असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने केंद्र और राज्य सरकार पर नागालैंड सीमा विवाद को हल करने में विफल रहने का आरोप लगाया है। उन्होंने मारियानी सीमा क्षेत्र का दौरा कर अतिक्रमण और भूमि हानि को लेकर गंभीर सवाल उठाए।
गुवाहाटी: असम और नागालैंड के बीच दशकों से चल रहा सीमा विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। इस मुद्दे पर असम कांग्रेस अध्यक्ष और लोकसभा सांसद गौरव गोगोई ने केंद्र और राज्य सरकार दोनों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। गोगोई ने कहा कि दोनों सरकारें इस लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद को सुलझाने में पूरी तरह विफल रही हैं, जिसके कारण स्थिति लगातार जटिल होती जा रही है।
मारियानी सीमा क्षेत्र का दौरा और आरोप
गौरव गोगोई ने मंगलवार को जॉरहाट जिले के मारियानी स्थित अंतर-राज्यीय सीमा क्षेत्र का दौरा किया। यह क्षेत्र उनके लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। दौरे के बाद मीडिया से बातचीत में उन्होंने आरोप लगाया कि असम की जमीन पर अतिक्रमण हो रहा है और सीमा रेखा में बदलाव जैसी स्थितियां दिखाई दे रही हैं। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के अंतिम निर्णय से पहले ही कुछ क्षेत्रों पर नियंत्रण छोड़ दिया है।
सरकार पर आरोप
गोगोई ने केंद्र और असम सरकार दोनों पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर समय पर ठोस कदम उठाए जाते, तो यह विवाद इतना गंभीर नहीं होता। उन्होंने दावा किया कि सरकार की लापरवाही के कारण असम की भूमि प्रभावित हो रही है और स्थानीय लोगों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।

सीमा विवाद
असम और नागालैंड के बीच सीमा विवाद कई दशकों पुराना है। दोनों राज्यों के बीच कई क्षेत्रों को लेकर विवादित दावे रहे हैं, जिनमें जंगल, ग्रामीण क्षेत्र और संसाधन-समृद्ध इलाके शामिल हैं। समय-समय पर इस विवाद को सुलझाने के लिए बातचीत और न्यायिक हस्तक्षेप भी हुए हैं, लेकिन स्थायी समाधान अब तक नहीं निकल पाया है।
स्थानीय लोगों पर असर
सीमा विवाद का सबसे बड़ा असर सीमावर्ती गांवों के लोगों पर पड़ता है। कई बार इन क्षेत्रों में तनाव, अस्थिरता और झड़पों की स्थिति उत्पन्न हो जाती है। स्थानीय निवासियों को भूमि स्वामित्व, सुरक्षा और प्रशासनिक नियंत्रण को लेकर अनिश्चितता का सामना करना पड़ता है।
सुप्रीम कोर्ट प्रक्रिया का जिक्र
गोगोई ने यह भी सवाल उठाया कि जब मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है, तब जमीन पर किसी प्रकार का बदलाव या अतिक्रमण कैसे हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस तरह की गतिविधियां न्यायिक प्रक्रिया और संवैधानिक व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती हैं।
राजनीतिक बयानबाजी तेज
इस बयान के बाद असम की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों ने सरकार से इस मुद्दे पर स्पष्ट स्थिति और ठोस कार्रवाई की मांग की है। वहीं, सत्ताधारी पक्ष का कहना है कि सीमा विवाद एक जटिल और संवेदनशील मुद्दा है, जिसे बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से ही हल किया जा सकता है।











