अलीगढ़ में नशे के कारोबार के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई से पहले ही तस्करों तक छापेमारी की जानकारी पहुंचने का मामला सामने आया है। आरोप है कि पुलिस विभाग के ही कुछ कर्मचारियों ने नशा तस्करों को कार्रवाई की सूचना दे दी, जिससे क्षेत्राधिकारी (CO) इगलास की ओर से तैयार की गई कार्रवाई की योजना धरी की धरी रह गई। मामला सामने आने के बाद पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया और वरिष्ठ अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लेते हुए आठ पुलिसकर्मियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की है।
बताया जा रहा है कि अलीगढ़ जिले में नशा तस्करों और उनके नेटवर्क पर शिकंजा कसने के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। इसी क्रम में इगलास क्षेत्राधिकारी की ओर से तस्करों के खिलाफ एक विशेष कार्रवाई की योजना तैयार की गई थी। कोशिश थी कि पुलिस की टीम अचानक दबिश देकर नशे के कारोबार से जुड़े लोगों को पकड़ सके और उनके नेटवर्क के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी जुटाई जा सके। कार्रवाई की गोपनीयता को बेहद महत्वपूर्ण माना गया था, क्योंकि नशा तस्करों को पुलिस की भनक लगने पर उनके फरार होने की आशंका रहती है।
लेकिन कार्रवाई से पहले ही पुलिस विभाग से जुड़ी जानकारी कथित तौर पर तस्करों तक पहुंच गई। पुलिस को जब इस बात की जानकारी हुई कि छापेमारी की योजना लीक हो गई है तो पूरे मामले की जांच शुरू की गई। जांच के दौरान पुलिसकर्मियों की भूमिका भी सवालों के घेरे में आई। अधिकारियों ने यह पता लगाने का प्रयास किया कि गोपनीय कार्रवाई की जानकारी किन लोगों तक पहुंची और पुलिस विभाग के भीतर से इसे तस्करों तक पहुंचाने में किसकी भूमिका रही।
मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ अधिकारियों ने संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की। कुल आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। इस कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। विभागीय स्तर पर यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि अपराधियों या नशा तस्करों से किसी भी तरह की मिलीभगत और पुलिस की गोपनीय कार्रवाई की जानकारी लीक करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
अलीगढ़ पुलिस पिछले कुछ समय से नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। जिले में गांजा समेत अन्य मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क पर कार्रवाई की गई है। इससे पहले भी पुलिस ने गांजा तस्करी के मामलों में बड़ी मात्रा में नशीला पदार्थ बरामद किया है। फरवरी 2026 में अलीगढ़ पुलिस ने करीब 500 किलो गांजा बरामद किया था, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 2.5 करोड़ रुपये बताई गई थी। इस मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया था, जबकि अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही थी।
नशा तस्करी से जुड़े मामलों में पुलिस की रणनीति सिर्फ आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है, बल्कि अवैध कमाई से बनाई गई संपत्तियों पर भी कार्रवाई की जा रही है। अप्रैल 2026 में अलीगढ़ पुलिस ने गैंगस्टर एक्ट के तहत एक गांजा तस्करी गिरोह के सरगना की करीब 3.33 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी। पुलिस के मुताबिक आरोपी ने तस्करी से अर्जित धन से होटल, जमीन और अन्य संपत्तियां बनाई थीं।
ऐसे में नशा तस्करों के खिलाफ तैयार की जाने वाली पुलिस की गोपनीय योजनाओं का लीक होना अधिकारियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। किसी भी छापेमारी या गिरफ्तारी की सूचना पहले से तस्करों तक पहुंच जाने पर आरोपी पुलिस टीम के पहुंचने से पहले ही अपना ठिकाना बदल सकते हैं, नशीले पदार्थों को दूसरी जगह भेज सकते हैं या अपने साथियों को सतर्क कर सकते हैं। इससे न केवल पुलिस की कार्रवाई प्रभावित होती है, बल्कि पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश भी कमजोर पड़ सकती है।
इसी वजह से इस मामले में पुलिसकर्मियों की भूमिका की जांच को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आठ पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद विभागीय स्तर पर आगे की जांच भी की जा सकती है। जांच में यदि आरोपों की पुष्टि होती है तो संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई के साथ अन्य कानूनी कदम भी उठाए जा सकते हैं।
अलीगढ़ के एसएसपी नीरज कुमार जादौन पहले भी पुलिस विभाग में अनुशासन और भ्रष्टाचार को लेकर सख्त रुख अपनाते रहे हैं। जून 2026 में भी उन्होंने अनुशासनहीनता, भ्रष्टाचार, संदिग्ध गतिविधियों और कर्तव्य में लापरवाही के मामलों में सात उपनिरीक्षकों और एक आरक्षी चालक समेत आठ पुलिसकर्मियों को निलंबित किया था। उस समय भी विभागीय जांच शुरू की गई थी।
पुलिस अधिकारियों का स्पष्ट रुख रहा है कि पुलिसकर्मी पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ अपनी जिम्मेदारी निभाएं। अपराधियों से मिलीभगत, भ्रष्टाचार या ड्यूटी में गंभीर लापरवाही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में ताजा मामला भी विभाग की आंतरिक निगरानी और पुलिसकर्मियों की जवाबदेही के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
फिलहाल आठ पुलिसकर्मियों के निलंबन के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि नशा तस्करों तक पुलिस की गोपनीय कार्रवाई की जानकारी किस स्तर से पहुंची और इसके पीछे वास्तविक भूमिका किसकी थी। जांच आगे बढ़ने के साथ इस मामले में और भी तथ्य सामने आ सकते हैं। पुलिस के सामने अब एक तरफ नशा तस्करों के नेटवर्क पर कार्रवाई जारी रखने की चुनौती है, वहीं दूसरी तरफ विभाग के भीतर से गोपनीय सूचनाओं के लीक होने की स्थिति को रोकना भी अहम है।
अलीगढ़ में नशे के अवैध कारोबार के खिलाफ चल रहे अभियान के बीच यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि पुलिस की कार्रवाई को सफल बनाने के लिए गोपनीयता सबसे अहम होती है। यदि कार्रवाई से पहले ही तस्करों को सूचना मिल जाए तो पूरी रणनीति विफल हो सकती है। यही वजह है कि अधिकारियों ने मामले को गंभीर मानते हुए आठ पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की है। अब विभागीय जांच से यह स्पष्ट होगा कि सूचना लीक होने की पूरी कड़ी क्या थी और इसमें शामिल पुलिसकर्मियों की वास्तविक भूमिका कितनी थी









