यासिर फहद की भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी, चुनाव तारीख और चीफ इलेक्शन कमिश्नर की नियुक्ति पर अड़े

AMU में छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर यासिर फहद की भूख हड़ताल तीसरे दिन जारी है। छात्र चुनाव तारीख और चीफ इलेक्शन कमिश्नर की नियुक्ति की मांग कर रहे हैं।
यासिर फहद की भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी, चुनाव तारीख और चीफ इलेक्शन कमिश्नर की नियुक्ति पर अड़े
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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन जारी है। छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित करने और चुनाव प्रक्रिया के लिए चीफ इलेक्शन कमिश्नर की नियुक्ति की मांग को लेकर एमए उर्दू के छात्र यासिर फहद की अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी है। यासिर फहद को हाल ही में विश्वविद्यालय प्रशासन ने निलंबित किया था। इसके बाद उन्होंने छात्रसंघ चुनाव की मांग को लेकर डक प्वाइंट पर भूख हड़ताल शुरू की।

रिपोर्टों के अनुसार, यासिर फहद ने विश्वविद्यालय प्रशासन को पहले ज्ञापन देकर छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित करने की मांग की थी। उनका कहना है कि ज्ञापन देने के बाद प्रशासन को 48 घंटे का समय दिया गया था और तय समय में चुनाव की तारीख घोषित नहीं होने पर उन्होंने भूख हड़ताल शुरू करने का निर्णय लिया। उनका कहना है कि जब तक चुनाव की तारीख घोषित नहीं होती और चुनाव प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए चीफ इलेक्शन कमिश्नर की नियुक्ति नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा।

भूख हड़ताल शुरू होने के बाद विश्वविद्यालय परिसर में छात्रसंघ चुनाव को लेकर गतिविधियां तेज हो गई हैं। सोमवार को यासिर फहद के समर्थन में छात्र डक प्वाइंट पर जुटे। उन्हें धरने से हटाने के दौरान छात्रों और प्रॉक्टोरियल टीम के बीच करीब एक घंटे तक धक्का-मुक्की होने की बात सामने आई। मामले की सूचना मिलने पर पुलिस भी मौके पर पहुंची थी। इसके बाद भी छात्र वहां जुटे रहे और चुनाव कराने की मांग करते रहे।

यासिर फहद ने प्रॉक्टोरियल टीम पर कार्रवाई के दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की और मारपीट करने के आरोप लगाए हैं। उन्होंने दावा किया कि उन्हें धरने से हटाने के दौरान घसीटा गया और उनके साथ बदसलूकी की गई। ये आरोप छात्र की ओर से लगाए गए हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी ओर, विश्वविद्यालय प्रशासन ने यासिर के निलंबन को 14 सितंबर को हुए प्रदर्शन में उनकी कथित भूमिका और प्रशासन के सामने अपना पक्ष रखने के लिए बुलाए जाने के बावजूद उपस्थित नहीं होने से जोड़ा है।

AMU के प्रॉक्टर प्रो. नावेद खान के अनुसार, यासिर फहद को अपना पक्ष रखने के लिए पहले 15 सितंबर को बुलाया गया था। इसके बाद 19 और 20 सितंबर को भी उनसे संपर्क करने और अपना पक्ष रखने को कहा गया। प्रशासन का कहना है कि इन प्रक्रियाओं के बावजूद छात्र की ओर से अपेक्षित रूप से उपस्थित न होने के बाद निलंबन की कार्रवाई की गई। इस मुद्दे को लेकर छात्र पक्ष और विश्वविद्यालय प्रशासन के दावे अलग-अलग हैं।

यासिर फहद का आंदोलन केवल उनकी व्यक्तिगत निलंबन कार्रवाई तक सीमित नहीं है। वह छात्रसंघ चुनाव को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन से स्पष्ट कार्यक्रम की मांग कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि चुनाव की तारीख सार्वजनिक की जाए और चुनाव कराने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए आवश्यक जिम्मेदारियां तय की जाएं। आंदोलन में शामिल छात्र इसे विश्वविद्यालय में छात्र प्रतिनिधित्व से जुड़े मुद्दे के रूप में उठा रहे हैं।

