अलीगंज अग्निकांड में विद्युत सुरक्षा विभाग पर उठे सवाल, अब तक नहीं हुई कार्रवाई

अलीगंज अग्निकांड के बाद विद्युत सुरक्षा निदेशालय की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। वर्षों से एनओसी नवीनीकरण न होने के बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई।

लखनऊ के अलीगंज अग्निकांड के बाद विद्युत सुरक्षा निदेशालय की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। भवन की एनओसी का वर्षों तक नवीनीकरण नहीं होने के बावजूद अब तक विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है, जबकि लेवाना होटल अग्निकांड में अधिकारियों पर कार्रवाई हुई थी।

लखनऊ: अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद विभिन्न विभागों की जिम्मेदारी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। खासकर विद्युत सुरक्षा निदेशालय की भूमिका चर्चा में है, क्योंकि जिस भवन में हादसा हुआ उसकी विद्युत सुरक्षा संबंधी एनओसी का वर्षों से नवीनीकरण नहीं हुआ था। इसके बावजूद अब तक किसी अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई न होने पर कई सवाल खड़े हो रहे हैं।

लेवाना अग्निकांड और अलीगंज मामले की तुलना

वर्ष 2022 में हुए लेवाना होटल अग्निकांड के बाद विद्युत सुरक्षा विभाग के अधिकारियों पर कार्रवाई की गई थी। उस मामले में एनओसी के नवीनीकरण से जुड़ी अनियमितताओं को गंभीर मानते हुए संबंधित अधिकारी को निलंबित किया गया था।

अब अलीगंज अग्निकांड के बाद भी समान प्रकार के सवाल उठ रहे हैं। चर्चा इस बात को लेकर है कि यदि किसी भवन की विद्युत सुरक्षा मंजूरी समय पर नवीनीकृत नहीं हुई थी, तो उसकी निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी किसकी थी।

वर्षों से नहीं हुआ एनओसी का नवीनीकरण

जानकारी के अनुसार संबंधित भवन को वर्ष 2016 में विद्युत सुरक्षा संबंधी अनुमति प्रदान की गई थी। नियमों के मुताबिक निर्धारित अवधि के बाद इसका नवीनीकरण होना आवश्यक था। हालांकि बताया जा रहा है कि इसके बाद नवीनीकरण की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई।

इस दौरान विभाग में अलग-अलग अधिकारियों की तैनाती रही। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या भवन स्वामी को नवीनीकरण के लिए कोई नोटिस या पत्र भेजा गया था और यदि भेजा गया तो उसके बाद क्या कार्रवाई की गई।

जांच में शॉर्ट सर्किट की आशंका

अग्निकांड की प्रारंभिक जांच में शॉर्ट सर्किट की संभावना की चर्चा सामने आई है। हालांकि अंतिम निष्कर्ष विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद ही स्पष्ट होगा।

विशेषज्ञों का मानना है कि विद्युत सुरक्षा मानकों का नियमित निरीक्षण और समय-समय पर प्रमाणन कई संभावित दुर्घटनाओं को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसी वजह से अब विभागीय निगरानी व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है।

जवाबदेही तय करने की मांग

हादसे में 15 लोगों की मौत के बाद विभिन्न स्तरों पर जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है। लोगों का कहना है कि यदि सुरक्षा मानकों का समय रहते पालन सुनिश्चित किया गया होता तो शायद ऐसी बड़ी त्रासदी से बचा जा सकता था।

प्रशासनिक और तकनीकी स्तर पर यह भी जांच की जा रही है कि संबंधित भवन में सुरक्षा मानकों का पालन किस हद तक किया गया था और किन स्तरों पर चूक हुई।

शासन के अगले कदम पर नजर

अलीगंज अग्निकांड के बाद अब सभी की निगाहें शासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यह देखा जाएगा कि जांच रिपोर्ट के आधार पर किन अधिकारियों और संबंधित पक्षों की जिम्मेदारी तय की जाती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की घटनाओं के बाद केवल अवैध निर्माण ही नहीं, बल्कि सुरक्षा प्रमाणन और निरीक्षण व्यवस्था की भी व्यापक समीक्षा आवश्यक है। इससे भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं को रोकने में मदद मिल सकती है।

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