आंध्र प्रदेश में मानसून की कमी और अल नीनो प्रभाव को देखते हुए सरकार ने किसानों के लिए व्यापक योजना तैयार की है। कृषि मंत्री ने फसल सुरक्षा, वैकल्पिक खेती, बीज उपलब्धता और जल संरक्षण पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए हैं।
अमरावती: आंध्र प्रदेश में इस साल दक्षिण-पश्चिम मानसून के दौरान बारिश की भारी कमी दर्ज की गई है। अल नीनो की संभावित परिस्थितियों और घटती वर्षा को देखते हुए राज्य सरकार ने किसानों और कृषि क्षेत्र को बचाने के लिए व्यापक कार्ययोजना तैयार की है। राज्य के कृषि मंत्री के अच्चन्नायडू ने अधिकारियों को फसल सुरक्षा, वैकल्पिक खेती, बीज उपलब्धता और जल संरक्षण से जुड़े उपायों को तेजी से लागू करने के निर्देश दिए हैं।
अमरावती में कृषि और संबद्ध विभागों के अधिकारियों के साथ आयोजित एक ऑनलाइन बैठक में मंत्री ने कहा कि सरकार मौसम की बदलती परिस्थितियों पर लगातार नजर रख रही है और किसानों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।
आंध्र प्रदेश में बारिश की कमी ने बढ़ाई चिंता
कृषि मंत्री के अनुसार, राज्य में इस मानसून सीजन में सामान्य से काफी कम बारिश हुई है। अब तक राज्य में सामान्य 225.7 मिलीमीटर बारिश की तुलना में केवल 104.5 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है। यह सामान्य बारिश से करीब 53.7 प्रतिशत कम है। राज्य के 28 जिलों में से 21 जिले बारिश की कमी से प्रभावित हैं। पश्चिम गोदावरी, अन्नमय्या, पूर्वी गोदावरी, विशाखापट्टनम, चित्तूर और प्रकाशम जिलों को गंभीर बारिश की कमी वाले क्षेत्रों में रखा गया है। वहीं केवल नेल्लोर जिले में सामान्य बारिश दर्ज की गई है। मंडल स्तर पर भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। राज्य के 249 मंडल गंभीर बारिश की कमी का सामना कर रहे हैं, जबकि 359 मंडल कम बारिश की श्रेणी में हैं।
कई जिलों में बुआई पिछड़ी, वैकल्पिक फसलों पर जोर
कम बारिश का असर खरीफ फसलों की बुआई पर भी दिखाई दे रहा है। 25 जुलाई तक राज्य के 12 जिलों में सामान्य क्षेत्रफल की तुलना में 50 प्रतिशत से भी कम बुआई हुई है। अन्नमय्या जिले में बुआई केवल 9 प्रतिशत, बापटला में 5 प्रतिशत, प्रकाशम में 15 प्रतिशत और मार्कापुरम क्षेत्र में 15 प्रतिशत तक रही। राज्य में खरीफ फसलों का सामान्य क्षेत्रफल करीब 30.84 लाख हेक्टेयर है, लेकिन अभी तक केवल 16.35 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में ही खेती हो सकी है। धान, सोयाबीन और कपास की बुआई अपेक्षाकृत बेहतर रही है, लेकिन मूंगफली, सूरजमुखी, ज्वार और हॉर्स ग्राम जैसी फसलों की खेती काफी पीछे चल रही है। सरकार ने किसानों को कम पानी वाली और मौसम के अनुकूल वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ने की सलाह दी है।
24 घंटे चलेगा एल नीनो क्रॉप प्रोटेक्शन मिशन
किसानों की सहायता के लिए आंध्र प्रदेश सरकार ने राज्य स्तर पर 24 घंटे सक्रिय रहने वाला एल नीनो क्रॉप प्रोटेक्शन मिशन शुरू करने का फैसला किया है। इसके लिए एक विशेष कंट्रोल रूम बनाया जाएगा, जिसमें मौसम पूर्वानुमान, सैटेलाइट जानकारी, जल उपलब्धता, फसल स्थिति और जमीनी रिपोर्ट को जोड़ा जाएगा। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे किसानों तक मौसम और खेती से जुड़ी जरूरी सलाह लगातार पहुंचाएं।

इसके लिए व्हाट्सऐप ग्रुप, किसान सेवा केंद्र, टीवी, रेडियो, समाचार पत्र, एसएमएस और हेल्पलाइन सेवाओं का इस्तेमाल किया जाएगा।
आपात बीज भंडार और किसानों के लिए सहायता योजना
राज्य सरकार ने सूखे जैसे हालात से प्रभावित क्षेत्रों के लिए आपात बीज व्यवस्था भी शुरू की है। कृषि विभाग के अनुसार, 14,078 क्विंटल आकस्मिक बीजों की व्यवस्था की जा चुकी है। इनमें लाल चना, हरा चना, बाजरा, उड़द और तिल जैसी वैकल्पिक फसलों के बीज शामिल हैं। इसके अलावा आचार्य एनजी रंगा कृषि विश्वविद्यालय और कृषि विज्ञान केंद्रों में भी अतिरिक्त बीज उपलब्ध रखे गए हैं। उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों में 31 जुलाई तक 26,950 क्विंटल बीजों की जरूरत बताई गई है, जबकि 15 अगस्त तक 21 जिलों के 429 मंडलों के लिए करीब 95,838 क्विंटल बीज की आवश्यकता होगी।
जल संरक्षण और आधुनिक खेती को बढ़ावा
सरकार ने किसानों को माइक्रो इरिगेशन, सिंचाई संरक्षण, मल्चिंग, खेत तालाब, कृषि यंत्रीकरण और सूखा सहने वाली बीज तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए हैं। सिंचाई विभाग के साथ मिलकर उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां पानी की कमी सबसे ज्यादा है। ऐसे इलाकों में किसानों को लंबी अवधि वाली धान की फसल के बजाय कम पानी वाली फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जाएगा।
फसल बीमा योजना में शामिल होने की अपील
कृषि मंत्री ने किसानों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना का लाभ लेने की अपील की है। खरीफ फसलों के लिए बीमा पंजीकरण की अंतिम तारीख धान को छोड़कर अन्य अधिसूचित फसलों के लिए 31 जुलाई और धान के लिए 15 अगस्त तय की गई है।
सरकार ने किसानों को दिया भरोसा
कृषि मंत्री के अच्चन्नायडू ने कहा कि किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार मौसम की स्थिति पर लगातार निगरानी रख रही है और फसलों तथा किसानों की आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। आंध्र प्रदेश सरकार की यह पहल ऐसे समय में सामने आई है जब जलवायु परिवर्तन और मौसम की अनिश्चितता कृषि क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बनती जा रही है। सरकार का लक्ष्य किसानों को तत्काल राहत देने के साथ-साथ भविष्य के लिए जलवायु अनुकूल खेती को मजबूत करना है।












