भागलपुर में गंगा पार करने वाले यात्रियों की परेशानी एक बार फिर सामने आई है। घाट पर रात गुजारने के बाद सुबह पहली फेरी के इंतजार में बड़ी संख्या में लोग अपने वाहनों के साथ खड़े रहे। जैसे ही सुबह नाव की पहली फेरी शुरू हुई, घाट पर वाहनों का दबाव अचानक बढ़ गया। बताया जा रहा है कि पहली फेरी में करीब 400 बाइक पहुंचीं, जिसके बाद घाट पर अफरातफरी जैसी स्थिति बन गई। गंगा पार करने की जल्दी में पहुंचे यात्रियों को सबसे अधिक परेशानी घाट की कीचड़ भरी जमीन ने दी।
बारिश और लगातार आवाजाही के कारण घाट का रास्ता कई जगह बेहद खराब हो गया था। नाव से उतरने और चढ़ने के दौरान बाइक के पहिए कीचड़ में धंसते रहे। कई दोपहिया वाहनों को यात्रियों और आसपास मौजूद लोगों की मदद से धक्का देकर बाहर निकालना पड़ा। भारी संख्या में बाइक एक साथ पहुंचने के कारण घाट पर जगह कम पड़ गई और वाहन एक-दूसरे के पीछे फंसते चले गए।
स्थिति यह रही कि कई यात्रियों को अपनी बाइक निकालने में काफी समय लग गया। जिन लोगों को सुबह की ट्रेन पकड़नी थी, वे समय पर स्टेशन नहीं पहुंच सके। ट्रेन छूटने के बाद यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई। कुछ लोगों को अगली ट्रेन का इंतजार करना पड़ा, जबकि कई यात्रियों के यात्रा कार्यक्रम पूरी तरह बिगड़ गए।
घाट पर रात से ही लोगों की भीड़ जमा होने लगी थी। दूर-दराज से आने वाले यात्री अपने वाहनों के साथ गंगा पार करने के लिए फेरी सेवा का इंतजार करते रहे। रात में पर्याप्त आवाजाही नहीं होने के कारण कई लोगों को घाट के आसपास ही समय बिताना पड़ा। सुबह फेरी शुरू होने की उम्मीद में यात्रियों ने रात किसी तरह गुजारी, लेकिन सुबह नाव लगने के बाद भी उन्हें राहत तुरंत नहीं मिली।
पहली फेरी में बड़ी संख्या में बाइक पहुंचने से घाट पर दबाव कई गुना बढ़ गया। एक ओर यात्री जल्द से जल्द दूसरी तरफ पहुंचना चाहते थे, वहीं दूसरी ओर कीचड़ और संकरे रास्ते के कारण वाहनों की गति बेहद धीमी रही। कई बाइक के पहिए मिट्टी में धंसने से चालक उन्हें खुद निकाल नहीं पा रहे थे। ऐसे में आसपास के लोगों ने धक्का लगाकर वाहनों को बाहर निकालने में मदद की।
यात्रियों का कहना था कि फेरी सेवा पर निर्भर लोगों के लिए घाट तक पहुंचने और वहां से वाहन निकालने की व्यवस्था सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। नाव से गंगा पार करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि दोनों तरफ घाट पर वाहनों के आने-जाने के लिए समुचित रास्ता भी जरूरी है। कीचड़ के कारण सामान्य बाइक सवार भी परेशान हुए और बुजुर्ग यात्रियों तथा परिवार के साथ सफर करने वालों को और अधिक दिक्कत झेलनी पड़ी।
सुबह-सुबह जब बड़ी संख्या में बाइक एक साथ घाट पर पहुंचीं तो स्थिति और जटिल हो गई। वाहनों की लंबी कतार लग गई। नाव पर चढ़ाने के दौरान भी सावधानी बरतनी पड़ी। एक-एक कर बाइक को नाव तक पहुंचाने और फिर उतारने में समय लगा। इस पूरी प्रक्रिया में यात्रियों को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।
