मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और वैश्विक अनिश्चितता के कारण शेयर बाजारों में कमजोरी देखने को मिल रही है। इसका असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है, जहां लगातार गिरावट से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
बिजनेस न्यूज़: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध के कारण पैदा हुई अनिश्चितता का असर वैश्विक स्तर के साथ-साथ Indian stock market पर भी दिखाई दे रहा है। भारतीय शेयर बाजार में लगातार तीन दिनों से गिरावट दर्ज की गई है। शुक्रवार के कारोबारी दिन भी दोनों प्रमुख बेंचमार्क इंडेक्स लाल निशान पर बंद हुए। विशेष रूप से, BSE Sensex 1,470.50 अंक या 1.93 प्रतिशत की गिरावट के साथ 74,563.92 अंक पर और NSE Nifty 50 488.05 अंक या 2.06 प्रतिशत गिरकर 23,151.10 के स्तर पर बंद हुए। इस माहौल से निवेशकों की चिंता बढ़ गई है।
बाजार में लगातार तीसरे दिन गिरावट
हाल के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर बाजार के दोनों प्रमुख सूचकांक गिरावट के साथ बंद हुए।
- BSE Sensex करीब 1470 अंक गिरकर 74,563 के आसपास बंद हुआ
- Nifty 50 लगभग 488 अंक गिरकर 23,151 के स्तर पर आ गया
विशेषज्ञों का कहना है कि मध्य-पूर्व में चल रहे संघर्ष, कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव और वैश्विक बाजारों की कमजोरी का असर भारतीय बाजार पर भी पड़ा है।
विप्रो पर 21% तक गिरावट की आशंका
ब्रोकरेज फर्म ने आईटी कंपनी Wipro के शेयर को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी है। फर्म के अनुसार, मौजूदा स्तर से शेयर की कीमत गिरकर लगभग 180 रुपये तक आ सकती है, जो हाल के बंद भाव से करीब 20-21% कम है। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनी के रेवेन्यू ग्रोथ में लगातार दूसरे साल कमजोरी रह सकती है। खासकर कंसल्टिंग और आईटी सेवाओं वाले सेगमेंट में मांग कम होने से कंपनी के प्रदर्शन पर दबाव पड़ सकता है।
फार्मा कंपनी Cipla को लेकर भी ब्रोकरेज ने सावधानी बरतने की सलाह दी है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी की अमेरिका से होने वाली कमाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसके पीछे मुख्य कारण:
- प्रमुख दवाओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा
- सप्लाई चेन से जुड़ी चुनौतियां
- मैन्युफैक्चरिंग पार्टनर से जुड़े उत्पादन मुद्दे
ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 तक कंपनी के मुनाफे में सालाना आधार पर लगभग 15% तक गिरावट आ सकती है। इसी वजह से शेयर पर “अंडरपरफॉर्म” रेटिंग बरकरार रखी गई है।
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हुंडई मोटर इंडिया में सीमित बढ़त की संभावना
ऑटो सेक्टर की कंपनी Hyundai Motor India को लेकर भी ब्रोकरेज का रुख सतर्क है। फर्म ने शेयर का लक्ष्य मूल्य लगभग 1,900 रुपये के आसपास रखा है, जो मौजूदा स्तर के करीब है। हालांकि रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में पैसेंजर वाहन की मांग मजबूत रह सकती है, खासकर इन कारणों से:
- संभावित जीएसटी कटौती
- बाजार में बेहतर लिक्विडिटी
- सरकारी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि
लेकिन बढ़ती प्रतिस्पर्धा और लागत दबाव के कारण कंपनी के शेयर में बड़ी तेजी की संभावना सीमित बताई गई है।








