SIR विरोध: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, 11 मेट्रो स्टेशन बंद; मुंबई में CJP का आंदोलन, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान जंतर-मंतर से प्रदर्शनकारी हिरासत मे। 11 मेट्रो स्टेशनो के गेट बंद रहे। मुंबई में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

SIR के खिलाफ दिल्ली और मुंबई में विरोध प्रदर्शन हुए। जंतर-मंतर पर AAP, लेफ्ट और छात्र संगठनों के प्रदर्शन के बीच सुरक्षा बढ़ाई गई और 11 मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास बंद किए गए। मुंबई में CJP ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की।

मुंबई: भारत में मतदाता सूची के Special Intensive Revision (SIR) को लेकर शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को दिल्ली और मुंबई में विरोध प्रदर्शन हुए। दिल्ली के जंतर-मंतर पर आम आदमी पार्टी (AAP), लेफ्ट और छात्र संगठनों से जुड़े प्रदर्शनकारियों ने प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया और मध्य दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। दूसरी ओर, मुंबई में Cockroach Janta Party (CJP) ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का आह्वान किया।

दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में भारी पुलिस तथा केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई। दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी थी और नई दिल्ली जिले में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, सौरभ भारद्वाज समेत प्रदर्शनकारी हिरासत में

AAP की दिल्ली इकाई के अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज प्रदर्शन में शामिल होने के लिए जंतर-मंतर पहुंचे। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करना लोकतांत्रिक अधिकार है और दावा किया कि AAP ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए पहले ही अनुमति मांगी थी।

प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने सौरभ भारद्वाज सहित कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। शुरुआती रिपोर्टों में करीब 150 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई थी। बाद की रिपोर्टों में दिल्ली पुलिस द्वारा 500 से अधिक लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी गई। इसलिए हिरासत का आंकड़ा दिन के अलग-अलग समय पर बदलता रहा।

जंतर-मंतर के आसपास पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) और अन्य केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी। क्षेत्र में कई स्तरों पर बैरिकेडिंग की गई और प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने वाले मार्गों पर सुरक्षा जांच बढ़ाई गई।

11 मेट्रो स्टेशनों के एंट्री-एग्जिट गेट बंद

प्रदर्शन और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए दिल्ली मेट्रो के 11 स्टेशनों पर प्रवेश और निकास बंद किया गया। दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) के अनुसार, इन स्टेशनों पर एंट्री-एग्जिट अगले आदेश तक बंद रखे गए, हालांकि कुछ स्टेशनों पर इंटरचेंज सुविधा जारी रही।

बंद किए गए स्टेशनों में जनपथ, पटेल चौक, केंद्रीय सचिवालय, राजीव चौक, सेवा तीर्थ, मंडी हाउस, लोक कल्याण मार्ग, INA और अन्य केंद्रीय दिल्ली के स्टेशन शामिल थे। विभिन्न रिपोर्टों में बंद स्टेशनों की सूची दी गई है।

यह व्यवस्था जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन के साथ-साथ गांधी जयंती के कार्यक्रमों के कारण मध्य दिल्ली में लागू व्यापक सुरक्षा और यातायात प्रतिबंधों के बीच की गई।

BNSS की धारा 163 के तहत सभा पर रोक

नई दिल्ली जिले में BNSS की धारा 163 के तहत निषेधाज्ञा लागू की गई। इसके तहत निर्धारित क्षेत्र में लोगों के एकत्र होने, जुलूस और प्रदर्शन पर प्रतिबंध लगाया गया था। दिल्ली पुलिस के अनुसार, प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने की संभावना को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई थी। जंतर-मंतर की ओर जाने वाले कई मार्गों पर बैरिकेड लगाए गए। करीब 5,000 पुलिसकर्मियों और केंद्रीय बलों की तैनाती की जानकारी भी सामने आई।

प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच अनुमति को लेकर मतभेद भी सामने आया। प्रदर्शन में शामिल नेताओं का कहना था कि शांतिपूर्ण विरोध के लिए अनुमति मांगी गई थी, जबकि पुलिस ने प्रस्तावित प्रदर्शन को अनुमति नहीं दी।

