बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव आज, 349 सांसद करेंगे मत

बांग्लादेश मे 35 साल बाद राष्ट्रपति चुनाव हो रहा है। 349 सांसद मतदान करेंगे। BNP के मिर्जा फखरुल और ओली अहमद के बीच मुकाबला है, फखरुल की जीत की संभावना मजबूत है

बांग्लादेश में 35 साल बाद राष्ट्रपति पद के लिए आज मुकाबला होगा। 349 सांसद दो उम्मीदवारों के बीच मतदान करेंगे। BNP के मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर और ओली अहमद आमने-सामने हैं। संसद में BNP के बहुमत के कारण फखरुल मजबूत दावेदार हैं।

ढाका: बांग्लादेश में गुरुवार, 20 अगस्त 2026 को राष्ट्रपति पद के लिए मतदान होगा। यह चुनाव इसलिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि 35 साल बाद पहली बार राष्ट्रपति पद के लिए दो उम्मीदवार आमने-सामने हैं। राष्ट्रपति का चुनाव जनता सीधे नहीं करती, बल्कि संसद के सदस्य मतदान के जरिए देश का अगला राष्ट्रपति चुनते हैं। इस बार कुल 349 सांसद राष्ट्रपति चुनाव में वोट डालने के पात्र हैं। मतदान दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक राष्ट्रीय संसद भवन के सत्र कक्ष में होगा।

349 सांसद करेंगे राष्ट्रपति का चुनाव

बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुनाव में आम मतदाता की सीधी भूमिका नहीं होती। संविधान और राष्ट्रपति चुनाव कानून के तहत संसद सदस्य राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। इस बार संसद में एक सीट खाली होने के कारण कुल 349 सांसद मतदान करेंगे। इनमें सत्तारूढ़ बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी यानी BNP के 247 सांसद हैं, जबकि जमात-ए-इस्लामी के 77 सांसद हैं। इसके अलावा नेशनल सिटीजन पार्टी और निर्दलीय खेमे के सांसदों सहित अन्य दलों के सदस्य भी निर्वाचन मंडल का हिस्सा हैं।

संसद में BNP के मजबूत बहुमत को देखते हुए उसके उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की स्थिति काफी मजबूत मानी जा रही है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर राष्ट्रपति का चुनाव मतदान और मतगणना पूरी होने के बाद ही तय होगा। BNP के पास इतना बड़ा संख्याबल है कि राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार फखरुल की जीत की संभावना बेहद अधिक है।

फखरुल और ओली अहमद के बीच मुकाबला

राष्ट्रपति पद के लिए दो उम्मीदवार मैदान में हैं। सत्तारूढ़ BNP ने अपने वरिष्ठ नेता और तत्कालीन महासचिव मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को उम्मीदवार बनाया है। दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय विपक्षी गठबंधन ने लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व सैन्य अधिकारी कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को उम्मीदवार बनाया है। दोनों उम्मीदवारों के नामांकन पत्रों को चुनाव आयोग ने वैध घोषित किया था और नाम वापस लेने की समयसीमा खत्म होने के बाद मुकाबला तय हो गया।

फखरुल को राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनाने का फैसला BNP के शीर्ष नेतृत्व की बैठक में हुआ था। प्रधानमंत्री और BNP के अध्यक्ष तारिक रहमान की मौजूदगी में पार्टी ने उनकी उम्मीदवारी को मंजूरी दी। नामांकन के बाद फखरुल ने पार्टी के महासचिव और स्थायी समिति से इस्तीफा दिया, जिससे राष्ट्रपति पद की संवैधानिक भूमिका और पार्टी संगठन की जिम्मेदारियों के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखने की कोशिश नजर आई।

दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक होगा मतदान

चुनाव आयोग के कार्यक्रम के अनुसार सांसद गुरुवार को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक संसद के सत्र कक्ष में मतदान करेंगे। मतदान के लिए सांसदों को अलग मतदान बूथ में जाने के बजाय अपने निर्धारित स्थानों पर बैलेट पेपर दिए जाएंगे। चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया के लिए विशेष तैयारियां की हैं।

प्रत्येक बैलेट पेपर में रिकॉर्ड के लिए काउंटरफॉइल और मतदान के लिए मुख्य हिस्सा होगा। सांसद को बैलेट प्राप्त करने से पहले निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपना नाम और हस्ताक्षर दर्ज करना होगा। इसके बाद वह अपनी पसंद के उम्मीदवार के नाम के सामने अपना नाम लिखकर हस्ताक्षर करेगा। मतदान के लिए सत्र कक्ष में तीन पारदर्शी मतपेटियां रखी जाएंगी।

वोटिंग और मतगणना का होगा लाइव प्रसारण

इस राष्ट्रपति चुनाव की एक खास बात यह है कि चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को लाइव प्रसारित करने की व्यवस्था की है। इसके अलावा मतदान समाप्त होने के तुरंत बाद मतगणना शुरू की जाएगी। चुनाव आयोग के अधिकारियों के अनुसार मतगणना भी प्रसारण के दायरे में रहेगी और परिणाम तैयार किए जाने की प्रक्रिया को पारदर्शी रखने की कोशिश की जाएगी।

