प्रयागराज में जलभराव पर इलाहाबाद हाई कोर्ट सख्त, 48 घंटे में पानी निकालने का दिया निर्देश

प्रयागराज में जलभराव पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्ती दिखाई। नगर निगम और प्रशासन को 24 से 48 घंटे में पानी निकालने और स्थायी समाधान की योजना बताने का निर्देशदिया।

प्रयागराज में भारी जलभराव को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने नगर निगम और जिला प्रशासन को सख्त निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने शहर से जलभराव खत्म करने के लिए 24 से 48 घंटे की समयसीमा तय की है।

प्रयागराज: शहर में जलभराव की गंभीर स्थिति पर इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। बुधवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने नगर आयुक्त और जिलाधिकारी को जलभराव दूर करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने दारागंज मोरी गेट से जल निकासी की अनुमति देते हुए 24 से 48 घंटे के भीतर शहर में जलभराव की स्थिति खत्म करने को कहा।

जलभराव को लेकर हाई कोर्ट ने मांगा जवाब

प्रयागराज में बारिश के बाद कई इलाकों में बने जलभराव को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई हुई। बुधवार को जिलाधिकारी और नगर निगम आयुक्त ने शहर की स्थिति और जल निकासी की व्यवस्था को लेकर कोर्ट के सामने अपना पक्ष रखा।

न्यायमूर्ति अजित कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने दारागंज मोरी गेट से पानी की निकासी की अनुमति देते हुए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि 24 से 48 घंटे के भीतर शहर में जलभराव की स्थिति समाप्त कराई जानी चाहिए।

नगर आयुक्त को योजना का हलफनामा दाखिल करने का निर्देश

हाई कोर्ट ने नगर आयुक्त से जलभराव की समस्या से निपटने के लिए तैयार की गई योजना का हलफनामा दाखिल करने को कहा है। नगर आयुक्त ने सुनवाई के दौरान बताया कि जलभराव से निपटने के लिए पूरी योजना तैयार है और इसका हलफनामा अगले दिन दाखिल किया जाएगा।

अपर महाधिवक्ता मनीष गोयल ने कोर्ट को बताया कि सचिव, उत्तर प्रदेश शहरी विकास विभाग की ओर से भी गुरुवार को हलफनामा पेश किया जाएगा। कोर्ट ने प्रदेश सरकार के स्थानीय निकाय निदेशक से भी जवाब मांगा है।

स्थानीय निकाय निदेशक को हलफनामे में यह बताने का निर्देश दिया गया है कि बारिश के पानी से शहर को राहत दिलाने के लिए सरकार की ओर से क्या योजनाएं तैयार की गई हैं और जल निकासी की समस्या के स्थायी समाधान के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

कई इलाकों में घरों में घुसा सीवर का पानी

प्रयागराज में जलभराव की गंभीर स्थिति का मुद्दा मंगलवार को भी हाई कोर्ट के सामने उठा था। न्यायमूर्ति सिद्धार्थनंदन की एकलपीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता प्रभाकर अवस्थी और अमरेंद्र नाथ सिंह ने शहर के हालात की जानकारी दी थी।

कोर्ट को बताया गया कि जार्ज टाउन, टैगोर टाउन, अल्लापुर, अलोपीबाग, बैरहना, रामबाग और प्रीतम नगर समेत कई इलाके जलमग्न हैं। जलभराव के कारण कई अधिवक्ता और उनके क्लर्क अदालत तक नहीं पहुंच सके। इससे सूचीबद्ध मामलों से संबंधित फाइलें भी समय पर कोर्ट में नहीं पहुंच पाईं।

सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि करीब 3,000 से 4,000 घरों में सिर्फ बारिश का पानी ही नहीं, बल्कि सीवर का पानी भी घुस रहा है। इससे लोगों को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जल निकासी की स्थायी व्यवस्था पर भी सवाल

मामले की सुनवाई के दौरान एमजी मार्ग स्थित ग्रीन बेल्ट में कैचमेंट एरिया विकसित करने के प्रस्ताव का भी उल्लेख किया गया। बताया गया कि इस संबंध में प्रस्ताव प्रमुख सचिव, नगर विकास विभाग को भेजा गया था।

विभागीय मंजूरी के बाद यह प्रस्ताव मुख्य सचिव के पास लंबित बताया गया। कोर्ट ने शहर को बारिश के पानी से राहत देने के लिए स्थायी व्यवस्था और भविष्य में जलभराव रोकने की योजनाओं पर भी जानकारी मांगी है।

नगर आयुक्त को गुरुवार को कोर्ट में उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है, जबकि जिलाधिकारी को फिलहाल व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी गई है। जलभराव से संबंधित दोनों जनहित याचिकाओं को एक साथ जोड़कर अब इसी खंडपीठ के समक्ष सुनवाई की जा रही है।

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