्यक्तिगत जरूरत के मुताबिक वर्कआउट स्वस्थ जीवनशैली के महत्वपूर्ण हिस्से हैं।
सोशल मीडिया पर किसी फिटनेस इंफ्लुएंसर की रूटीन देखकर उसे हूबहू अपनाने के बजाय अपनी उम्र, शारीरिक क्षमता, स्वास्थ्य और लक्ष्य को ध्यान में रखना चाहिए। खासकर फास्टिंग, सप्लीमेंट्स, डाइजेस्टिव एंजाइम्स या किसी विशेष डाइट को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह लेना सुरक्षित तरीका है। आखिरकार फिटनेस का लक्ष्य केवल शरीर का वजन या दिखावट बदलना नहीं, बल्कि ऐसी जीवनशैली विकसित करना है जिसे लंबे समय तक स्वस्थ और संतुलित तरीके से जारी रखा जा सके।













