BMC चुनाव 2026 से पहले राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे ने साझा मंच लिया। राज ने हिंदी थोपने का विरोध किया और मराठी अस्मिता की रक्षा की चेतावनी दी। उद्धव ने मुंबई सुरक्षा, भ्रष्टाचार और अडानी समूह के प्रभाव पर जोर दिया।
BMC Elections 2026: बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) चुनाव से ठीक पहले महाराष्ट्र की राजनीति में तनाव बढ़ गया है। महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के प्रमुख राज ठाकरे और शिवसेना (UBT) के नेता उद्धव ठाकरे लंबे समय बाद एक ही मंच पर नजर आए। यह भव्य रैली रविवार को आयोजित की गई, जिसमें दोनों नेताओं ने 'मराठी अस्मिता' को केंद्र में रखकर अपने चुनाव अभियान को धार दी।
हिंदी थोपी तो लात मारूँगा: राज का बयान
रैली में राज ठाकरे ने उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रवासियों को सीधे चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि हिंदी को थोपने का प्रयास बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने भीड़ को संबोधित करते हुए कहा, "यूपी और बिहार के लोगों को यह समझना चाहिए कि हिंदी आपकी भाषा नहीं है। मुझे इस भाषा से नफरत नहीं है, लेकिन अगर आप इसे हमारे ऊपर थोपने की कोशिश करेंगे, तो मैं आपको लात मारूँगा।"
राज के इस बयान पर रैली में मौजूद हजारों समर्थकों ने जोरदार तालियों और नारों से समर्थन किया। उन्होंने इसे मराठी मानुष के अधिकार और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा से जोड़ा।
मराठी मानुष के लिए आखिरी चुनाव
राज ठाकरे ने नागरिक चुनाव को निर्णायक बताया और चेतावनी दी कि BMC पर नियंत्रण से बढ़कर यह चुनाव मराठी मानुष के भविष्य का सवाल है। उन्होंने कहा, "वे हर तरफ से महाराष्ट्र आ रहे हैं और आपका हिस्सा छीन रहे हैं। अगर ज़मीन और भाषा चली गई, तो आप खत्म हो जाएंगे। यह मराठी मानुष के लिए आखिरी चुनाव है।"
उन्होंने समर्थकों को मतदान के दिन सतर्क रहने का निर्देश दिया। राज ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता सुबह 6 बजे तैयार रहें और ईवीएम और कथित डबल वोटरों पर कड़ी निगरानी रखें।
उद्धव ठाकरे का संदेश

उद्धव ठाकरे ने कहा कि यह मिलन मुंबई पर बड़े खतरे के कारण हुआ। दोनों नेताओं ने अपने मतभेद भुलाकर "मराठी मानुष, हिंदुओं और महाराष्ट्र के लिए" एकजुटता दिखाई। उन्होंने कहा कि मराठी के लिए प्यार खून में होना चाहिए और दोनों ने खुद को मुंबई को बाहरी नियंत्रण से बचाने वाला विकल्प बताया। राज ने कहा कि मुंबई गंभीर खतरे का सामना कर रहा है, और यह गठबंधन इसी साझा आकलन के कारण हुआ।
बीजेपी पर आरोप
दोनों नेताओं ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि वह मुंबई पर सांस्कृतिक और आर्थिक एजेंडा चलाकर महाराष्ट्र के हितों को कमजोर कर रही है। राज ने तीन-भाषा फॉर्मूले और कक्षा 1 से 5 तक हिंदी को अनिवार्य बनाने के प्रस्ताव को मराठी मानुष के खिलाफ साज़िश बताया।
उन्होंने कहा, "किसी भाषा के खिलाफ कोई गुस्सा नहीं है, बल्कि उसे थोपने के खिलाफ है। यह परीक्षा है कि मराठी मानुष जागरूक है या नहीं।"
अडानी ग्रुप का हवाला
राज और उद्धव ने मुंबई पर चल रही बड़ी परियोजनाओं का हवाला देते हुए कहा कि बीजेपी ने गौतम अडानी समूह का पक्ष लिया है। उन्होंने प्रस्तावित वधावन बंदरगाह, पालघर, ठाणे और मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में नियंत्रण के लिए योजनाओं का जिक्र किया।
राज ने कहा कि मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाओं से शहर को गुजरात के आर्थिक प्रभाव में लाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने मतदाताओं से गठबंधन का समर्थन करने का आग्रह किया, ताकि अडानी समूह को जमीन बेचने से रोका जा सके।
नाम बदलने का आरोप
उद्धव ठाकरे ने बीजेपी पर नकली हिंदुत्व और चुनाव से पहले विभाजनकारी राजनीति चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने तमिलनाडु के बीजेपी नेता अन्नामलाई की टिप्पणी का जिक्र किया, जिसमें बॉम्बे को मुंबई का नाम बदलने का सुझाव दिया गया था। उद्धव ने कहा कि यह बीजेपी के असली इरादों को उजागर करता है।
दोनों नेताओं ने BMC में भ्रष्टाचार का भी आरोप लगाया। उद्धव ने कहा कि पिछली शिवसेना-बीजेपी सरकार के दौरान 3 लाख करोड़ रुपये की अनियमितताएं हुईं। उन्होंने दावा किया कि इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में इस्तेमाल होने वाले 50 से 60 प्रतिशत सीमेंट अडानी समूह से खरीदे गए।










