Bihar में राज्यसभा चुनाव 2026: NDA की पांचवीं सीट पर सियासी खींचतान तेज

बिहार में राज्यसभा चुनाव 2026 को लेकर एनडीए की पांचवीं सीट पर सियासी हलचल बढ़ गई है। सहयोगी दलों के बीच दावेदारी और समीकरणों को लेकर चर्चा तेज है। जानें

बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सत्तारूढ़ गठबंधन में खींचतान तेज हो गई है। चार सीटों के बंटवारे के बाद बची एक सीट पर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के भीतर घमासान मचा हुआ है।

पटना: बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए होने वाले चुनाव से पहले सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर एक सीट को लेकर जोरदार राजनीतिक हलचल शुरू हो गई है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) और जनता दल (यूनाइटेड) [JDU] के हिस्से की चार सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं, लेकिन पांचवीं सीट के लिए गठबंधन के छोटे सहयोगियों के बीच प्रतिस्पर्धा तेज हो गई है।

एनडीए के सहयोगी दल Jitan Ram Manjhi की पार्टी हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा (हम), Upendra Kushwaha की राष्ट्रीय लोक मोर्चा (आरएलएम) और Chirag Paswan के नेतृत्व वाली लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास) [LJP (R)] तीनों ने पांचवीं सीट पर अपना दावा ठोक दिया है।

छोटे सहयोगियों का दावा और पुराना वादा

हम और आरएलएम का कहना है कि विधानसभा चुनाव के दौरान भाजपा नेतृत्व ने उन्हें राज्यसभा की एक सीट देने का आश्वासन दिया था। दूसरी ओर, एलजेपी (आर) अपने 19 विधायकों के समर्थन का हवाला देते हुए कह रही है कि संख्या बल के आधार पर उसे यह सीट मिलनी चाहिए। हालांकि, सूत्रों के मुताबिक जदयू नेतृत्व और जीतनराम मांझी एलजेपी (आर) को यह सीट देने के पक्ष में नहीं हैं। 

वहीं भाजपा भी आरएलएम को लेकर सतर्क नजर आ रही है, क्योंकि उपेंद्र कुशवाहा के पुत्र को हाल ही में राज्य सरकार में मंत्री पद और विधान परिषद की सदस्यता मिल चुकी है। ऐसे में भाजपा अतिरिक्त राजनीतिक रियायत देने के मूड में नहीं दिख रही।

जदयू में संभावित उम्मीदवारों पर चर्चा

Bihar में राज्यसभा चुनाव 2026: NDA की पांचवीं सीट पर सियासी खींचतान तेज

जदयू के दो राज्यसभा सदस्य इस बार सेवानिवृत्त हो रहे हैं—Harivansh Narayan Singh, जो वर्तमान में राज्यसभा के उपसभापति हैं, और केंद्रीय मंत्री Ram Nath Thakur। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रखते हुए रामनाथ ठाकुर को तीसरा कार्यकाल दे सकते हैं, क्योंकि वे अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) से आते हैं।

दूसरे संभावित नामों में जदयू के राष्ट्रीय महासचिव मनीष वर्मा और पूर्व नेता आरसीपी सिंह का नाम भी चर्चा में है। बताया जा रहा है कि आरसीपी सिंह और उपेंद्र कुशवाहा भाजपा नेतृत्व के संपर्क में बने हुए हैं, जिससे सियासी समीकरण और जटिल हो गए हैं।

पांचवीं सीट का गणित क्या कहता है?

बिहार विधानसभा में एक राज्यसभा सीट जीतने के लिए 41 वोटों की आवश्यकता है। वर्तमान संख्या बल के आधार पर भाजपा (89 विधायक) और जदयू (85 विधायक) दो-दो सीटें आसानी से जीत सकती हैं। इन चार सीटों के बाद एनडीए के पास 38 अतिरिक्त वोट बचते हैं। इसका मतलब है कि पांचवीं सीट सुनिश्चित करने के लिए एनडीए को कम से कम तीन अतिरिक्त वोटों की जरूरत होगी।

वहीं विपक्षी महागठबंधन के पास 35 विधायक हैं, जो आवश्यक संख्या से छह कम है। ऐसे में विपक्ष को जीत के लिए एआईएमआईएम और बसपा के विधायकों का समर्थन अनिवार्य होगा।

विपक्ष और एनडीए की रणनीति

एनडीए खेमे का दावा है कि उसे आवश्यक अतिरिक्त वोट मिल सकते हैं। भाजपा सूत्रों का मानना है कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एक विधायक और कांग्रेस के कुछ विधायकों का समर्थन मिल सकता है। दूसरी ओर, राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) एआईएमआईएम को साधने की कोशिश में है। इसके लिए वह दिवंगत नेता मोहम्मद शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब के नाम को राजनीतिक रूप से इस्तेमाल करने की रणनीति पर काम कर रही है। हालांकि कांग्रेस और बसपा के रुख को लेकर विपक्ष में भी अनिश्चितता बनी हुई है।

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