तेलंगाना के खम्मम में 22A प्रतिबंधित संपत्तियों की सूची में कथित तौर पर शामिल निजी जमीनों को हटाने की मांग को लेकर BJP ने महाधरना किया। पार्टी ने प्रभावित किसानों और भूमि मालिकों को राहत देने तथा राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी के इस्तीफे की मांग की।
खम्मम: तेलंगाना के खम्मम में 22A प्रतिबंधित संपत्तियों की सूची को लेकर राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। BJP ने गुरुवार को कलेक्ट्रेट के पास महाधरना आयोजित कर कथित तौर पर 22A सूची में शामिल निजी स्वामित्व वाली जमीनों को बाहर करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान BJP नेताओं ने राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी के इस्तीफे की भी मांग की। पार्टी का आरोप है कि 22A सूची में निजी भूमि शामिल किए जाने के कारण लंबे समय से अपनी जमीन पर अधिकार रखने वाले किसान, गरीब और मध्यम वर्गीय परिवार उसे बेचने या पंजीकृत कराने में कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं।
BJP खम्मम जिला अध्यक्ष नेल्लुरी कोटेश्वर राव ने कलेक्ट्रेट के पास प्रदर्शन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि पार्टी सार्वजनिक समस्याओं के समाधान के लिए पीछे नहीं हटेगी और जरूरत पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
दशकों से जमीन रखने वालों को परेशानी का दावा
BJP जिला अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कई किसान और गरीब एवं मध्यम वर्गीय परिवार दशकों से जिन जमीनों पर कब्जा और स्वामित्व रखते हैं, उन्हें 22A प्रतिबंधित सूची में शामिल किए जाने के बाद उनके लिए संपत्ति का इस्तेमाल करना मुश्किल हो गया है।
पार्टी के अनुसार, प्रभावित भूमि मालिक अपनी जमीन बेचने या उसका पंजीकरण कराने में सक्षम नहीं हैं। इससे उन परिवारों के सामने आर्थिक समस्याएं पैदा हो रही हैं, जिन्हें अपनी संपत्ति का इस्तेमाल बच्चों की शिक्षा, विवाह, चिकित्सा खर्च या कृषि में निवेश जैसी जरूरी जरूरतों के लिए करना था।
राव ने कहा कि यदि किसी जमीन को गलत तरीके से 22A सूची में शामिल किया गया है, तो उसे सूची से हटाया जाना चाहिए और वास्तविक भूमि मालिकों को राहत मिलनी चाहिए।
जमीन रिकॉर्ड और 22A सूची में विसंगति का आरोप
BJP नेता ने आरोप लगाया कि भूमि रिकॉर्ड और प्रतिबंधित संपत्तियों की सूची के बीच विसंगतियां मौजूद हैं। उनके अनुसार, इन कथित विसंगतियों के कारण ऐसे भूमि मालिक भी प्रभावित हो रहे हैं, जिनके पास अपनी संपत्ति से जुड़े पुराने दस्तावेज और अधिकार हैं।
राव ने कहा कि जब किसी निजी जमीन को प्रतिबंधित सूची में डाल दिया जाता है तो संबंधित मालिक अपनी संपत्ति का उपयोग अपनी तत्काल आर्थिक जरूरतों के लिए नहीं कर पाता।
उन्होंने विशेष रूप से शिक्षा, विवाह, चिकित्सा उपचार और कृषि निवेश जैसे खर्चों का उल्लेख किया। BJP का कहना है कि इन परिस्थितियों में गलत तरीके से 22A सूची में शामिल जमीनों की समीक्षा कर प्रभावित लोगों को राहत दी जानी चाहिए।
राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी पर निशाना
BJP ने इस मुद्दे पर राज्य के राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी को भी निशाने पर लिया। राव ने आरोप लगाया कि कांग्रेस सरकार ने पिछली सरकारों की गलतियों को सुधारने का वादा किया था, लेकिन 22A से जुड़ी शिकायतों का समाधान नहीं किया गया।
उन्होंने विशेष रूप से राजस्व विभाग की जिम्मेदारी संभाल रहे मंत्री की भूमिका पर सवाल उठाए। BJP नेता ने कहा कि यदि मंत्री प्रभावित भूमि मालिकों की समस्याओं का समाधान नहीं कर सकते तो उन्हें पद से इस्तीफा देना चाहिए।
BJP ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि प्रभावित भूमि मालिकों को राहत नहीं मिली तो पार्टी अपना आंदोलन जारी रखेगी।
प्रदर्शन में बड़ी संख्या में लोग शामिल
खम्मम में आयोजित महाधरना में BJP के नेताओं और कार्यकर्ताओं के अलावा बड़ी संख्या में किसान तथा कथित तौर पर 22A प्रतिबंधों से प्रभावित भूमि मालिक शामिल हुए।
