चीन और पाकिस्तान जल्दी ही सीपीईसी (CPEC) को अफगानिस्तान तक बढ़ाने की तैयारी कर रहे हैं। इस मुद्दे पर गुरुवार को पाकिस्तान सीनेट की विदेश मामलों की समिति की बैठक हुई, जिसमें कथित तौर पर गलियारे के विस्तार के कई पहलुओं पर सहमति बन गई।
इस्लामाबाद: चीन और पाकिस्तान जल्द ही चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारा (CPEC) को अफगानिस्तान तक विस्तारित करने की योजना पर काम कर रहे हैं। पाकिस्तान की सीनेट की विदेश मामलों की समिति ने गुरुवार को इस दिशा में हुई बैठक में कहा कि परियोजना के विस्तार के लिए जरूरी कदम उठाए जा चुके हैं।CPEC का अफगानिस्तान तक पहुंचना बीजिंग और इस्लामाबाद दोनों के लिए रणनीतिक और आर्थिक सफलता माना जा रहा है।
वहीं, इस परियोजना से भारत की क्षेत्रीय भूमिका और प्रभाव कम होने की आशंका बढ़ रही है। भारत ने कई बार इस प्रोजेक्ट का विरोध किया है, खासकर इसलिए कि यह गलियारा पाकिस्तान के कब्जे वाले पीओके (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) से होकर गुजरता है।
त्रिपक्षीय ढांचा और पाकिस्तानी अधिकारियों की प्रतिक्रिया
पाकिस्तानी मीडिया ने बताया कि गलियारे के विस्तार का उद्देश्य चीन, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच त्रिपक्षीय आर्थिक ढांचा स्थापित करना है। अधिकारी मानते हैं कि यह परियोजना क्षेत्रीय सहयोग और व्यापार को बढ़ावा दे सकती है। हालांकि अफगानिस्तान के तालिबान शासन ने अभी तक इस मामले पर औपचारिक रुख स्पष्ट नहीं किया है। इसके बावजूद पाकिस्तान लगातार इस मुद्दे पर तत्परता दिखा रहा है।
पाकिस्तानी पत्रकार और सुरक्षा विश्लेषक इम्तियाज गुल ने एक्सप्रेस ट्रिब्यून में लिखा कि CPEC से पहले पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर व्यापार शुरू किया जाना चाहिए, क्योंकि अक्टूबर 2025 से बंद सीमा ने लाखों लोगों की जिंदगी प्रभावित की है। उन्होंने कहा कि खैबर-पख्तूनख्वा और अन्य सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार रोकने से आर्थिक संकट उत्पन्न हुआ है।

गुल ने यह भी चेतावनी दी कि CPEC को अफगानिस्तान तक बढ़ाने से पहले जमीनी हकीकत और सीमावर्ती तनाव को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। अक्टूबर 2025 के बाद पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर तनाव चरम पर था, जिससे ट्रांजिट ट्रेड एग्रीमेंट की विश्वसनीयता प्रभावित हुई।
CPEC विस्तार और पाकिस्तान की प्रतिष्ठा
CPEC अफगानिस्तान तक पहुंचाने से पहले पाकिस्तान के पास पहले से ही कई ट्रेड समझौते हैं, लेकिन पिछले चार महीनों से इसका कोई वास्तविक परिणाम नहीं आया है। सीमा पार व्यापार के दौरान पाकिस्तान की भूमिका और भरोसेमंद साझेदार के रूप में प्रतिष्ठा पर सवाल खड़े हुए हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि CPEC विस्तार के दौरान सीमा पार व्यापार की समस्याओं को हल नहीं किया गया, तो यह परियोजना चीन को अफगानिस्तान तक जोड़ने में असफल साबित हो सकती है।
भारत का विरोध
भारत इस परियोजना का विरोध करता रहा है। प्रमुख कारण यह है कि CPEC पीओके से होकर गुजरता है, जिसे भारत अवैध मानता है। इसके अलावा, इस गलियारे के माध्यम से चीन का भारत के पड़ोसी देशों में प्रभाव बढ़ता है, जिससे दिल्ली की रणनीतिक चिंताएं बढ़ गई हैं। विश्लेषकों के अनुसार, यदि CPEC अफगानिस्तान तक सफलतापूर्वक पहुंचता है, तो चीन-पाकिस्तान का प्रभाव क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था और सुरक्षा पर भी बढ़ेगा। इससे दक्षिण एशिया में भारत का वर्चस्व चुनौतीपूर्ण स्थिति में आ सकता है।













