आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में शुक्रवार को ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब की शुरुआत होगी। करीब ₹1 लाख करोड़ की इस परियोजना में 10 जिलों के 5,869 गांव शामिल होंगे। सरकार का लक्ष्य बागवानी क्षेत्र, सिंचाई, प्रसंस्करण, ग्रामीण सड़क और कृषि निर्यात को मजबूत करना है।
तिरपति: आंध्र प्रदेश के मदनपल्ले में शुक्रवार को रायालसीमा क्षेत्र के लिए प्रस्तावित ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब (GHH) की शुरुआत की जाएगी। करीब ₹1 लाख करोड़ की अनुमानित लागत वाली इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्देश्य बागवानी उत्पादन, सिंचाई, ग्रामीण सड़क, लॉजिस्टिक्स, खाद्य प्रसंस्करण और कृषि निर्यात को एकीकृत ढांचे में विकसित करना है। परियोजना का उद्घाटन केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण, आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू और उपमुख्यमंत्री के. पवन कल्याण करेंगे।
राज्य सरकार के अनुसार, परियोजना में करीब ₹40,352 करोड़ का सरकारी निवेश प्रस्तावित है, जबकि लगभग ₹60,000 करोड़ निजी क्षेत्र से जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। इसे तीन चरणों में लागू किया जाएगा और सरकार का लक्ष्य जून 2029 तक प्रमुख कार्यों को पूरा करना है।
10 जिलों के 5,869 गांव परियोजना के दायरे में
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब का दायरा रायालसीमा के साथ आसपास के क्षेत्रों तक रखा गया है। परियोजना अनंतपुर, अन्नमय्या, चित्तूर, कुरनूल, नंद्याल, श्री सत्य साई, तिरुपति, कडपा, प्रकाशम और मार्कापुरम जिलों में लागू होगी।
इन 10 जिलों के 303 मंडलों और 5,869 गांवों को कुल 201 क्लस्टरों में संगठित किया जाएगा। इस क्लस्टर आधारित मॉडल का उद्देश्य किसानों, कृषि बुनियादी ढांचे, प्रसंस्करण इकाइयों और बाजारों को एक-दूसरे से जोड़ना है।
राज्य सरकार इस परियोजना के जरिए रायालसीमा को बड़े बागवानी उत्पादन और निर्यात केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना बना रही है।
बागवानी क्षेत्र 8.41 लाख से बढ़कर 14.41 लाख हेक्टेयर होगा
परियोजना के तहत बागवानी खेती का क्षेत्र मौजूदा 8.41 लाख हेक्टेयर से बढ़ाकर 14.41 लाख हेक्टेयर करने का लक्ष्य रखा गया है। यानी करीब 6 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र को बागवानी के दायरे में लाने की योजना है।
सरकार ने बागवानी उत्पादन को भी मौजूदा 222 लाख मीट्रिक टन से बढ़ाकर 435 लाख मीट्रिक टन करने का लक्ष्य तय किया है। परियोजना से लगभग 9.6 लाख किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद जताई गई है।
यह विस्तार केवल खेती का रकबा बढ़ाने तक सीमित नहीं होगा। योजना में उत्पादन के साथ सिंचाई, सड़क, भंडारण, प्रसंस्करण, बाजार और निर्यात से जुड़ी सुविधाओं को भी एक साथ विकसित करने का प्रावधान है।
‘सीड टू शिपमेंट’ मॉडल पर आधारित योजना
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब को “सीड टू शिपमेंट” यानी बीज से लेकर निर्यात के लिए माल भेजने तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला को एकीकृत करने वाले मॉडल पर तैयार किया गया है।