मुंबई में CJP का प्रदर्शन

इधर मुंबई में Cockroach Janta Party (CJP) ने शुक्रवार शाम शिवाजी पार्क में प्रदर्शन का कार्यक्रम घोषित किया। संगठन के संस्थापक अभिजीत दीपके ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की है। CJP ने SIR को रोकने, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता और मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया में नागरिक समाज की भागीदारी जैसे मुद्दे उठाए हैं। संगठन ने कहा है कि उसका आंदोलन अन्य शहरों तक भी बढ़ाया जाएगा।

मुंबई पुलिस ने पहले शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति देने से इनकार किया था। इसके बावजूद CJP ने आंदोलन जारी रखने की घोषणा की। संगठन की ओर से कहा गया है कि आंदोलन की शुरुआत मुंबई से होगी और आगे अन्य शहरों में भी कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

CJP ने उठाए SIR और मतदाता सूची से जुड़े सवाल

CJP की ओर से SIR और मतदाता सूची की प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठाए गए हैं। संगठन ने दावा किया है कि मौजूदा प्रक्रिया में नए मतदाताओं से पिछली SIR सूची में स्वयं या परिवार के सदस्यों के नाम से संबंधित जानकारी मांगना उचित नहीं है। संगठन ने वोटर डेटाबेस के नियंत्रण, राज्यों की पहुंच और मतदाता सूची में नामों के जुड़ने या हटने की प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं।

पश्चिम बंगाल में नाम हटाए जाने से संबंधित करीब 16 लाख अपीलों और गोवा में जांच के बाद पात्र पाए गए 97 मतदाताओं के नाम सॉफ्टवेयर समस्या के कारण अंतिम सूची में शामिल नहीं होने के दावों को भी CJP से जुड़े पक्षों ने सवालों के रूप में उठाया है। इन दावों को संगठन के आरोप के रूप में देखा जाना चाहिए; इनके संबंध में स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि आवश्यक है।

चुनाव आयोग का SIR को लेकर क्या कहना है?

चुनाव आयोग के अनुसार SIR का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई पात्र नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न हो। आयोग ने SIR के लिए संवैधानिक और वैधानिक प्रावधानों का हवाला दिया है। आयोग के आधिकारिक पोर्टल पर SIR 2026 के तहत मतदाताओं को अपना नाम पिछली SIR सूची में खोजने, नए मतदाता के रूप में Form 6 के जरिए आवेदन करने और संबंधित प्रक्रियाओं के बारे में जानकारी प्राप्त करने की सुविधा उपलब्ध है।

ECI के अनुसार, SIR प्रक्रिया के दौरान बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर फॉर्म उपलब्ध कराने और प्राप्त करने का काम करते हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि पात्र नागरिकों को मतदाता सूची में शामिल करने के लिए निर्धारित प्रक्रिया के तहत आवेदन किया जा सकता है।

मनोज झा ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए

जंतर-मंतर के प्रदर्शन में RJD सांसद मनोज झा भी पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शन की अनुमति से जुड़े सवाल पर कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से विरोध करने के लिए अनुमति की आवश्यकता को लेकर सवाल उठाया जाना चाहिए।

उन्होंने गांधी जयंती का उल्लेख करते हुए पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति जताई और कहा कि सरकार, प्रधानमंत्री और गृह मंत्री कथित गलत कार्यों को छिपा नहीं पाएंगे। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।

विवाद का केंद्र SIR और चुनाव आयोग की जवाबदेही

SIR को लेकर विवाद अब केवल मतदाता सूची की प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा है। विपक्षी दलों, छात्र संगठनों और नागरिक समूहों का एक वर्ग चुनाव आयोग से प्रक्रिया की पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर सवाल पूछ रहा है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग SIR को मतदाता सूची को अद्यतन करने और पात्र तथा अपात्र मतदाताओं की पहचान से जुड़ी प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करता है। आयोग की आधिकारिक व्यवस्था में मतदाताओं के लिए नाम खोजने, नए पंजीकरण और अपील से जुड़ी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं।

2 अक्टूबर को दिल्ली और मुंबई में हुए विरोध प्रदर्शनों ने SIR को लेकर राजनीतिक और नागरिक बहस को फिर केंद्र में ला दिया है। दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था, हिरासत और मेट्रो प्रतिबंध प्रमुख घटनाक्रम रहे, जबकि मुंबई में CJP ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग को लेकर अपना आंदोलन शुरू किया।

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