मंगलवार को भी भूख हड़ताल जारी रही थी। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, यासिर फहद दूसरे दिन भी धरने पर बैठे रहे और उनके समर्थन में छात्र सलमान गौरी समेत अन्य छात्र भी सक्रिय रहे। छात्रों की ओर से यासिर का निलंबन वापस लेने की मांग भी उठाई गई। इस तरह आंदोलन में छात्रसंघ चुनाव के साथ-साथ निलंबन वापस लेने का मुद्दा भी जुड़ गया है।

AMU में छात्रसंघ चुनाव का विषय विश्वविद्यालय की आधिकारिक व्यवस्था से भी जुड़ा हुआ है। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर “AMU Students' Union (Conduct of Election) Amended Regulations 2019” से संबंधित जानकारी उपलब्ध है। विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर छात्रसंघ चुनाव से संबंधित अधिसूचनाओं और नियमों के दस्तावेज भी सूचीबद्ध हैं।

विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर वर्तमान AMU Students Union के पदाधिकारियों की जानकारी भी उपलब्ध है। वेबसाइट पर एम. सलमान इम्तियाज को अध्यक्ष, हमजा सुफियान को उपाध्यक्ष और हुजैफा आमिर को मानद सचिव के रूप में सूचीबद्ध किया गया है।

छात्रों की ओर से उठाई जा रही मुख्य मांग चुनाव की तारीख को लेकर है। उनका कहना है कि चुनाव प्रक्रिया के लिए स्पष्ट समय-सारणी सामने आनी चाहिए, जिससे छात्र अपने प्रतिनिधियों का चुनाव कर सकें। इसके साथ ही चीफ इलेक्शन कमिश्नर की नियुक्ति की मांग भी की जा रही है। छात्रों का तर्क है कि चुनाव की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए चुनाव संचालन से जुड़ी जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से तय किया जाना जरूरी है।

दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन के सामने यासिर फहद के निलंबन से संबंधित अनुशासनात्मक प्रक्रिया का मुद्दा है। प्रशासन ने उनके खिलाफ कार्रवाई को सितंबर में हुए प्रदर्शन से जोड़ा है। इसलिए फिलहाल परिसर में दो समानांतर मुद्दे दिखाई दे रहे हैं—एक तरफ छात्रसंघ चुनाव कराने की मांग और दूसरी तरफ निलंबित छात्र की प्रशासनिक कार्रवाई। दोनों मुद्दों को लेकर छात्र अपनी गतिविधियां जारी रखे हुए हैं।

सोमवार को हुए विवाद के दौरान प्रॉक्टोरियल टीम और छात्रों के बीच धक्का-मुक्की के बाद परिसर का माहौल तनावपूर्ण हो गया था। हालांकि पुलिस के पहुंचने के बाद स्थिति को संभाल लिया गया। छात्रों ने इसके बाद भी प्रदर्शन जारी रखा। रिपोर्टों के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी भी की गई।

भूख हड़ताल के तीसरे दिन तक छात्रसंघ चुनाव की तारीख घोषित नहीं हुई है और यासिर फहद अपनी मांगों पर कायम हैं। आंदोलन आगे कितना लंबा चलेगा और विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से चुनाव को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल छात्र चुनाव की तारीख और चीफ इलेक्शन कमिश्नर की नियुक्ति को लेकर प्रशासन से स्पष्ट कदम की मांग कर रहे हैं।

AMU परिसर में इस आंदोलन के बीच छात्रों और प्रशासन के बीच संवाद महत्वपूर्ण हो गया है। एक तरफ छात्र चुनाव प्रक्रिया को लेकर स्पष्टता चाहते हैं, वहीं दूसरी तरफ विश्वविद्यालय प्रशासन यासिर फहद के निलंबन से जुड़ी अनुशासनात्मक प्रक्रिया का हवाला दे रहा है। ऐसे में आगे की स्थिति विश्वविद्यालय प्रशासन के निर्णय और छात्रों की आंदोलन संबंधी रणनीति पर निर्भर करेगी। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बुधवार तक भूख हड़ताल तीसरे दिन भी जारी थी।

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