जिले के विभिन्न हिस्सों से आए प्रदर्शनकारियों ने राहत की मांग को लेकर नारे लगाए। प्रदर्शन के बाद BJP नेताओं ने जिला कलेक्टर को एक ज्ञापन भी सौंपा।
इस ज्ञापन के जरिए पार्टी ने कथित रूप से गलत तरीके से 22A सूची में शामिल निजी जमीनों की समीक्षा करने और पात्र भूमि मालिकों को राहत देने की मांग रखी।
प्रदर्शन में पूर्व Kisan Morcha अध्यक्ष और वारंगल प्रभारी कोंडापल्ली श्रीधर रेड्डी, नलगोंडा प्रभारी सन्ने उदय प्रताप, पूर्व जिला अध्यक्ष एवं राज्य कार्यकारिणी सदस्य गल्ला सत्यनारायण सहित कई नेता मौजूद रहे।
राज्य प्रवक्ताओं नंबूरी रामलिंगेश्वर राव और वकदानी पुल्लाराव यादव के अलावा जिला और राज्य स्तर के कई पदाधिकारी तथा पार्टी कार्यकर्ताओं ने भी प्रदर्शन में हिस्सा लिया।
पूरे तेलंगाना में राजनीतिक मुद्दा बना 22A विवाद
22A भूमि सूची का मुद्दा अब केवल खम्मम तक सीमित नहीं है। यह पूरे तेलंगाना में एक प्रमुख राजनीतिक विवाद के रूप में उभरा है।
BJP के विधायकों ने चल रहे विधानसभा सत्र के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए न्यायिक जांच की मांग की है। वहीं, BRS ने भी प्रतिबंधित भूमि सूची की जांच और इस संबंध में एक श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।
इस तरह 22A सूची को लेकर राज्य की प्रमुख विपक्षी पार्टियां सरकार पर दबाव बना रही हैं।
सरकार ने गलतियां सुधारने की बात कही
वहीं, राज्य सरकार का रुख है कि 22A सूची में मौजूद गलतियों को ठीक किया जाएगा। राजस्व मंत्री पोंगुलेटी श्रीनिवास रेड्डी ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि केवल इस आधार पर पंजीकरण आवेदन खारिज न किए जाएं कि संबंधित संपत्ति 22A सूची में दर्ज है।
मंत्री ने अधिकारियों से प्रत्येक मामले की व्यापक जांच करने और पात्र आवेदकों को राहत देने को कहा है।
सरकार की ओर से यह भी स्वीकार किया गया है कि कुछ जमीनें गलती से प्रतिबंधित सूची में शामिल हो सकती हैं। मंत्री ने कहा है कि ऐसी त्रुटियों को सुधारा जाएगा।
यह सरकार के उस रुख से जुड़ा है जिसके तहत 22A सूची में शामिल संपत्तियों के मामलों को व्यक्तिगत स्तर पर जांचने और पात्र भूमि मालिकों को राहत देने की बात कही गई है।
तेलंगाना हाईकोर्ट में भी उठ चुका है मुद्दा
निजी जमीनों को 22A सूची में शामिल किए जाने से जुड़े विवादों पर तेलंगाना हाईकोर्ट में भी विभिन्न मामलों की सुनवाई हुई है।
इन मामलों ने निजी स्वामित्व वाली संपत्तियों के लेन-देन पर प्रतिबंध लगाते समय निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के महत्व को सामने रखा है।
22A प्रावधान के तहत किसी संपत्ति को प्रतिबंधित सूची में शामिल किए जाने से उसके पंजीकरण और लेन-देन पर असर पड़ सकता है। ऐसे में प्रभावित भूमि मालिकों के लिए सूची में जमीन शामिल किए जाने के आधार और प्रक्रिया महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
BJP ने आंदोलन जारी रखने की चेतावनी दी
खम्मम में प्रदर्शन के दौरान BJP नेताओं ने कहा कि पार्टी उन वास्तविक भूमि मालिकों के लिए आंदोलन जारी रखेगी, जो 22A प्रतिबंधों से प्रभावित हुए हैं।
BJP की मांग है कि जिन निजी जमीनों को कथित तौर पर गलत तरीके से प्रतिबंधित सूची में शामिल किया गया है, उनकी समीक्षा की जाए और उन्हें सूची से हटाया जाए।
दूसरी ओर, सरकार पहले ही कह चुकी है कि 22A सूची में हुई गलतियों को सुधारा जाएगा और अधिकारियों को केवल सूची में नाम होने के आधार पर पंजीकरण आवेदन खारिज नहीं करने का निर्देश दिया गया है।
इस मुद्दे पर BJP, BRS और कांग्रेस सरकार के बीच राजनीतिक टकराव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। फिलहाल, खम्मम में हुआ महाधरना इस बात का संकेत है कि 22A भूमि प्रतिबंधों का मुद्दा राज्य में प्रभावित भूमि मालिकों के साथ-साथ राजनीतिक दलों के लिए भी एक बड़ा विषय बना हुआ है।











