भोपाल में टैक्सी हड़ताल से यात्री परेशान, कैब बंद होने पर ऑटो चालक मांग रहे डेढ़ से दोगुना किराया

भोपाल में टैक्सी हड़ताल से Ola-Uber कैब सेवाएं प्रभावित हैं। रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पर यात्री परेशान हैं, जबकि कुछ ऑटो चालक डेढ़ से दोगुना किराया मांग रहेहैं।

भोपाल में टैक्सी चालक संघ की हड़ताल से ओला, उबर समेत अन्य कैब सेवाएं प्रभावित हैं। रेलवे स्टेशन पर यात्रियों को कैब नहीं मिली, जबकि कुछ ऑटो चालकों पर सामान्य से डेढ़ से दोगुना किराया मांगने के आरोप लगे।

भोपाल: एग्रीगेटर कंपनियों के खिलाफ टैक्सी चालक संघ की हड़ताल के कारण भोपाल में कैब सेवाएं बंद हैं। इसका सबसे ज्यादा असर रेलवे स्टेशन और एयरपोर्ट पहुंचने वाले यात्रियों पर दिखाई दे रहा है। कैब उपलब्ध नहीं होने से यात्रियों को ऑटो और दूसरे साधनों का सहारा लेना पड़ रहा है। कुछ यात्रियों ने ऑटो चालकों पर ज्यादा किराया मांगने की शिकायत की है।

रेलवे स्टेशन पर कैब नहीं मिली, यात्रियों को करना पड़ा इंतजार

भोपाल में मंगलवार रात 12 बजे से ओला, उबर समेत अन्य ऑनलाइन कैब सेवाओं का संचालन प्रभावित है। बुधवार सुबह इसका असर भोपाल रेलवे स्टेशन पर भी दिखाई दिया। यात्रियों ने कई बार ऑनलाइन कैब बुक करने की कोशिश की, लेकिन वाहन उपलब्ध नहीं हो सके।

बाहर से भोपाल पहुंचे यात्रियों को सामान के साथ काफी देर तक स्टेशन के बाहर इंतजार करना पड़ा। कैब नहीं मिलने के कारण कई यात्रियों ने ऑटो का सहारा लिया। यात्रियों का आरोप है कि कुछ ऑटो चालकों ने कैब की कमी का फायदा उठाकर सामान्य किराए से डेढ़ से दो गुना तक रकम मांगी।

एक यात्री आकांक्षा ने बताया कि वह करीब आधे घंटे से कैब का इंतजार कर रही थीं। उनके घुटने में परेशानी है और उनके साथ दो बेटियां भी हैं। उन्हें रोहित नगर स्थित अपोलो अस्पताल जाना था, लेकिन कैब उपलब्ध नहीं हो सकी।

एयरपोर्ट और अस्पताल जाने वाले यात्रियों पर भी असर

कर्नाटक से भोपाल पहुंचे यात्री सत्यम को सुल्तानिया अस्पताल जाना था। उन्होंने बताया कि काफी देर तक ऑनलाइन कैब बुक करने की कोशिश की, लेकिन वाहन नहीं मिला। इसके बाद उन्हें स्टेशन के बाहर दूसरे साधनों की तलाश करनी पड़ी।

कैब सेवा बंद होने के कारण ऑटो यात्रियों के लिए प्रमुख विकल्प बन गए हैं। रेलवे स्टेशन, एयरपोर्ट, बस स्टैंड और शहर के प्रमुख इलाकों के बीच सफर करने वाले लोगों को हड़ताल के दौरान ज्यादा इंतजार और अधिक किराए की समस्या का सामना करना पड़ सकता है।

टैक्सी संगठनों की किराया तय करने की मांग

टैक्सी चालक संघ का कहना है कि एग्रीगेटर कंपनियां अपनी सुविधा के अनुसार किराया तय करती हैं, जबकि ड्राइवरों के ईंधन, वाहन की किस्त, बीमा और रखरखाव जैसे खर्च लगातार बढ़ रहे हैं।

संगठन सरकार से टैक्सी का स्थायी और उचित किराया तय करने की मांग कर रहा है। संघ की मांग है कि करीब 22 से 30 रुपये प्रति किलोमीटर किराया, 1 से 2 रुपये प्रति मिनट टाइम चार्ज और बेस फेयर तय किया जाए। इसके बाद एग्रीगेटर कंपनियों को निर्धारित दरों के अनुसार सेवाएं संचालित करने के निर्देश दिए जाएं।

संयुक्त मोर्चे ने प्राइवेट नंबर वाली कारों, बाइक और ई-रिक्शा के व्यावसायिक इस्तेमाल पर भी रोक लगाने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि ऐसे गैर-कमर्शियल वाहनों के जरिए यात्रियों को ले जाने से नियमित कमर्शियल टैक्सी चालकों की आय प्रभावित हो रही है।

बोर्ड ऑफिस चौराहे पर होगा प्रदर्शन

टैक्सी चालकों के संयुक्त मोर्चे की ओर से 19 अगस्त को बोर्ड ऑफिस चौराहे पर धरना-प्रदर्शन किया जा रहा है। संगठन मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर अपनी मांगों के समाधान की मांग करेगा।

हड़ताल के दौरान स्टेशन पर यात्रियों को लेकर पहुंचने वाली कुछ कैब को संगठन से जुड़े लोगों द्वारा रोकने की भी जानकारी सामने आई है। संगठन के पदाधिकारी ड्राइवरों से हड़ताल के दौरान वाहन नहीं चलाने की अपील कर रहे हैं।

आरटीओ जितेंद्र शर्मा ने कहा है कि कैब संगठन के प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए बुलाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि ओवरचार्जिंग की शिकायत मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।

मांगें नहीं मानीं तो अनिश्चितकालीन बंद की चेतावनी

टैक्सी संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर सरकार और एग्रीगेटर कंपनियों की ओर से उनकी मांगों का समाधान नहीं किया गया तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन टैक्सी बंद में बदला जा सकता है।

संगठन का कहना है कि बढ़ते परिचालन खर्च और मौजूदा किराए के कारण ड्राइवर आर्थिक दबाव में हैं। वहीं, संयुक्त मोर्चे ने आम यात्रियों को हो रही परेशानी पर खेद जताते हुए कहा है कि आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से किया जा रहा है।

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