फिटनेस जांच के लिए अब उन्हें अपने वाहनों के साथ पटना का रुख करना होगा, जिससे करीब 120 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी। इस नई व्यवस्था के चलते समय, पैसा और मेहनत—तीनों का बोझ वाहन मालिकों पर बढ़ गया है।
जानकारी के अनुसार, बेगूसराय में फिलहाल फिटनेस जांच की समुचित व्यवस्था उपलब्ध नहीं रहने के कारण यह फैसला लिया गया है। ऐसे में अब जिले के सभी व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच पटना में की जाएगी। इससे खासकर ट्रक, बस, टेम्पो और अन्य व्यावसायिक वाहनों के मालिकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
बेगूसराय जिले से पटना की दूरी लगभग 120 किलोमीटर है। ऐसे में वाहन मालिकों को फिटनेस जांच के लिए एक तरफ आने-जाने में ही पूरा दिन लग जा रहा है। लंबी दूरी तय करने के कारण ईंधन खर्च बढ़ रहा है, वहीं ड्राइवर की मजदूरी और समय की भी अतिरिक्त लागत जुड़ रही है। कई वाहन मालिकों का कहना है कि छोटे वाहन संचालकों के लिए यह व्यवस्था आर्थिक रूप से काफी भारी साबित हो रही है।
वाहन मालिकों का आरोप है कि पहले जिले में ही फिटनेस जांच की सुविधा उपलब्ध थी, जिससे काम आसानी से हो जाता था। लेकिन अब अचानक जांच केंद्र को दूसरे जिले में शिफ्ट किए जाने से उन्हें अनावश्यक परेशानी झेलनी पड़ रही है। खासतौर पर वे वाहन मालिक, जिनके पास सीमित संसाधन हैं, उनके लिए यह स्थिति और भी कठिन हो गई है।
इस समस्या का असर परिवहन व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। कई वाहन मालिकों का कहना है कि फिटनेस जांच में देरी होने पर वाहन सड़कों पर नहीं उतारे जा सकते, जिससे माल ढुलाई और यात्री सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसका सीधा असर आम जनता और स्थानीय व्यापार पर पड़ने की आशंका भी जताई जा रही है।
वाहन मालिकों और संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि बेगूसराय जिले में ही फिटनेस जांच की व्यवस्था दोबारा शुरू की जाए या फिर किसी नजदीकी स्थान पर वैकल्पिक केंद्र खोला जाए, ताकि लोगों को इतनी लंबी दूरी तय न करनी पड़े। उनका कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया, तो आने वाले दिनों में विरोध और आंदोलन की स्थिति भी बन सकती है।
कुल मिलाकर, फिटनेस जांच के लिए पटना जाना बेगूसराय जिले के वाहन मालिकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। 120 किलोमीटर की यह मार न केवल आर्थिक बोझ बढ़ा रही है, बल्कि रोजमर्रा के कामकाज को भी प्रभावित कर रही है।











