भारत के रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि जुड़ने की दिशा में काम चल रहा है। Defence Research and Development Organisation के चेयरमैन Samir V. Kamat ने हाल ही में ANI National Security Summit में यह जानकारी दी कि भारत हाइपरसोनिक तकनीक पर तेजी से काम कर रहा है।
नई दिल्ली: भारत अपने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी तकनीकी छलांग लगाने की तैयारी में है। देश की रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) अब हाइपरसोनिक हथियार प्रणालियों पर तेजी से काम कर रहा है, जिससे भारत की रणनीतिक क्षमता और मजबूत होने की उम्मीद है। DRDO के प्रमुख वैज्ञानिक समीर वी कामत ने हाल ही में बताया कि भारत दो अलग-अलग हाइपरसोनिक प्रोग्राम विकसित कर रहा है—हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल और हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल।
भारत के दो बड़े हाइपरसोनिक प्रोजेक्ट
DRDO के अनुसार, भारत जिन दो प्रमुख हाइपरसोनिक हथियारों पर काम कर रहा है, वे हैं:
- हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल (Hypersonic Glide Vehicle – HGV)
- हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल (Hypersonic Cruise Missile)
इन दोनों तकनीकों को अगली पीढ़ी के अत्याधुनिक हथियार माना जाता है, जो दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को भेदने में सक्षम होते हैं।
क्या है हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल?
हाइपरसोनिक ग्लाइड मिसाइल एक ऐसी प्रणाली है जिसे शुरुआत में रॉकेट बूस्टर द्वारा तेज गति दी जाती है। इसके बाद यह अपने लक्ष्य की ओर बिना अतिरिक्त ईंधन के अत्यधिक गति से ग्लाइड करती है। मुख्य विशेषताएं:
- बूस्टर से शुरुआती गति मिलती है
- फिर यह वायुमंडल में ग्लाइड करती है
- दिशा बदलने में सक्षम होती है
- ट्रैक करना बेहद मुश्किल
DRDO प्रमुख के अनुसार, यह प्रोजेक्ट विकास के मामले में आगे है और इसका परीक्षण जल्द शुरू हो सकता है।
क्या है हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल?
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हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल पूरी उड़ान के दौरान अपने इंजन की मदद से ऊर्जा प्राप्त करती है। इसमें स्क्रैमजेट इंजन (Scramjet Engine) का उपयोग होता है, जो अत्यधिक गति पर भी लगातार काम करता है। मुख्य विशेषताएं:
- स्क्रैमजेट इंजन आधारित तकनीक
- पूरी उड़ान के दौरान पावर मिलती है
- लंबी दूरी तक सटीक हमला क्षमता
- अत्यधिक तेज गति
यह तकनीक अभी विकास के शुरुआती और जटिल चरण में मानी जा रही है। DRDO प्रमुख समीर वी कामत ने यह भी बताया कि भारत की अगली पीढ़ी की बैलिस्टिक मिसाइल अग्नि-6 मिसाइल के लिए संगठन पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा कि यह प्रोजेक्ट सरकार की मंजूरी पर निर्भर करता है, और मंजूरी मिलते ही विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ेगा।









