असम के तमुलपुर में STF ने हाथी दांत की कथित तस्करी के मामले में दो लोगों को गिरफ्तार किया। उनके पास से 4.06 किलोग्राम वजन के दो आइवरी टस्क बरामद हुए। प्रारंभिक जांच में इन्हें करीब 6 लाख रुपये में बेचने की योजना सामने आई।
तमुलपु: असम के तमुलपुर जिले में स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने हाथी दांत की कथित अवैध तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो लोगों को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों के कब्जे से हाथी के दो आइवरी टस्क बरामद हुए हैं, जिनका कुल वजन करीब 4.06 किलोग्राम है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि बरामद हाथी दांत को लगभग 6 लाख रुपये में बेचने की कोशिश की जा रही थी। असम STF को हाथी दांत की कथित अवैध बिक्री से जुड़ी गतिविधि की विश्वसनीय सूचना मिली थी। इसके बाद टीम ने 7 अगस्त की रात तमुलपुर जिले के बंगालीपारा इलाके में अभियान चलाया। कार्रवाई के दौरान STF ने जिले के रहने वाले दो लोगों को हिरासत में लिया। अधिकारियों के मुताबिक, पकड़े गए आरोपियों की पहचान 29 वर्षीय ग्व्हव्म बसुमतारी और 23 वर्षीय स्व्डव्बमा बदीमतारी के रूप में हुई है। STF की कार्रवाई के दौरान दोनों संदिग्धों के पास से हाथी के दो दांत बरामद किए गए। अधिकारियों ने बरामदगी के बाद दोनों को हिरासत में लेकर मामले की आगे की जांच शुरू कर दी।
4.06 किलोग्राम वजन के दो हाथी दांत बरामद
अधिकारियों के अनुसार, STF ने अभियान के दौरान हाथी के दो आइवरी टस्क बरामद किए। इनमें एक दांत का वजन 2.09 किलोग्राम और दूसरे का वजन 1.97 किलोग्राम बताया गया है। दोनों दांतों का कुल वजन करीब 4.06 किलोग्राम है। बरामदगी को वन्यजीव अपराध के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाथी दांत की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी मांग रही है। इसी वजह से हाथियों के शिकार और आइवरी की अवैध तस्करी को वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर खतरा माना जाता है। ऐसे मामलों में कार्रवाई का उद्देश्य न केवल तस्करी के नेटवर्क को रोकना बल्कि वन्यजीवों के अवैध शिकार पर भी अंकुश लगाना होता है।
करीब 6 लाख रुपये में बेचने की थी कथित योजना
STF की प्रारंभिक जांच में पता चला है कि दोनों आरोपी कथित तौर पर बरामद हाथी दांत को करीब 6 लाख रुपये में बेचने की कोशिश कर रहे थे। हालांकि, अधिकारियों ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि हाथी दांत आरोपियों तक कैसे पहुंचा और इसे किस व्यक्ति या नेटवर्क को बेचा जाना था। जांच एजेंसियां अब इसी दिशा में जानकारी जुटा रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक, मामले में यह पता लगाना भी जरूरी है कि बरामद आइवरी कहां से आया था और क्या इसके पीछे कोई बड़ा अवैध वन्यजीव तस्करी नेटवर्क काम कर रहा था।
हाथी दांत की तस्करी पर बढ़ी चिंता
हाथी दांत की अवैध तस्करी वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी सबसे गंभीर चुनौतियों में शामिल है। हाथियों के दांतों की मांग के कारण कई क्षेत्रों में इनके अवैध शिकार और तस्करी का खतरा बना रहता है। भारत में हाथी एक संरक्षित वन्यजीव है और उसके शरीर के हिस्सों का अवैध व्यापार कानून के तहत गंभीर अपराध है। हाथी दांत की खरीद-बिक्री पर प्रतिबंध का उद्देश्य अवैध शिकार और वन्यजीव तस्करी को रोकना है।तमुलपुर में हुई यह बरामदगी ऐसे समय में सामने आई है जब पूर्वोत्तर भारत में वन्यजीव अपराध और तस्करी पर सुरक्षा एवं जांच एजेंसियों की निगरानी लगातार बनी हुई है।
STF अब तस्करी के पूरे नेटवर्क की तलाश में
