अजमेर शरीफ में ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के सालाना उर्स के दौरान 21 दिसंबर 2025 को जन्नती दरवाजा जायरीनों के लिए खोला जाएगा। यह दरवाजा साल में केवल चार बार खुलता है और इसे पार करने वाले जायरीन को जन्नत नसीब होने की मान्यता है। साल 2025 में यह 814वां उर्स मनाया जा रहा है।
Ajmer Dargah: अजमेर शरीफ में ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के सालाना उर्स के अवसर पर 21 दिसंबर 2025 को जन्नती दरवाजा जायरीनों के लिए खोला जाएगा। यह दरवाजा साल में सिर्फ चार बार खुलता है और पार करने वाले भक्तों को जन्नत मिलने की मान्यता है। उर्स छह दिनों तक चलेगा और इस दौरान जायरीन मन्नत मांग सकते हैं, जिससे धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक आशीर्वाद की अनुभूति होती है।
जन्नती दरवाजा खोला जाएगा 21 दिसंबर को
अजमेर शरीफ में ख्वाजा मोइनुद्दीन हसन चिश्ती के सालाना उर्स का आयोजन शुरू हो गया है। इस अवसर पर 21 दिसंबर 2025 को जन्नती दरवाजा जायरीनों के लिए खोला जाएगा। यह दरवाजा पूरे साल में सिर्फ चार मौकों पर खुलता है, और इसे पार करने वाले जायरीन को जन्नत नसीब होने की मान्यता है। साल 2025 में यह 814वां उर्स मनाया जा रहा है।

साल में सिर्फ चार अवसर
जायरीनों के लिए जन्नती दरवाजा केवल चार बार खुलता है। पहला मौका सालाना उर्स के दौरान होता है, जो छह दिनों तक चलता है। इसके अलावा ईद-उल-फितर (एक दिन), ईद-उल-अजहा या बकरीद (एक दिन) और ख्वाजा साहब के पीर हजरत हारूनी के सलाना उर्स (एक दिन) पर भी यह दरवाजा खुलता है। अन्य समय में यह दरवाजा बंद रहता है।
यदि कोई जायरीन किसी कारणवश इन दिनों में दरवाजा पार नहीं कर पाते, तो वे अपनी मन्नत को धागे या चिट्ठी के रूप में पेश कर सकते हैं। पूरी होने के बाद इसे दरगाह में जाकर खोला जाता है। यह परंपरा भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुभव का प्रतीक है।
उर्स और जायरीनों के लिए धार्मिक महत्व
ख्वाजा गरीब नवाज की मजार पर उर्स का आयोजन इस्लामिक कैलेंडर के रजब महीने के अनुसार होता है। इस दौरान जायरीन मन्नत मांगते हैं और उनके लिए जन्नती दरवाजा पार करना विशेष महत्व रखता है। यह अवसर भक्तों के लिए आध्यात्मिक आशीर्वाद और आस्था को बढ़ाने वाला होता है।