इसके तहत खेतों में उत्पादन से लेकर सिंचाई, ग्रामीण सड़क, लॉजिस्टिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, बाजार और निर्यात सुविधाओं को आपस में जोड़ा जाएगा। इससे किसानों को केवल कच्ची उपज बेचने के बजाय प्रसंस्करण और मूल्यवर्धन के माध्यम से बाजार तक पहुंच बनाने का अवसर मिलने की उम्मीद है।
सरकार ने Farmer Producer Organisations (FPOs) को भी प्रसंस्करण इकाइयों से जोड़ने की योजना बनाई है। इसका उद्देश्य किसानों की बाजार तक पहुंच बढ़ाना और उनकी उपज का बेहतर मूल्य हासिल करने में मदद करना है।
सिंचाई पर ₹20,884 करोड़ खर्च होंगे
परियोजना के सार्वजनिक निवेश में सिंचाई को सबसे महत्वपूर्ण हिस्सों में शामिल किया गया है। कुल ₹40,352 करोड़ के सरकारी व्यय में करीब ₹20,884 करोड़ सिंचाई, ₹15,000 करोड़ बागवानी विकास और ₹4,562 करोड़ ग्रामीण सड़कों के लिए निर्धारित किए गए हैं।
सिंचाई से जुड़े प्रस्तावों में नल्लामला सागर को भरना, वेलिगोंडा परियोजना के फेज-II को पूरा करना तथा हांड्री-नीवा और गलेरू-नगरी परियोजनाओं से जुड़े कार्य शामिल हैं।
इसके अलावा छोटी सिंचाई परियोजनाओं और तालाबों के पुनरुद्धार को भी प्राथमिकता दी जाएगी। इसका उद्देश्य बागवानी क्षेत्र में पानी की उपलब्धता बढ़ाना और खेती को अधिक स्थिर बनाना है।
खेतों को बाजार से जोड़ने के लिए 5,721 किमी सड़क
परियोजना के तहत ग्रामीण इलाकों में 5,721 किलोमीटर सड़कें बनाने की योजना है। इन सड़कों का उद्देश्य खेतों और उत्पादन केंद्रों को बाजार, प्रसंस्करण इकाइयों और अन्य लॉजिस्टिक सुविधाओं से जोड़ना है।
कृषि उत्पादों के लिए समय पर परिवहन महत्वपूर्ण होता है, खासकर फल और सब्जियों जैसी जल्दी खराब होने वाली उपज के मामले में। सड़क और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के विस्तार से उत्पादों को उत्पादन क्षेत्र से प्रसंस्करण केंद्रों और बाजारों तक पहुंचाने की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है।
आम, केला, टमाटर और ड्रैगन फ्रूट पर जोर
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब में कई उच्च-मूल्य वाली बागवानी फसलों को बढ़ावा देने की योजना है। इनमें आम, केला, टमाटर, अनार, ड्रैगन फ्रूट, एवोकाडो और बेरीज शामिल हैं।
राज्य सरकार का लक्ष्य स्थानीय कृषि परिस्थितियों और बाजार की मांग के अनुरूप फसल उत्पादन को बढ़ाना है। साथ ही, प्रसंस्करण और निर्यात सुविधाओं के विस्तार के जरिए इन उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुंचाने की योजना है।
निजी क्षेत्र को भी खाद्य प्रसंस्करण संयंत्र और निर्यात सुविधाएं स्थापित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। इससे परियोजना में सरकारी बुनियादी ढांचे के साथ निजी निवेश को जोड़ने की कोशिश की जा रही है।
तीन चरणों में पूरा होगा प्रोजेक्ट
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब को तीन चरणों और छह पैकेजों में लागू करने की योजना है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार, पहले चरण में प्राथमिकता वाले क्लस्टरों में बुनियादी ढांचे और कृषि विकास से जुड़े कार्य शुरू किए जाएंगे।
दूसरे और तीसरे चरण में अन्य क्लस्टरों को शामिल करते हुए परियोजना का विस्तार किया जाएगा। सरकार ने जून 2029 तक काम पूरा करने का लक्ष्य रखा है।
