Newcastle University Professor of Practice: सस्टेनेबिलिटी में अनंत अंबानी को मिली नई अकादमिक जिम्मेदारी

Anant Ambani को Sustainability के क्षेत्र में Newcastle University में Professor of Practice की नई अकादमिक जिम्मेदारी मिली है। जानें इस भूमिका और उनसे जुड़ी

न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने अनंत अंबानी को सस्टेनेबिलिटी में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस नियुक्त किया है। यह नियुक्ति औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, ग्रीन एनर्जी और वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उनके काम को देखते हुए की गई है।

बिजनेस न्यूज़: न्यूकैसल यूनिवर्सिटी ने अनंत अंबानी को सस्टेनेबिलिटी के क्षेत्र में Professor of Practice नियुक्त किया है। यह अकादमिक भूमिका उनके औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, रिन्यूएबल एनर्जी और वन्यजीव संरक्षण से जुड़े कार्यों को देखते हुए दी गई है। इस नियुक्ति के साथ अनंत अंबानी के कॉरपोरेट और पर्यावरणीय अनुभव को उच्च शिक्षा और छात्रों के साथ साझा करने का अवसर मिलेगा।

Professor of Practice आम तौर पर ऐसा अकादमिक पद होता है, जिसमें किसी क्षेत्र के अनुभवी इंडस्ट्री लीडर या प्रोफेशनल को अपने व्यावहारिक अनुभव के आधार पर छात्रों और संस्थान के साथ जुड़ने का अवसर मिलता है। यह पारंपरिक प्रोफेसर पद से अलग है, क्योंकि इसमें मुख्य जोर इंडस्ट्री के वास्तविक अनुभव और विशेषज्ञता पर रहता है।

क्या होता है Professor of Practice पद?

Professor of Practice की भूमिका का उद्देश्य विश्वविद्यालयों में इंडस्ट्री और अकादमिक जगत के बीच संपर्क को मजबूत करना है। इस तरह के पदों पर नियुक्त लोगों से अपने पेशेवर अनुभव, प्रोजेक्ट मैनेजमेंट, नीति और नियामकीय प्रक्रियाओं, ESG यानी पर्यावरण, सामाजिक और गवर्नेंस से जुड़े मानकों तथा बड़े स्तर के ऑपरेशनल फैसलों की व्यावहारिक समझ साझा करने की अपेक्षा की जाती है।

इस पद के लिए पारंपरिक अकादमिक करियर जैसी PhD, बड़ी संख्या में रिसर्च पेपर या सामान्य टेन्योर ट्रैक की शर्तें जरूरी नहीं होतीं। दुनिया के कई प्रमुख विश्वविद्यालय इंडस्ट्री और अन्य क्षेत्रों से अनुभवी विशेषज्ञों को इस तरह की भूमिकाओं से जोड़ते रहे हैं। भारत में भी University Grants Commission (UGC) ने 2022 में Professor of Practice की व्यवस्था शुरू की थी। इसका उद्देश्य इंडस्ट्री के अनुभवी लोगों की विशेषज्ञता को उच्च शिक्षा से जोड़ना और छात्रों को वास्तविक दुनिया की चुनौतियों से परिचित कराना है।

2035 तक नेट जीरो का लक्ष्य

अनंत अंबानी की नई भूमिका को रिलायंस इंडस्ट्रीज की ऊर्जा परिवर्तन और सस्टेनेबिलिटी से जुड़ी पहलों के संदर्भ में देखा जा रहा है। वह कंपनी के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर के रूप में 2035 तक नेट कार्बन जीरो हासिल करने की दिशा में तैयार किए गए रोडमैप से जुड़े हैं। इस दिशा में गुजरात के जामनगर में विकसित किया जा रहा Dhirubhai Ambani Green Energy Giga Complex प्रमुख परियोजनाओं में शामिल है। करीब 5,000 एकड़ में विकसित किए जा रहे इस परिसर में अलग-अलग ग्रीन एनर्जी तकनीकों से जुड़ी गीगा-फैक्ट्रियां शामिल हैं।

इनमें सोलर फोटोवोल्टिक मैन्युफैक्चरिंग, ग्रीन हाइड्रोजन और इलेक्ट्रोलाइजर, एडवांस्ड बैटरी स्टोरेज और फ्यूल सेल सिस्टम जैसी तकनीकों पर काम किया जा रहा है। सोलर मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी पहल का लक्ष्य 2030 तक 100 GW सोलर पावर डिप्लॉयमेंट के लिए इकोसिस्टम तैयार करना है।

ग्रीन हाइड्रोजन और क्लीन एनर्जी पर फोकस

ग्रीन हाइड्रोजन को भविष्य की कम-कार्बन ऊर्जा व्यवस्था में महत्वपूर्ण तकनीक माना जाता है। जामनगर की परियोजना में इसके उत्पादन और उससे जुड़ी तकनीक विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। पहल का एक लक्ष्य ग्रीन हाइड्रोजन की लागत को 1 डॉलर प्रति किलोग्राम के बेंचमार्क तक लाना है। ऐसी परियोजनाओं का व्यापक उद्देश्य पारंपरिक जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने, क्लीन एनर्जी उत्पादन बढ़ाने और औद्योगिक क्षेत्रों के कार्बन उत्सर्जन को कम करने वाली तकनीकों को बड़े पैमाने पर विकसित करना है।

जामनगर में औद्योगिक वनीकरण

सस्टेनेबिलिटी से जुड़े प्रयासों में केवल ऊर्जा परियोजनाएं ही शामिल नहीं हैं। जामनगर में औद्योगिक वनीकरण के तहत 1 करोड़ से अधिक पेड़ लगाए जाने का भी उल्लेख किया गया है। यह पहल औद्योगिक गतिविधियों के साथ हरित क्षेत्र और जैव विविधता को बढ़ाने के प्रयासों का हिस्सा है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अनंत अंबानी से जुड़ी प्रमुख पहलों में Vantara भी शामिल है। जामनगर में स्थित यह वन्यजीव संरक्षण और रेस्क्यू केंद्र घायल, संकटग्रस्त और जरूरतमंद जंगली जानवरों के बचाव, उपचार और पुनर्वास पर काम करता है।

Vantara परिसर में हाथियों समेत विभिन्न प्रजातियों के लिए विशेष देखभाल और पुनर्वास सुविधाएं विकसित की गई हैं। यहां शेर, बाघ, तेंदुए, गैंडे और संकटग्रस्त सरीसृपों समेत बड़ी संख्या में वन्यजीवों के संरक्षण और उपचार से जुड़े कार्य किए जाते हैं।

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