सबसे ज्यादा परेशानी उन यात्रियों को हुई जिनके पास आगे की यात्रा के लिए पहले से तय समय था। कई लोग ट्रेन पकड़ने के हिसाब से घाट पर पहुंचे थे। उन्हें उम्मीद थी कि पहली फेरी से गंगा पार कर समय पर स्टेशन पहुंच जाएंगे, लेकिन घाट पर कीचड़ और वाहनों की भीड़ के कारण समय निकलता गया। आखिरकार कई यात्रियों की ट्रेन छूट गई।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, गंगा पार करने के लिए फेरी सेवा पर निर्भरता बढ़ने के साथ घाट की आधारभूत व्यवस्था पर भी ध्यान देने की जरूरत है। खासकर बरसात के बाद घाट की मिट्टी और कीचड़ की समस्या यात्रियों के लिए लगातार परेशानी पैदा करती है। अगर वाहन उतारने-चढ़ाने वाले हिस्से को व्यवस्थित किया जाए और कीचड़ वाले रास्ते पर बेहतर इंतजाम हो तो यात्रियों को काफी राहत मिल सकती है।
घाट पर मौजूद लोगों ने यह भी बताया कि सुबह के समय ट्रेन, बस या अन्य साधनों से आगे जाने वाले यात्रियों की संख्या काफी रहती है। ऐसे यात्रियों के लिए फेरी का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। फेरी थोड़ी देर से चले या घाट पर वाहन निकालने में ज्यादा समय लगे तो इसका सीधा असर उनकी आगे की यात्रा पर पड़ता है। यही वजह है कि पहली फेरी में भारी भीड़ और कीचड़ के कारण हुई देरी ने यात्रियों की परेशानी कई गुना बढ़ा दी।
करीब 400 बाइक की एक साथ आवाजाही ने यह भी दिखा दिया कि सामान्य दिनों की तुलना में यात्रियों की संख्या बढ़ने पर घाट की मौजूदा व्यवस्था कितनी जल्दी दबाव में आ जाती है। वाहन बढ़ने के साथ पार्किंग, चढ़ाने-उतारने, रास्ते और कीचड़ से निपटने की व्यवस्था भी जरूरी हो जाती है। इन व्यवस्थाओं के अभाव में यात्रियों को खुद ही अपने वाहन निकालने के लिए मशक्कत करनी पड़ती है।
सुबह की इस अव्यवस्था के बीच कई यात्री अपने सामान और बाइक संभालते नजर आए। कुछ लोगों ने ट्रेन छूटने के बाद अपनी आगे की यात्रा की नई योजना बनाई। जिन लोगों के लिए ट्रेन पकड़ना जरूरी था, उन्हें अतिरिक्त समय और खर्च दोनों का सामना करना पड़ा। घाट पर मौजूद भीड़ के कारण जल्दबाजी में वाहन निकालना भी जोखिम भरा रहा।
भागलपुर में गंगा के दोनों किनारों के बीच आवागमन के लिए फेरी सेवा कई यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण साधन है। ऐसे में घाट की स्थिति सीधे तौर पर रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को प्रभावित करती है। रात से इंतजार कर रहे यात्रियों को सुबह पहली फेरी मिलने के बाद भी यदि कीचड़, भीड़ और वाहनों की अव्यवस्था से जूझना पड़े तो उनकी परेशानी स्वाभाविक रूप से बढ़ जाती है।
इस घटना ने एक बार फिर घाट पर यात्रियों और वाहनों की बढ़ती संख्या के अनुरूप सुविधाएं उपलब्ध कराने की जरूरत को सामने ला दिया है। खासकर बारिश के मौसम में घाट के रास्ते को कीचड़ से मुक्त रखने, वाहन उतारने-चढ़ाने के लिए मजबूत रास्ता बनाने और भीड़ के समय वाहनों की आवाजाही को व्यवस्थित करने की जरूरत महसूस की जा रही है। इससे न सिर्फ यात्रियों का समय बचेगा बल्कि ट्रेन और अन्य कनेक्टिंग साधनों से सफर करने वालों को भी राहत मिल सकेगी।