पूरे कार्यक्रम का उद्देश्य अलग-अलग विभागों के काम को एक साझा कृषि विकास योजना में जोड़ना है। इसके लिए राज्य सरकार पिछले करीब छह महीने से कृषि, बागवानी, वित्त और सिंचाई विभागों के साथ चर्चा कर रही थी। केंद्र सरकार के साथ भी परियोजना को लेकर विचार-विमर्श किया गया है।
मदनपल्ले में बनेगा इंडियन स्कूल ऑफ एग्रीकल्चर
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब के साथ मदनपल्ले में Indian School of Agriculture (ISA) की आधारशिला भी रखी जाएगी। यह संस्थान कृषि और उससे जुड़े क्षेत्रों को अधिक लाभकारी बनाने के उद्देश्य से प्रस्तावित है।
ISA को Indian School of Business की तर्ज पर विकसित करने की योजना बताई गई है। इसका फोकस कृषि क्षेत्र में तकनीक, वैज्ञानिक अनुसंधान और बाजार से जुड़े समाधान विकसित करने पर होगा।
संस्थान किसानों को डिजिटल कृषि, प्रिसिजन फार्मिंग, फसल निगरानी, स्मार्ट सिंचाई और बाजार संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने में मदद करेगा। इसके अलावा मांग के अनुरूप फसल चयन और खेती से जुड़े मार्गदर्शन की भी योजना है।
कृषि स्टार्टअप को भी मिलेगा समर्थन
Indian School of Agriculture के माध्यम से कृषि क्षेत्र में नए उद्यमों को बढ़ावा देने के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर विकसित किए जाने की योजना है। इन केंद्रों के जरिए कृषि तकनीक और अन्य नवाचारों पर काम करने वाले स्टार्टअप को सहायता देने का लक्ष्य है।
राज्य सरकार के अनुसार, तकनीक आधारित समाधान किसानों की उत्पादकता और बाजार तक पहुंच बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। इसके साथ ही वैज्ञानिक शोध और कृषि क्षेत्र के व्यावसायिक अवसरों को जोड़ने की कोशिश की जाएगी।
अनंत अंबानी के शामिल होने की उम्मीद
मदनपल्ले में होने वाले कार्यक्रम में कई केंद्रीय और राज्य मंत्री, जनप्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान तथा खाद्य प्रसंस्करण और निर्यात क्षेत्र से जुड़े प्रतिनिधियों के शामिल होने की उम्मीद है।
Reliance Industries के कार्यकारी निदेशक अनंत अंबानी के भी कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। परियोजना से जुड़े विवरण के अनुसार, रिलायंस ने Indian School of Agriculture की स्थापना और संचालन में राज्य सरकार के साथ काम करने में रुचि दिखाई है।
रायालसीमा की कृषि अर्थव्यवस्था को बदलने की योजना
ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब को केवल बागवानी क्षेत्र के विस्तार की परियोजना के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसका दायरा सिंचाई, ग्रामीण कनेक्टिविटी, प्रसंस्करण, लॉजिस्टिक्स, निर्यात और कृषि तकनीक तक फैला हुआ है।
सरकार की योजना उत्पादन बढ़ाने के साथ किसानों को मूल्य श्रृंखला के अधिक हिस्से से जोड़ने की है। यदि प्रस्तावित बुनियादी ढांचा, निजी निवेश और प्रसंस्करण क्षमता निर्धारित समयसीमा के अनुसार विकसित होती है, तो इससे क्षेत्र के कृषि बाजार और निर्यात ढांचे में बदलाव आ सकता है।
फिलहाल ₹1 लाख करोड़ का ग्लोबल हॉर्टिकल्चर हब एक प्रस्तावित बहु-वर्षीय विकास कार्यक्रम के रूप में शुरू हो रहा है। इसके वास्तविक आर्थिक और कृषि प्रभाव परियोजना के क्रियान्वयन, निजी निवेश की भागीदारी, सिंचाई परियोजनाओं की प्रगति और किसानों तक सुविधाओं की पहुंच पर निर्भर करेंगे।