दो आरोपियों की गिरफ्तारी और आइवरी की बरामदगी के बाद जांच अब अगले चरण में पहुंच गई है। अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि बरामद हाथी दांत का स्रोत क्या था। जांच का एक अहम पहलू यह भी होगा कि क्या दोनों आरोपी अकेले इस कथित अवैध कारोबार में शामिल थे या उनके पीछे कोई संगठित नेटवर्क काम कर रहा था। इसके अलावा STF और संबंधित एजेंसियां उन संभावित लोगों की पहचान करने में जुटी हैं, जिन्हें हाथी दांत बेचा जाना था। यदि जांच में किसी बड़े नेटवर्क की जानकारी सामने आती है, तो आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां संभव हो सकती हैं।
आरोपियों से पूछताछ के बाद खुल सकते हैं अहम राज
अधिकारियों के अनुसार, आरोपियों से पूछताछ के जरिए तस्करी से जुड़े अन्य लोगों और संभावित खरीदारों के बारे में जानकारी हासिल करने की कोशिश की जा रही है। जांच एजेंसियां यह भी पता लगा सकती हैं कि हाथी दांत को कहां से लाया गया था, इसे किस रास्ते से तमुलपुर तक पहुंचाया गया और इसे आगे किस बाजार में बेचने की योजना थी। वन्यजीव तस्करी के मामलों में किसी बरामदगी के पीछे के स्रोत का पता लगाना महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे संभावित शिकारियों, बिचौलियों और खरीदारों के नेटवर्क तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
वन्यजीव संरक्षण के लिए अहम कार्रवाई
तमुलपुर में STF की कार्रवाई को वन्यजीव संरक्षण के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हाथी दांत की बरामदगी ने एक संभावित अवैध सौदे को रोक दिया। साथ ही दो संदिग्धों की गिरफ्तारी से जांच एजेंसियों को आगे की कड़ियां जोड़ने का मौका मिला है। हालांकि, इस मामले में आरोपियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों और कथित तस्करी की पूरी तस्वीर जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल अधिकारी बरामद हाथी दांत के स्रोत और संभावित खरीदारों की जानकारी जुटा रहे हैं।
पूर्वोत्तर में वन्यजीव अपराध रोकने की चुनौती
असम और पूर्वोत्तर भारत जैव विविधता की दृष्टि से महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। यहां हाथियों समेत कई दुर्लभ और संरक्षित वन्यजीव पाए जाते हैं। ऐसे में वन्यजीवों के अंगों की तस्करी रोकना संरक्षण एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती है। हाथी दांत की बरामदगी से जुड़े मामलों में केवल स्थानीय स्तर पर कार्रवाई पर्याप्त नहीं होती, क्योंकि इसके पीछे अंतरराज्यीय या अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क की संभावना भी जांच का विषय बन सकती है। यही वजह है कि STF की मौजूदा जांच में संभावित संपर्कों और तस्करी की पूरी श्रृंखला का पता लगाने पर जोर दिया जा रहा है।
जांच अभी जारी
असम STF की कार्रवाई में दो लोगों को गिरफ्तार किए जाने के साथ हाथी के दो आइवरी टस्क बरामद हुए हैं। दोनों का संयुक्त वजन करीब 4.06 किलोग्राम है और प्रारंभिक जांच में इनके कथित बिक्री मूल्य का अनुमान करीब 6 लाख रुपये लगाया गया है।
अधिकारियों ने कहा है कि मामले की आगे जांच जारी है। जांच का मुख्य उद्देश्य हाथी दांत के स्रोत का पता लगाना और कथित अवैध वन्यजीव व्यापार में शामिल अन्य लोगों की पहचान करना है। फिलहाल यह मामला केवल दो आरोपियों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं माना जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ यह स्पष्ट हो सकता है कि बरामद हाथी दांत किसी बड़े तस्करी नेटवर्क का हिस्सा था या नहीं। अधिकारियों की अगली कार्रवाई इसी जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।












