बंगाल में मतदाता सूची के विशेष निरीक्षण (SIR) की न्यायिक जांच सोमवार से शुरू होगी। 150 सेशन जज और 250 अन्य अधिकारियों के मार्गदर्शन में हर जिले में तीन सदस्यीय निगरानी समिति बनाई जाएगी। यह प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध होगी।
West Bengal: बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन निरीक्षण (Special Intensive Review – SIR) को लेकर आज यानि सोमवार से न्यायिक जांच शुरू हो जाएगी। इस प्रक्रिया के तहत मतदाता सूची में दर्ज दावों और आपत्तियों की पूरी तरह से न्यायिक समीक्षा की जाएगी। कलकत्ता हाई कोर्ट ने इस जांच के लिए 150 सेशन जज और 250 अन्य न्यायिक अधिकारियों को नियुक्त किया है। इस व्यवस्था के तहत हर जिले में तीन सदस्यीय निगरानी समिति बनाई गई है, जो जांच की पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित करेगी।
निगरानी समिति में जिला जज, जिला मजिस्ट्रेट और संबंधित जिला पुलिस अधिकारी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद यह कदम उठाया गया है ताकि मतदाता सूची की विश्वसनीयता बनी रहे और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की अनियमितता न हो।
न्यायिक जांच का दायरा
मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) के सूत्रों के अनुसार, इस जांच का मुख्य फोकस उन मामलों पर होगा जिन्हें 'लाजिकल डिस्क्रेपेंसी' श्रेणी में रखा गया है। इन मामलों की जांच न्यायिक अधिकारियों के माध्यम से की जाएगी और 28 फरवरी तक इसकी पहली रिपोर्ट तैयार होने की उम्मीद है। निर्धारित समय सीमा के अनुसार अंतिम मतदाता सूची इसी तारीख को प्रकाशित की जाएगी, हालांकि उन मतदाताओं के दस्तावेज जिन्हें न्यायिक जांच के लिए भेजा गया है, उनकी सूची अलग से जारी की जाएगी।
इस न्यायिक प्रक्रिया का उद्देश्य मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की विसंगति या त्रुटि को दूर करना है। अनुमान है कि इस जांच में लगभग 45 से 50 लाख संदिग्ध मतदाता दस्तावेज शामिल होंगे। इनमें असंगत पारिवारिक डेटा, जन्मतिथि में त्रुटि, खाली या अस्पष्ट दस्तावेज, और अन्य तकनीकी विसंगतियाँ शामिल हैं।
रविवार को हुई तैयारी बैठक
रविवार को उत्तर कोलकाता के जेसोप भवन में उच्च स्तरीय बैठक हुई, जिसमें जजों और चुनाव आयोग के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में न्यायिक जांच की प्रक्रिया, दस्तावेज सत्यापन और समय सीमा के भीतर निपटान का रूपरेखा तैयार की गई। जजों और अधिकारियों को पूरी प्रक्रिया से अवगत कराया गया और तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया ताकि सोमवार से जांच सुचारू रूप से शुरू हो सके।
इस बैठक का मकसद यह सुनिश्चित करना था कि इतनी बड़ी संख्या में दस्तावेजों का समय पर और निष्पक्ष सत्यापन हो। सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बाद ही हाई कोर्ट ने सात सेवानिवृत्त न्यायाधीशों का विशेष पैनल गठित किया, जो जटिल मामलों का निपटारा करेगा।
सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट की भूमिका
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सुप्रीम कोर्ट ने मतदाता सूची की निगरानी को लेकर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि न्यायिक हस्तक्षेप के बिना इतने बड़े पैमाने पर 45 से 50 लाख दस्तावेजों का सत्यापन संभव नहीं है। इस निर्देश के बाद कलकत्ता हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुजय पाल ने एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाकर प्रक्रिया को अंतिम रूप दिया।
मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि मतदाता सूची में मौजूद तकनीकी और सूचनात्मक त्रुटियों को सुधारने के लिए हाई कोर्ट प्रशासन पूर्ण सहयोग करेगा। साथ ही, उन्होंने सात सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की, जो उत्तर और दक्षिण कोलकाता के विवादित मामलों की सुनवाई करेंगे। जिलों में उत्पन्न होने वाले विवादों का निपटारा वर्तमान या सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीशों और अतिरिक्त जिला न्यायाधीशों द्वारा किया जाएगा।
जांच प्रक्रिया की विस्तार से जानकारी
निर्वाचन आयोग के सूत्रों ने बताया कि करीब 50 लाख मतदाता आवेदनों को लेकर विवाद की स्थिति बनी हुई है। इनमें से 20 लाख मामले दस्तावेजों की कमी के कारण लंबित हैं। वहीं, 30 लाख मामले ऐसे हैं जिन्हें स्थानीय चुनाव अधिकारियों (AERO/ERO) ने मंजूरी दी थी, लेकिन आयोग की 'सुपर-चेकिंग' में वे संदिग्ध पाए गए।
अब इन सभी विवादित मामलों को न्यायिक अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा। आयोग ने सभी अधिकारियों को पोर्टल और सिस्टम की तकनीकी जानकारी प्रदान कर दी है ताकि जांच सोमवार से बिना किसी बाधा के शुरू हो सके।
लोकतांत्रिक अधिकारों और पारदर्शिता
इस प्रक्रिया के दौरान पारदर्शिता बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है। तृणमूल कांग्रेस के नेता अभिषेक बनर्जी ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पोर्टल की पारदर्शिता पर चिंता जताई है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि बंगाल के मतदाताओं के लोकतांत्रिक अधिकारों के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
निर्वाचन आयोग ने आश्वस्त किया है कि सभी प्रक्रियाएं पूरी तरह से न्यायिक निगरानी में होंगी और किसी भी तरह की अनियमितता नहीं होने दी जाएगी।
अंतिम मतदाता सूची और पूरक सूची
प्रशासनिक योजना के अनुसार, 27 फरवरी तक जिन मामलों का निपटारा हो जाएगा, उन्हें अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाएगा। शेष मामलों को बाद में पूरक सूची के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इस तरह से मतदाता सूची पूरी तरह से सटीक और अपडेटेड होगी।
इस प्रक्रिया में मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक और मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी शामिल हैं। उन्होंने तय किया है कि न्यायिक निगरानी के तहत सभी विवादों का निष्पक्ष समाधान सुनिश्चित किया जाएगा।