मतदान खत्म होने के बाद बैलेट पेपरों को छांटकर उनकी गिनती की जाएगी। मुख्य चुनाव आयुक्त और राष्ट्रपति चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर एएमएम नासिर उद्दीन वैध और अवैध मतों की संख्या तथा दोनों उम्मीदवारों को मिले वोटों की घोषणा करेंगे। इसके बाद चुनाव आयोग सचिवालय आधिकारिक परिणाम को गजट अधिसूचना के जरिए जारी करेगा।

सांसदों पर पार्टी लाइन का दबाव

इस चुनाव में सांसदों के स्वतंत्र मतदान को लेकर भी चर्चा है। बांग्लादेश के मुख्य सचेतक नुरुल इस्लाम मोनी ने कहा है कि संविधान का अनुच्छेद 70 राष्ट्रपति चुनाव में भी लागू रहेगा। इसका अर्थ है कि सांसद अपनी पार्टी के फैसले के खिलाफ मतदान नहीं कर सकते। पार्टी लाइन से अलग मतदान करने पर उनकी संसदीय सदस्यता पर असर पड़ सकता है।

यह प्रावधान BNP उम्मीदवार फखरुल के पक्ष में संख्याबल को और महत्वपूर्ण बना देता है। संसद में BNP के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण उसके उम्मीदवार को जीत के लिए मजबूत आधार हासिल है। दूसरी ओर, विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार ओली अहमद का मुकाबला मुख्य रूप से राजनीतिक संदेश और विपक्षी एकजुटता दिखाने का माध्यम भी माना जा रहा है।

35 साल बाद फिर हुआ मुकाबला

बांग्लादेश के राष्ट्रपति चुनाव का इतिहास भी इस चुनाव को खास बनाता है। 1991 में संसदीय प्रणाली दोबारा लागू होने के बाद राष्ट्रपति का चुनाव संसद सदस्यों के जरिए होने लगा। 1991 में दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला हुआ था। इसके बाद लंबे समय तक राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव निर्विरोध होते रहे। 2026 का चुनाव इसलिए 35 साल बाद पहला ऐसा राष्ट्रपति चुनाव है जिसमें एक से अधिक उम्मीदवार मैदान में हैं।

बांग्लादेश में राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक भूमिका वाला माना जाता है, जबकि सरकार की कार्यकारी शक्ति प्रधानमंत्री के पास रहती है। हालांकि, मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में राष्ट्रपति चुनाव को लेकर खास दिलचस्पी देखी जा रही है क्योंकि सत्ता में मौजूद BNP ने इस पद के लिए अपने वरिष्ठ नेता को मैदान में उतारा है।

पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद चुनाव

राष्ट्रपति चुनाव की आवश्यकता पूर्व राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद पैदा हुई। शहाबुद्दीन ने 24 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दिया था। उन्होंने स्वास्थ्य संबंधी गंभीर समस्याओं को इस्तीफे की वजह बताया। उनके पद छोड़ने के बाद संसद के स्पीकर हाफिज उद्दीन अहमद ने कार्यवाहक राष्ट्रपति की जिम्मेदारी संभाली। संविधान के अनुसार राष्ट्रपति पद रिक्त होने के बाद निर्धारित अवधि के भीतर नया राष्ट्रपति चुना जाना जरूरी है।

शहाबुद्दीन के इस्तीफे के बाद चुनाव आयोग ने राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू की और 20 अगस्त की तारीख तय की। नामांकन, जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब मुकाबले में केवल फखरुल इस्लाम आलमगीर और ओली अहमद बचे हैं।

BNP सांसदों की चुनाव से पहले बैठक

राष्ट्रपति चुनाव से एक दिन पहले 19 अगस्त को BNP के सांसदों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने की। इसमें पार्टी के राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर भी शामिल हुए। बैठक में सांसदों को राष्ट्रपति चुनाव की रणनीति और मतदान प्रक्रिया से संबंधित दिशा-निर्देश दिए गए।

अब सभी की नजरें गुरुवार दोपहर होने वाले मतदान पर हैं। 349 सांसदों के वोटों की गिनती पूरी होने के बाद बांग्लादेश को अपना 23वां राष्ट्रपति मिल जाएगा। संख्या बल, पार्टी अनुशासन और BNP के संसद में बहुमत को देखते हुए मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को स्पष्ट बढ़त हासिल है। हालांकि, अंतिम फैसला चुनाव आयोग की आधिकारिक मतगणना और परिणाम घोषणा के बाद ही माना जाएगा।

बांग्लादेश की राजनीति के लिए क्यों अहम है चुनाव?

यह चुनाव केवल राष्ट्रपति चुनने की संवैधानिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि बांग्लादेश की बदलती राजनीतिक व्यवस्था का भी संकेत माना जा रहा है। 35 साल बाद राष्ट्रपति पद पर दो उम्मीदवारों के बीच सीधा मुकाबला होना विपक्ष की सक्रियता को दर्शाता है। वहीं, BNP का मजबूत संसदीय बहुमत यह संकेत देता है कि सत्ता पक्ष अपने उम्मीदवार को राष्ट्रपति भवन तक पहुंचाने की स्थिति में है।

मतदान, मतगणना और परिणाम की प्रक्रिया को सार्वजनिक रूप से प्रसारित करने का फैसला भी चुनाव की पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण है। ऐसे में गुरुवार को होने वाला यह चुनाव बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में दर्ज हो सकता है।

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