अंडमान सागर में भारत की रणनीतिक मौजूदगी होगी मजबूत: ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर केंद्र ने राहुल गांधी के आरोपों का दिया जवाब

ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर उठे सवालों पर केंद्र सरकार ने जवाब दिया है। सरकार ने कहा कि इस परियोजना से India की अंडमान सागर में रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत

Rahul Gandhi द्वारा ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट को लेकर किए गए हमले के बाद सरकार ने इस मामले में विस्तृत स्पष्टीकरण जारी किया है। सरकार ने Great Nicobar Project को अंडमान सागर में भारत की रणनीतिक मौजूदगी को मजबूत करने वाली एक महत्वपूर्ण पहल बताया है।

नई दिल्ली: अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में प्रस्तावित ग्रेट निकोबार मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी द्वारा उठाए गए सवालों के बाद केंद्र सरकार ने विस्तृत जवाब जारी किया है और इस परियोजना को भारत की रणनीतिक सुरक्षा के लिए अहम बताया है।

सरकार ने कहा है कि यह प्रोजेक्ट न केवल विकास से जुड़ा है, बल्कि यह अंडमान सागर में भारत की मौजूदगी और समुद्री ताकत को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

“रणनीतिक और राष्ट्रीय महत्व की परियोजना”

सरकार के अनुसार यह परियोजना पूरी तरह से सोच-समझकर और कई स्तरों पर मूल्यांकन के बाद शुरू की गई है। इसमें पोर्ट-आधारित विकास, लॉजिस्टिक्स नेटवर्क और रक्षा क्षमता को बढ़ाने जैसे लक्ष्य शामिल हैं। केंद्र ने स्पष्ट किया कि यह योजना भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अधिक मजबूत स्थिति प्रदान करेगी।

सरकारी बयान में कहा गया कि यह प्रोजेक्ट भारत की समुद्री और सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करेगा। इसके तहत एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय ट्रांसशिपमेंट पोर्ट विकसित किया जाएगा, जिससे वैश्विक व्यापार मार्गों से भारत की कनेक्टिविटी बढ़ेगी। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से क्षेत्रीय व्यापार, लॉजिस्टिक्स और रणनीतिक पहुंच में महत्वपूर्ण सुधार होगा।

पर्यावरणीय संतुलन पर सरकार का दावा

अंडमान सागर में भारत की रणनीतिक मौजूदगी होगी मजबूत: ग्रेट निकोबार प्रोजेक्ट पर केंद्र ने राहुल गांधी के आरोपों का दिया जवाब

पर्यावरणीय चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए सरकार ने कहा कि सभी संभावित प्रभावों का गहन अध्ययन किया गया है और उन्हें नियंत्रित करने के लिए सख्त पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली लागू की जा रही है। सरकार ने कहा कि विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखना इस परियोजना की प्राथमिकता है। ग्रेट निकोबार क्षेत्र में रहने वाले आदिवासी समुदायों को लेकर सरकार ने कहा कि सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है। सरकारी बयान के अनुसार:

  • जारवा नीति (2004) और शोम्पेन नीति (2015) का पालन किया गया है
  • विशेषज्ञों और संबंधित समितियों से परामर्श लिया गया है
  • विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों के हितों की रक्षा सुनिश्चित की गई है
  • जनजातीय मामलों के मंत्रालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) प्राप्त किया गया है

सरकार ने दावा किया कि परियोजना से स्थानीय समुदायों पर कोई नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ेगा। यह मेगा प्रोजेक्ट अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में विकसित किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य एक आधुनिक ट्रांसशिपमेंट हब बनाना है। इससे भारत को अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों पर मजबूत पकड़ मिलेगी और यह क्षेत्र वैश्विक लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।

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