अरुणाचल प्रदेश के निरजुली में पुलिस ने नशा तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए 22.6 ग्राम संदिग्ध हेरोइन बरामद की है। मामले में असम के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस अब ड्रग्स के स्रोत और नेटवर्क की जांच कर रही है।
ईटानगर: पूर्वोत्तर भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत अरुणाचल प्रदेश पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। राजधानी क्षेत्र ईटानगर (ICR) में मादक पदार्थों की संभावित खेप पहुंचने से पहले ही पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 22.6 ग्राम संदिग्ध हेरोइन बरामद की है। इस मामले में असम के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जिन पर राज्य में नशीले पदार्थों की तस्करी करने का आरोप है।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई राजधानी क्षेत्र में बढ़ती मादक पदार्थों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने के उद्देश्य से की गई थी। बरामद किए गए नशीले पदार्थों की बाजार कीमत और इसके संभावित नेटवर्क को लेकर अब गहन जांच शुरू कर दी गई है।
खुफिया सूचना के आधार पर की गई कार्रवाई
पुलिस को पहले से सूचना मिली थी कि नशीले पदार्थों की एक खेप ईटानगर कैपिटल रीजन की ओर लाई जा रही है। सूचना को गंभीरता से लेते हुए निरजुली पुलिस ने विशेष निगरानी अभियान शुरू किया। जांच के दौरान लेखी गांव स्थित ट्रक टर्मिनल के पास एक संदिग्ध स्कूटर को रोककर उसकी तलाशी ली गई। पुलिस टीम ने वाहन की गतिविधियों पर संदेह होने के बाद दोनों सवारों से पूछताछ की और कानूनी प्रक्रिया के तहत उनकी जांच की। त
लाशी के दौरान पुलिस को उनके कब्जे से 22.6 ग्राम संदिग्ध हेरोइन और 17 प्लास्टिक की शीशियां मिलीं, जिनमें नारंगी रंग का पाउडर भरा हुआ था। प्रारंभिक जांच में इस पदार्थ को भी नशीला पदार्थ माना जा रहा है, हालांकि इसकी पुष्टि के लिए फोरेंसिक परीक्षण कराया जाएगा।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान
पुलिस ने जिन दो व्यक्तियों को गिरफ्तार किया है, उनकी पहचान 32 वर्षीय मुनमुन मोरंग और 30 वर्षीय बिक्रम डोले के रूप में हुई है। दोनों आरोपी असम राज्य के निवासी हैं।
मुनमुन मोरंग असम के लखीमपुर जिले का रहने वाला है, जबकि बिक्रम डोले का संबंध माजुली जिले से बताया गया है। पुलिस के अनुसार दोनों आरोपी स्कूटर के जरिए नशीले पदार्थों की खेप लेकर ईटानगर क्षेत्र की ओर जा रहे थे। प्रारंभिक पूछताछ में कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर पुलिस पूरे नेटवर्क तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
कानूनी प्रक्रिया के तहत हुई तलाशी
पुलिस अधिकारियों ने बताया कि पूरी कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए की गई। तलाशी अभियान एक कार्यपालक मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में संचालित किया गया ताकि जांच की पारदर्शिता और वैधता सुनिश्चित की जा सके।
राजधानी क्षेत्र के पुलिस अधीक्षक ने बताया कि बरामदगी और गिरफ्तारी के बाद संबंधित दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी की गई और आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। मामले में नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस (NDPS) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज
निरजुली पुलिस स्टेशन में आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट की धारा 21(बी) के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया है। यह धारा अवैध रूप से मादक पदार्थ रखने, परिवहन करने और तस्करी से संबंधित अपराधों पर लागू होती है।
भारत में एनडीपीएस कानून को मादक पदार्थों की तस्करी और अवैध कारोबार के खिलाफ सबसे सख्त कानूनों में गिना जाता है। दोषी पाए जाने पर आरोपियों को लंबी जेल सजा और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। पुलिस अब आरोपियों के आपराधिक रिकॉर्ड और उनके संभावित संपर्कों की भी जांच कर रही है।
अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क की आशंका
जांच एजेंसियों का मानना है कि यह मामला केवल दो व्यक्तियों तक सीमित नहीं हो सकता। पुलिस इस संभावना की जांच कर रही है कि आरोपी किसी बड़े अंतरराज्यीय ड्रग तस्करी नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं।
पूर्वोत्तर भारत लंबे समय से मादक पदार्थों की तस्करी के लिए संवेदनशील क्षेत्र माना जाता रहा है। कई बार तस्कर विभिन्न राज्यों के बीच छोटे वाहनों और स्थानीय मार्गों का इस्तेमाल करके नशीले पदार्थों की आपूर्ति करते हैं। इसी वजह से पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद हेरोइन की खेप कहां से लाई गई थी और इसे किसे पहुंचाया जाना था।
संभावित खरीदारों की तलाश जारी
जांच का एक महत्वपूर्ण पहलू उन लोगों की पहचान करना है, जिन तक यह खेप पहुंचाई जानी थी। पुलिस राजधानी क्षेत्र में संभावित खरीदारों और स्थानीय संपर्कों की जानकारी जुटा रही है।
अधिकारियों का मानना है कि यदि इस नेटवर्क की पूरी श्रृंखला का खुलासा हो जाता है, तो इससे क्षेत्र में सक्रिय कई अन्य तस्करों तक पहुंचा जा सकता है।डिजिटल और तकनीकी साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है, जिसमें मोबाइल फोन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य संचार माध्यम शामिल हैं।
पूर्वोत्तर भारत में बढ़ती चुनौती
विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वोत्तर भारत में नशीले पदार्थों की तस्करी कानून-व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सीमावर्ती क्षेत्रों और अंतरराज्यीय मार्गों का दुरुपयोग कर तस्कर युवाओं तक मादक पदार्थ पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
इसी कारण विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियां संयुक्त रूप से ऐसे नेटवर्क के खिलाफ अभियान चला रही हैं। हाल के वर्षों में कई बड़े ऑपरेशन के जरिए करोड़ों रुपये मूल्य के मादक पदार्थ जब्त किए गए हैं। निरजुली पुलिस की यह कार्रवाई भी उसी व्यापक अभियान का हिस्सा मानी जा रही है।













